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सीतामढ़ी : सांसद को मिल गयी थाह अपनी हैसियत की

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मदन मोहन ठाकुर
30 दिसम्बर, 2021

SITAMARHI : गांव – घर में जब कभी किसी मामले में हस्तक्षेप करने वाले की रणनीति जमीन पकड़ लेती है तो लोगों के मुंह से बरबस निकल पड़ता है- महतो बन रहे थे. मतलब कि अपना प्रभुत्व जमा रहे थे, नाकामयाब रहे. सीतामढ़ी जिला परिषद के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में क्षेत्रीय जदयू सांसद सुनील कुमार पिंटू (Sunil Kumar Pintu) भी वैसा ही कुछ कर रहे थे. सिक्का जमा नहीं पाये. किस्मत का साथ नहीं मिला, शिकस्त खा गये. हालांकि, उनकी रणनीति जिताऊ थी, अभेद्य नहीं रहने के कारण निराशा का वाहक बन गयी. प्रतिद्वंद्वी खेमे ने छेद कर अपनी राह निकाल ली. फिर भाग्य का साथ मिल गया. बाजी हाथ लग गयी.

इस पूरे प्रकरण में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष जो राजनीतिक खेल हुए, वे किसी भी रूप में सांसद सुनील कुमार पिंटू के लिए सुकूनदायक नहीं हैं. इस फलाफल के और भी कई संकेत हैं. किसी के पांव जमने के तो अनेक की नींद उड़ जाने के संकेत. जीत पर जश्न मनाने वालों के लिए भी चिंतन का विषय है कि अध्यक्ष पद के लिए बराबर पर छूटी बाजी में भाग्य का साथ नहीं मिलता, तो फिर क्या होता?

लॉटरी में चमक गयी किस्मत
38 सदस्यीय सीतामढ़ी जिला परिषद (Sitamarhi Zila Parishad) के अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति (महिला) के लिए सुरक्षित है. उपाध्यक्ष का पद सामान्य के लिए है. अध्यक्ष पद के लिए उमा देवी (Uma Devi) और अदिति कुमारी (Aditi Kumari) में मुकाबला हुआ, जो 19-19 की बराबरी पर छूटा. लॉटरी में किस्मत अदिति कुमारी की चमक गयी. वह अध्यक्ष बन गयीं. उमा देवी जिला परिषद की निवर्तमान अध्यक्ष हैं. उनके पीछे क्षेत्रीय जदयू सांसद सुनील कुमार पिंटू और उसी पार्टी के विधान पार्षद रामेश्वर कुशवाहा (Rameshwar Kushwaha) की ताकत लगी थी. इन दोनों के अलावा साथ में और कोई नहीं था.

इक्के-दुक्के को छोड़ जिले के तमाम प्रभावशाली नेता दलीय सीमाओं को लांघ अदिति कुमारी को अध्यक्ष पद पर काबिज कराने में जुटे थे. पूर्व सांसद अर्जुन राय (Arjun Ray) और सीताराम यादव (Sitaram Yadav) तथा पूर्व विधान पार्षद वैद्यनाथ प्रसाद (Vaidhnath Prasad) खुले रूप में सक्रिय थे. हालांकि, अदिति कुमारी की जीत के लिए विधान पार्षद देवेश चन्द्र ठाकुर, विधायक दिलीप राय, मिथिलेश कुमार, अनिल कुमार, मोतीलाल प्रसाद, गायत्री देवी तथा जदयू नेता विमल शुक्ला ने भी जोरदार अभियान चला रखा था. वैसे, पूरे अभियान की कमान श्रीनारायण सिंह (Srinarayan Singh) ने संभाल रखी थी.

जीत का जश्न.

पुत्र भी बन गया बड़ा कारण
विश्लेषकों की मानें तो इस अभियान को कामयाबी तक ले जाने में निवर्तमान अध्यक्ष उमा देवी के पुत्र प्रवीण कुमार (Pravin Kumar) की असंतोषजनक कार्यशैली की भी बड़ी भूमिका रही. प्रवीण कुमार की उनके अध्यक्ष कार्यकाल के दौरान की कार्यशैली से आमलोग ही नहीं, उक्त तमाम नेता भी नाखुश थे. सांसद सुनील कुमार पिंटू को लक्ष्य नहीं प्राप्त कर सकने में यह भी एक कारक रहा. श्री नारायण सिंह को सुधीर कुंवर के अलावा जिला पार्षद प्रवीण कुमार गुड्डू, विजय मिश्र, नवीन कुमार आदि का भरपूर साथ मिला.

