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बेगूसराय : यह है हकीकत हैवानियत की

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विष्णुकांत मिश्र
22 जुलाई 2023

Begusarai : बिहार (Bihar) के बेगूसराय में हुई हैवानियत की तुलना मणिपुर (Manipur) की बर्बरता से नहीं की जा सकती. नग्नता का स्वरूप हालांकि करीब -करीब समान है, पर घटना की प्रकृति और कारण भिन्न हैं. बेगूसराय का वहशीपना यौन विकृति (Sexual Perversion) से जुड़ा मामला प्रतीत होता है. मणिपुर का मामला ‘ यौन आक्रमण’ है. पर, मूल मुद्दा राष्ट्र के हित -अहित से जुड़ा है. जातीय हिंसा और महिलाओं के साथ दरिंदगी ने संपूर्ण देश का सिर शर्म से झुका दिया है. इसकी जितनी भी भर्त्सना की ‌जाये‌ वह कम होगी. मणिपुर के पीड़ादायक‌ वाकये से तुलना नहीं करने का मतलब यह नहीं कि बेगूसराय के मामले में गंभीरता नहीं दिखायी जाये, नजरंदाज कर दिया जाये.

शर्म की बात तो है ही
बेगूसराय के मामले‌ में दरिंदगी का स्वरूप जो रहा हो, विधि – व्यवस्था की दृष्टि से राज्य स्तरीय शर्म की बात तो यह है ही. इस कारण कुछ अधिक कि नाबालिग पीड़िता ‘संरक्षित समाज’ की है. बात ऐसी नहीं थी कि समाज के स्तर से उसका निपटारा नहीं हो पाता. तब भी समाज यदि संवेदनहीन था तो फिर पुलिस समाधान (Police Solution) निकालती. लेकिन, बेखौफ आततायियों ने कानून अपने हाथ में लेकर गांव , समाज और सरकार, सबको शर्मसार कर दिया. मामला तेघड़ा थाना क्षेत्र के एक गांव का है. बेगूसराय पुलिस की संबंधित प्रेस विज्ञप्ति (Press Release) में गांव का नाम पकठौल (Pakthaul) बताया गया है.

लांघ बैठे सीमा
गांव में जिला स्तरीय पहचान रखने वाले भजन- कीर्तन गायक किशनदेव चौरसिया (Kishandev Chaurasia) रहते हैं. इचछुकों को वह वाद्ययंत्र वादन (Instrument Playing) का प्रशिक्षण भी देते हैं. ‘ संरक्षित वर्ग’ की 17 वर्षीया एक नाबालिग लड़की हारमोनियम सिखने आती थी. उसी‌ क्रम में अंतरंगता कायम हो गयी. ऐसी कि दोनों लोकलाज की सीमा लांघ बैठे. वैसे, पुलिस अधीक्षक योगेन्द्र कुमार (Yogendra Kumar) के मुताबिक पीड़िता ने कुछ और बातें कही है. जो हो, तकरीबन पचास वर्ष के अधेड़ किशनदेव चौरसिया की इस पाप से आस – पड़ोस के लोगों का खून खौल उठा. योजनाबद्ध तरीके से कुछ लोगों ने वृहस्पतिवार की रात में किशनदेव चौरसिया के घर में दोनों को आपत्तिजनक अवस्था (Critical Condition) में दबोच लिया. पकड़ने के‌ बाद उनके कपड़े फाड़ दिये.


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नंगा कर पीटा
कथित रूप से उसी बंद कमरे में नग्नावस्था में दोनों की बेरहम पिटाई ही नहीं की, अपनी ‘नामर्दगी’ का वीडियो बना‌ सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया. वीडियो देख बेगूसराय की पुलिस सक्रिय हुई. पीड़िता को खोज उसकी चिकित्सीय‌ जांच (Medical Examination) करवायी गयी. फर्द बयान भी दर्ज‌ किया गया. प्राथमिकी भी. पीड़िता द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर चार लोगों को नामजद किया गया है. किशनदेव चौरसिया को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है. उनकी गिरफ्तारी हो गयी है. शेष तीन उसी गांव के रामजतन पासवान, रवीन्द्र ठाकुर और दिलीप पोद्दार हैं. पुलिस इन्हें तलाश रही है.

उठ रहे सवाल
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई तो की, पर मार खाये किशनदेव चौरसिया को मुख्य अभियुक्त बनाये जाने पर सवाल भी उठ रहे हैं. भाजपा (BJP) ने इसे राजनीति का मुद्दा बना दिया है. रविवार को संभवतः विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha) वहां पहुंचेंगे. कारण जो हो, भाजपा के स्थानीय कुछ नेता इसे ज्यादा तूल नहीं देना चाहते हैं.

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