चौपाल में चुनाव : रून्नीसैदपुर की हवा है खराब… मतदाता कर देंगे तब हिसाब!
मदनमोहन ठाकुर
01अप्रैल 2025
Sitamarhi : बिहार (Bihar) विधानसभा का 2025 का चुनाव (Election) अब छह-सात माह ही दूर रह गया है. यह अक्तूबर-नवम्बर में होगा. चुनाव में क्या होगा क्या नहीं, इसकी चर्चा बैठकखानों और चौक-चौराहों पर होने लगी है. हालांकि, राजनीति (Politics) में रूचि रखने वाले लोग बात फिलवक्त संभावित उम्मीदवारी को लेकर करते हैं. कहां किसका पत्ता साफ हो जायेगा, कहां किसको अवसर मिल जायेगा और कहां किसका सितारा बुलंद हो जायेगा, चुनाव पूर्व की ‘चौपाली बहस’ मुख्य रूप से इस पर ही केन्द्रित रहती है. राज्य के अन्य विधानसभा क्षेत्रों की तरह सीतामढ़ी जिले के रून्नीसैदपुर (Runnisaidpur) में भी बहस का यह दौर चल रहा है. रून्नीसैदपुर उन कुछ विधानसभा क्षेत्रों में एक है जिस पर एनडीए (NDA) के कई प्रमुख घटक दलों की नजर जमी है.
विकास पर ध्यान नहीं
वर्तमान में पंकज कुमार मिश्र (Pankaj Kumar Mishra) रून्नीसैदपुर से जदयू (JDU) के विधायक हैं. सीटिंग होने के नाते उनकी दावेदारी में दम दिखता है. पर, हकीकत में ऐसा है नहीं. उनके समर्थकों का दावा अपनी जगह है, एनडीए के नेताओं-कार्यकर्ताओं के एक तबके का ही मानना है कि अधिसंख्य क्षेत्रीय लोग पंकज कुमार मिश्र के कार्यकलापों से संतुष्ट नहीं हैं. ऐसे लोगों की धारणा है कि विधायक (MLA) के रूप में पंकज कुमार मिश्र ने जन अपेक्षा के अनुरूप विकास के कार्यों पर ध्यान नहीं दिया. कथित रूप से जोर उनका वैसे ही कार्यों पर रहा जिनमें प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष ठेकेदारी का स्वार्थ जुड़ा था. वैसे, उनके समर्थक ऐसी बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं.
राहत मिल गयी
कहा जाता है कि इसी ठेकेदारी को लेकर क्षेत्र में आतंक का सिक्का चला रहे कुख्यात सरोज राय (Saroj Rai) ने विधायक से रंगदारी के रूप में बड़ी रकम की मांग की थी. रंगदारी नहीं मिलने पर प्राण हर लेने की धमकी दी थी. इस धमकी से सिर्फ विधायक की ही नहीं, ‘कानून का राज’ (Rule of law) वाले शासन-प्रशासन की भी सांसें अटक गयी थीं. सत्ताधारी दल के विधायक को धमकी! हतप्रभ बिहार की पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और त्वरित कार्रवाई में हरियाणा (Haryana) पुलिस के सहयोग से मानसेर (Manser) में सरोज राय को मुठभेड़ में मार गिराया. पंकज कुमार मिश्र को राहत मिल गयी. अटकी सांसें सामान्य स्थिति में तो आ गयीं, पर इससे 2025 के चुनाव की राह कुछ अधिक कठिन हो गयी है.
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मजबूती मिल गयी
स्थानीय लोगों की मानें, तो रून्नीसैदपुर विधानसभा क्षेत्र के जिस भी इलाके में पंकज कुमार मिश्र जाते हैं वहां रंगदारी का सवाल उठ जा रहा है. लोगों की जिज्ञासा यह जानने की होती है कि आखिर सरोज राय ने सत्तारूढ़ दल के विधायक से बेखौफ अंदाज में रंगदारी के तौर पर इतनी बड़ी रकम की मांग क्यों की? कनफूसकियों में ये बातें हैं कि विधायक को इस सवाल का जवाब देते नहीं बन रहा है. उधर, सरोज राय के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद यादव समाज (Yadav Society) में गजब की एकजुटता कायम हो गयी है. इससे राजद की पूर्व विधायक मंगीता देवी (Mangita Devi) की राजनीति को मिली मजबूती भी पंकज कुमार मिश्र के लिए परेशानी का सबब बन गयी है.
हिसाब कर देंगे मतदाता
इस बीच चर्चा यह भी हो रही है कि 2025 के चुनाव में एनडीए में सिर्फ सीटिंग के आधार पर किसी की उम्मीदवारी पक्की नहीं कर दी जायेगी. विधायक के रूप में कार्यकलापों, विकास कार्यों की उपलब्धियों और आचरणों के अंदरूनी सर्वे और समीक्षा के बाद ही उम्मीदवारी घोषित की जायेगी. विश्लेषकों का मानना है कि यदि सच में ऐसा हुआ तब पंकज कुमार मिश्र इस कसौटी पर शायद ही खरा उतरेंगे. क्षेत्र में पसरे असंतोष से यह संकेत भी मिल रहा है कि पात्रता की कसौटी पर खरा नहीं उतरने के बाद भी उम्मीदवारी दुहरा दी जाती है तब मतदाता उनका हिसाब कर देंगे.
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