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बिहार : बेशरम है वह निर्माण जो घटिया होने के बावजूद ढह नहीं रहा…

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विशेष प्रतिनिधि
31 जनवरी, 2022

PATNA : एक जमाना था जब राजा-महराजा इमारत बनाते थे तो यह सोचकर कि पीढ़ियां इसे देखेंगी. अभी का जमाना है. इसमें पुल उद्घाटन से पहले ध्वस्त हो जाता है. इमारतें एक तरफ बनती रहती हैं. दूसरी तरफ ढहती रहती हैं. कुछ इमारतें अधिक मजबूत बन जाती हैं तो वह उद्घाटन के बाद आहिस्ते-आहिस्ते ढहती हैं. जैसा हाल में पटना के आईजीआईएमएस (IGIMS) के कैंसर (Cancer) वाली इमारत के साथ हुआ. हैंडओवर होने के बाद इसने ढहने के काम  में हाथ लगाया. पहले फाल्स सिलिंग गिरी. फिर दीवार गिरी. यही स्पीड जारी रही तो साल दो साल में पूरी इमारत (Building) गिर जायेगी.

बना रहेगा ढहने का सिलसिला
होना जाना कुछ नहीं है. एक कमेटी बन गयी है. दो-चार और कमेटी बनेगी. इधर, इमारत भी ढहती रहेगी. लोग इस पर ध्यान नहीं देंगे. क्योंकि तब तक कोई दूसरी और इससे बड़ी इमारत भी ढह जायेगी. याद होगा. विश्वस्तरीय निर्माण का दावा जिस पटेल भवन (Patel Bhawan) के लिए किया गया था, उसके प्रवेश द्वार (Main Gate) के झड़ने की खबर आयी थी. कुछ नहीं हुआ. प्लास्टर (Plaster) करके ढंक दिया गया. कोई जांच भी हुई होगी, इसका पता आम लोगों को नहीं होगा.

ढहने और बनने की कहानी
अब इन इमारतों या दीगर सरकारी निर्माण (Nirman) के ढहने और बनने की कहानी एक उदाहरण से समझिये. एक ठेकेदार (Thekedar) ने पिछले साल के नवम्बर (November) से पहले कहीं निर्माण का ठेका लिया था. बेचारे ने उस समय के मंत्री (Minister) की यथाशक्ति सेवा की थी. नकद में 25 लाख दिये थे. विभाग के अफसरों (Officers) और इंजीनियरों (Engineers) को तयशुदा रकम पहले अदा कर दी गयी थी. बेचारे की किस्मत खराब. नवम्बर के बाद सरकार (Government) बदल गयी. नये वाले मंत्री ने अपना हिस्सा मांगा.

दे दिया मंत्री को हिस्सा
ठेकेदार ने बता दिया कि हुजूर! हम पहले से हलाल हैं. मंत्री को जरा भी दया नहीं आयी. कहा-जिसको दिया सो दिया. हम तो अपना हिस्सा लेकर रहेंगे. ठेकेदार क्या करता. उसने मंत्री को हिस्सा दे दिया. न देता तो पांच करोड़ की दूसरी किस्त फंस जाती. रुपया देकर साइट पर लौटे ठेकेदार ने उस क्षति की भरपाई सीमेंट (Cement) से की. छड़ और गिट्टी पर भी थोड़ा-थोड़ा लोड डाला. ईंट का दर्जा थोड़ा नीचे खिसकाया.

पीठ थपथपा दी
मंत्री से आग्रह किया कि मौका मिले तो काम का मुआयना कर लीजिये. मंत्री आये. काम का मुआयना किया. ठेकेदार की पीठ भी थपथपा दी. आदेश दिया कि जल्दी से जल्दी निर्माण कार्य पूरा करो. हम उद्घाटन करेंगे. ठेकेदार अलग से जल्दी में आ गया. जल्दी से निर्माण हो जाये ताकि सरकार को सुपुर्द करके आराम से दूसरे काम में हाथ लगायें. देर हुई तो उद्घाटन से पहले जमीन धर लेगा.

ऐसा ही हो रहा है निर्माण का काम
अब बताइये. यह निर्माण ढहेगा नहीं तो क्या होगा. यह हाल किसी एक विभाग का नहीं है. निर्माण वाले सभी विभागों में इसी ढर्रे से काम होता है. बेशरम है ऐसा निर्माण जो घटिया होने के बावजूद ढह नहीं रहा है.

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