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नारीशक्ति का वंदन

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20 सितम्बर 2023 की सुबह.
चरित्तर चाचा की मंडली के चेहरों पर मृदु मुस्कान. ‘नारी शक्ति वंदन बिल’ संसद से पारित हो गया था. यह 128वां संविधान संशोधन (Constitutional Amendment) बिल था. कहां तो 81वां संशोधन बिल और कहां 128 वां संशोधन बिल…!
81वां संशोधन बिल 1996 में लाया गया था और वही 128वें संशोधन बिल के रूप में 2023 में पारित हुआ. 1996 से 2023 यानी 27 वर्षों तक इस बिल को संसद (Parliament) में घसीटा जाता रहा जबकि इस बीच दूसरे 48 बिल पास हुए. आखिर, यह गलती किसकी थी? जब भी बिल आया, समाजवादियों ने ही इसका मुखर विरोध किया. एक समाजवादी ने तो इस बिल को सदन के वेल में ही आकर फाड़ दिया जबकि उसकी बेटी इस बिल की वकालत करती है.
आखिर, ऐसा क्यों? आज वे सुझाव पर सुझाव दिये जा रहे हैं…!

चुप्पी तोड़ते हुए खखरू चाचा ने चरित्तर चाचा से कहा-‘चाचा…, हमें इसकी पूरी जानकारी चाहिये.’
‘खखरू, इस बिल का पूरा इतिहास (History) तो मुझे मालूम नहीं, मनमोहिनी बेटी ही इसका विस्तृत विवरण दे सकती है क्योंकि वह प्रतिदिन प्रमुख समाचारों का कतरन रखने के साथ-साथ अपनी डायरी में भी नोट करती है.’
‘लेकिन, कहां है बिटिया?’ लूटन चाचा ने चिंता व्यक्त की.
लूटन चाचा का पूछना था कि 55वें वर्ष में भी छप्पन छुरी की तरह दिखने वाली मनमोहिनी ने मंडली में प्रवेश किया. आज वह कई महीनों के बाद ‘बिहरिया’ के गम से फ्री दिख रही थी.
‘आओ बेटी…, बैठो…! तुम्हारे खखरू चाचा नारी शक्ति वंदन बिल के बारे में कुछ जानकारी चाहते हैं.’

चारो ने एक स्वर में हां कहा तो मनमोहिनी अपने स्टाइल में शुरू हो गयी-
‘28 मई 2023 के शुभ दिन मोदी जी ने नये संसद भवन का उद्घाटन किया. विपक्षी नेताओं (खासकर वंशवादियों, कट्टर जातिवादियों और भ्रष्टाचार समर्थकों) ने उस समारोह में शिरकत नहीं की. फिर आया 19 सितम्बर 2023 का ऐतिहासिक दिन. यह गणेश चतुर्थी का पावन दिवस भी था. इसी पावन दिन लोकसभा की बैठक नये संसद भवन (Parliament House) में आहूत की गयी जिसमें विपक्षी नेताओं ने भी भाग लिया. अचानक इसी दिन मोदी जी ने ‘नारी शक्ति वंदन’ विधेयक पेश कर दिया.
कश्मीर से धारा 370 हटाने जैसा कड़ा कदम…!
सारा देश चकित…!
नारी शक्ति और भी चकित…!
पुरुषवादी नेता अवाक…! 19 सितम्बर 2023 को बिल पारित हो गया. लगा जैसे औरतों के दिल पर पुरुषों द्वारा लगायी गयी धारा 370 भी खत्म हो गयी हो.’