इन सबके सहयोग से वह न सिर्फ अदिति कुमारी को अध्यक्ष बनवाने में सफल रहे, बल्कि अपनी पत्नी संझा देवी (Sanjha Devi) को उपाध्यक्ष के पद पर आसीन कराने में भी उन्हें कामयाबी मिल गयी. अदिति कुमारी डुमरा (निर्वाचन क्षेत्र संख्या-16) से जिला पार्षद निर्वाचित हुईं हैं. उपाध्यक्ष संझा देवी रून्नी सैदपुर (निर्वाचन क्षेत्र संख्या-10) से. संझा देवी ने जिल परिषद की पूर्व अध्यक्ष अति प्रभवशाली इन्द्राणी देवी को शिकस्त दी.

पिछड़ गयीं रेखा कुमारी
गौर करने वाली बात यह भी है कि अध्यक्ष पद के चुनाव में अदिति कुमारी को जहां 19 मत ही मिल पाये वहीं उपाध्यक्ष के चुनाव में संझा देवी को 21 मत मिले. उनका मुकाबला रेखा कुमारी (Rekha Kumari) से हुआ. रेखा कुमारी शहर के प्रसिद्ध शिशु रोग चिकित्सक डा. मनोज की पत्नी हैं. संझा देवी के उपाध्यक्ष बनने के बाद उनके पति श्रीनारायण सिंह ने कहा कि, सीतामढ़ी जिला परिषद को नयी पहचान दिलाने की हरसंभव कोशिश की जायेगी. फिलहाल उनका यही लक्ष्य है, और कुछ नहीं.

अध्यक्ष पद का ख्वाब गुलशन परवीन (Gulshan Parveen) ने भी पाल रखा था. पति द्वारा उचित-अनुचित तरीके से अर्जित अकूत धन पर भरोसा था. वह धन धरा रह गया. कारण जो रहा हो, ठोस रणनीति नहीं बन पायी. परिणामतः मंशा फलीभूत नहीं हुई. 12 राज्यों की पुलिस के लिए वांछित रहे कथित कुख्यात अंतर्प्रांतीय चोर आर्यन खन्ना उर्फ इरफान उर्फ उजाले की पत्नी गुलशन परवीन पुपरी (निर्वाचन क्षेत्र संख्या-34) से निर्वाचित हुई हैं. इरफान उर्फ उजाले (Irfan urf Ujale) की गिरफ्तारी हाल में ही हुई. फिलहाल वह गाजियाबाद जेल में है.


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गुलशन चलेंगी नया दांव?
हस्थानीय राजनीति में ऐसी संभावना जतायी जा रही है कि जिला परिषद का अध्यक्ष पद पाने का ख्वाब अधूरा रह जाने के बाद गुलशन परवीन बिहार विधान परिषद के आसन्न चुनाव में सीतामढ़ी-शिवहर क्षेत्र से किस्मत आजमा सकती हैं. हालांकि, इस संभावना का कोई मजबूत आधार नहीं दिखता. विश्लेषकों का तो यहां तक मानना है कि गुलशन परवीन जिला पार्षद बन गयीं, यही उनके लिए काफी है. अध्यक्ष बनने की चाहत रीगा (निर्वाचन क्षेत्र संख्या-5) की जिला पार्षद सुशीला देवी और बेलसंड (निर्वाचन क्षेत्र संख्या-8) की जानकी कुमारी की भी थी. लेकिन, उन्हें कोई प्रस्तावक-समर्थक ही नहीं मिल पाया. उपाध्यक्ष पद के लिए संझा देवी के अलावा बाजपट्टी के देवेन्द्र यादव (Devendra Yadav) और प्रवीण कुमार गुड्डू (Praveen Kumar Guddu) भी हाथ-पांव मार रहे थे. इन सबके साथ भी वैसा ही कुछ हुआ.

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