बढ़ी सामाजिकता पर बड़ा सवाल : चेतना खुद जागृत हुई या किसी ने ‘गुरु मंत्र’ दिया?
विशेष प्रतिनिधि
01 अप्रैल 2025
PATNA : होश संभालते ही अध्यात्म की राह बढ़ गये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के पुत्र निशांत कुमार (Nishant Kumar) के साथ अचानक ऐसा क्या हुआ कि पीछे मुड़ सांसारिक हो गये ? जिस राजनीति को हिकारत की दृष्टि से देखते थे उसके प्रति उनमें आकर्षण पैदा हो गया? सार्वजनिक सक्रियता बढ़ गयी? आखिर, ऐसा कैसे हो रहा है? पिता की चमकदार राजनीतिक विरासत (Political legacy) संभालने की चेतना खुद-ब-खुद जागृत हो उठी या फिर किसी का गुरु मंत्र मिल गया? नीतीश कुमार की अजीबोगरीब हरकतों के सुर्खियां बटोरने की वजह से निशांत कुमार का यह मामला फिलहाल गौण पड़ गया है.
वोट हमारा, राज तुम्हारा…
इसके बावजूद उनकी अप्रत्याशित नहीं चलेगा बढ़ी सामाजिकता का रहस्य जानने और समझने की उत्सुकता हर किसी की बनी हुई है. हो सकता है यह महज गप हो, मगर राजनीतिक हलकों में ऐसी चर्चा है कि निशांत कुमार की बढ़ी सामाजिकता के पीछे वह बड़ा दिमाग है जो फिलहाल धीमे स्वर में ही सही, ‘वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं चलेगा’ नारे को नयी आवाज दे रहा है. वह बड़ा दिमाग इस रूप में क्यों सक्रिय हुआ, इसकी बहुत रोचक कथा है. सबको मालूम है कि ‘वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं चलेगा’ नारा समाजवादियों का था. कहते हैं कि इसे नीतीश कुमार की पार्टी के एक नेता अघोषित रूप में अपने दल में लागू कराने के लिए जोर लगा रहे हैं.
दांव उल्टा पड़ गया
नेताजी पहले राजनीति में नहीं थे. प्रशासन में थे. पार्टी में बड़ा पद मिल गया. बिहार यात्रा (Bihar Yatra) की शुरुआत कर दी. दल के पुराने ठेकेदारों को खतरा महसूस हुआ. किनारा लगाने का उपाय कर दिया गया. नये नेताजी की यात्रा रोक दी गयी. उत्तर बिहार के कुछ जिलों में यात्रा की तैयारी पूरी हो चुकी थी. ऐन मौके पर फरमान जारी कर दिया गया. ठेकेदारों को लगा कि काम तमाम हो गया. काम तमाम नहीं हुआ. दांव उल्टा पड़ गया. नये वाले नेताजी का एक ही संदेश है कि किसी भी तरह इस बार के विधानसभा चुनाव में पार्टी को बचा लिया जाये.
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दो नेताओं की पहचान
यात्रा रोकने पर नेताजी के समर्थकों ने हिसाब लगाया कि इसके लिए कौन नेता जवाबदेह है. कुल जमा दो नेताओं की पहचान की गयी. समर्थकों का कहना था कि ये दोनों हमारे वोट से ही चुनाव जीतते हैं. उच्च सदन में जाते हैं. इनके स्वजातियों का वोट दूसरे दल को मिलता है. ये दोनों परजीवी हैं. इनमें से एक नेता की पंचायत के वोट का रिकार्ड मंगवाया गया. पता चला कि पिछले तीन-चार चुनावों में मिथिला वाले नेताजी की पंचायत में नीतीश कुमार की पार्टी को सबसे कम वोट मिला है.
नेताजी बजा देंगे तब डंका
दूसरे वाले नेता का भी वही रिकार्ड है. क्योंकि दूसरे वाले नेता की पंचायत नीतीश कुमार के विशेष प्रभाव वाले क्षेत्र में पड़ती है. इसलिए वोट तो पड़ा, लेकिन नेताजी के पारिवारिक बूथ पर पार्टी पिछड़ गयी. नये वाले नेताजी शांति से काम कर रहे हैं. उनका शिक्षण और प्रशिक्षण ऐसा नहीं है कि मामूली बात पर उतावले हो जायें. ठोस योजना बना रहे हैं. सच का दावा नहीं, चर्चा है कि निशांत कुमार की बढ़ी सामाजिकता उसी योजना का एक अहम हिस्सा है. निशांत कुमार की राजनीति में विरासती सक्रियता के रूप में योजना सफल हुई नहीं कि नये नेताजी डंका बजा देंगे-वोट हमारा, राज तुम्हारा. नहीं चलेगा जी.
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