लेकिन, यह लागू कब से होगा? चरित्तर चाचा ने पूछा-
‘2021 से लंबित जनगणना और फिर निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन या पुनर्निर्धारण होने के बाद. यह सब 2026 के बाद हो जायेगा. 2029 के चुनावों से इस पर अमल होने लग जायेगा. यानी संसद में महिला ही महिला दिखेंगी?’
‘हां चाचा…, अभी हम सिर्फ 82 ही हैं, जो मात्र 15 प्रतिशत है. नारी शक्ति वंदन विधेयक के बाद हमारी संख्या बढ़कर 293 हो जायेगी.’
‘दूसरे देशों में ऐसा कुछ है क्या?’ लूटन चाचा ने पूछा-
‘हां…है. चीन में 25 प्रतिशत, नेपाल में 33 प्रतिशत, अफगानिस्तान में 27 प्रतिशत, बंगलादेश में 21 प्रतिशत और पाकिस्तान में 20 प्रतिशत जबकि अपने देश की लोकसभा में मात्र 15 प्रतिशत और राज्यसभा में 14 प्रतिशत ही है.’

‘जय हो नारी शक्ति वंदन बिल की…!’ चारो ने जयकारा लगायी.
‘आप लोग खुश हैं जबकि यह पुरुषों का हक छीनने का मामला है?’
‘नहीं बेटी…! ऐसी बात नहीं है. पहले लोग कहते थे कि आंगन की शोभा औरतों से है, अब कहेंगे कि संसद की शोभा औरतों से है.’
‘सो तो है चाचा जी…! लेकिन यह परिवर्तन पुरुषवादी समाज हजम कर पायेगा?’
‘बर्दाश्त करना पुरुषों की मजबूरी है. युग हमेशा परिवर्तनकारी रहा है बेटी…! आदिकाल में भी शासन स्त्रियों के हाथों में था और अब आधुनिक काल में भी पावर उन्हीं के हाथों में होगा.’
‘सवाल तो यह है कि इन सीटों पर वंशवादी और अभिजात्यवर्ग की महिलाएं ही कहीं काबिज न हो जायें.’


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लूटन चाचा ने अपनी चिंता व्यक्त की तो मनमोहिनी बोली-
‘सो तो होगा चाचा जी…! अभी मध्यप्रदेश के एक नेता ने मौका मिलते ही खुद अपने लिए ही नहीं, अपनी समधन और भांजे के लिए भी पार्टी का टिकट दिला दिया. एक समाजवादी ने घर में औरत-मर्द मिलाकर 35 लोगों को पार्टी टिकट या पार्टी का पद दिया. बिहार के एक नेता ने चार-चार लोगों को लोकसभा में भेजा. वहीं रानी के पेट से अब राजा पैदा नहीं होगा कहने वाला नेता घर में दनादन राजा पैदा कर रहा है.’
‘सच कहिये तो भ्रष्ट, वंशवादी और जातिवादी नेता को चुननेवाली जनता ही आजादी की दुश्मन है’ – झगड़ू बोला.
‘इसमें भी बदलाव आयेगा झगड़ू.’ झगड़ू का जवाब चरित्तर चाचा ने दिया.
‘लेकिन कब…?’ झगड़ू ने फिर पूछा.
‘जब मनमोहिनी जैसी औरतें आगे बढ़कर चुनाव लड़ेंगी.’
‘नहीं चाचा…!’ मनमोहिनी ने थोड़ा सकुचा कर उत्तर दिया.

‘नहीं बेटी…! तुम जैसी पढ़ी-लिखी और समझदार बेटियों को चुनाव लड़ना ही पड़ेगा.’
‘यदि बिटिया जीत गयी, तो हमें चाय बनाकर कौन पिलायेगी?’
‘फुलेना की बहू…!’
‘लेकिन, फुलेना तो यहां है नहीं?’
‘मनमोहिनी के लोकसभा जाते ही वह यहां चला आयेगा.’
‘और बिहरिया…?’
‘देखिये चाचा लोग…, उस भ्रष्ट आदमी (Corrupt Man) का नाम भी मत लीजिये!’ मनमोहिनी तमककर बोली.
‘लेकिन, लोग तो तुम्हें उसी चोर की पत्नी कहेंगे?’
‘नहीं…, मैं उससे तलाक ले लूंगी.’
मनमोहिनी का निर्णय सुनकर मंडली भौंचक रह गयी.

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