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पूछ रही कुढ़नी … तेजस्वी का ‘आत्मसमर्पण’ क्यों?

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विभेष त्रिवेदी
28 नवम्बर, 2022

MUZAFFARPUR : गोपालगंज (Gopalganj) और मोकामा के बाद अब कुढ़नी उपचुनाव पर है पूरे बिहार (Bihar) की नजर. तीनों उपचुनावों के परिणाम से 2024 के लोकसभा चुनाव के समीकरण ढूंढ़े जायेंगे. पता चलेगा कि कौन दल, कौन गठबंधन कितने पानी में है और आने वाले समय में किसका तिलिस्म चलेगा? नीतीश कुमार (Nitish Kumar) महागठबंधन का इंजन बन दिल्ली पहुंचते हैं या उन्हें पैसेंजर बनना पड़ जा सकता है? गोपालगंज और मोकामा की तरह कुढ़नी (Kurhani) में भी सियासी मठाधीशों का तिलिस्म टूटेगा? गोपालगंज व मोकामा (Mokama) में नीतीश कुमार का करिश्मा नहीं चला. हालांकि, दोनों में से कहीं जदयू का उम्मीदवार नहीं था, उम्मीदवार राजद के थे. उपचुनाव (By Election) के परिणाम बताते हैं कि जदयू के महागठबंधन से जुड़ने का तनिक भी लाभ राजद (RJD) को नहीं मिला. गोपालगंज में कुशवाहा समाज भाजपा के पक्ष में चला गया. राजद ने भाजपा के आधार मतों में सेंधमारी के लिए वैश्य उम्मीदवार खड़ा किया. नीतीश कुमार के जुड़ने और वैश्य वोट में बिखराव कराने के बावजूद लालू प्रसाद (Lalu Prasad) का अपने गृह जिला गोपालगंज में भी तिलिस्म नहीं चला.


नीतीश कुमार ने कुढ़नी में जदयू के व्यापक जनाधार का हवाला देते हुए तेजस्वी प्रसाद यादव के सामने आसान जीत का दावा किया है. अब सारा दारोमदार नीतीश कुमार पर है. कहा जा रहा है कि उम्मीदवार भले मनोज कुमार सिंह उर्फ मनोज कुशवाहा हैं, प्रतिष्ठा यहां नीतीश कुमार की दांव पर है.


अटूट नहीं रहा माय
यह भ्रम भी करीब-करीब टूट गया कि ‘माय’ के कंक्रीट से बनी दीवार अटूट है. मुस्लिम मतों पर राजद का एकाधिकार माना जाता रहा है. मुस्लिम (Muslim) मतों का यह रुझान कुढ़नी व उसके आगे कायम रहा, तो सियासी समीकरण में भारी उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इन सब के साथ वैश्य मतों पर भाजपा (BJP) के एकाधिकार का भी तिलिस्म टूटा. मोकामा में नीतीश कुमार अप्रासंगिक-सा दिखे. बिहार भाजपा के दिग्गजों का तिलिस्म तो बोचहां (Bochahan) के वोटर पहले ही तोड़ चुके हैं. कुढ़नी का परिणाम जो आये, इन उपचुनावों के परिणाम राजनीतिक दलों को नये सिरे से गणित (Maths) बैठाने को बाध्य करेंगे. 2024 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) से पहले किसी दल को यह जानना हो कि विश्वसनीयता खो चुके किसी नेता को वोटर कैसे सबक सिखाते हैं, तो वह कुढ़नी का रुख कर सकते हैं. कुढ़नी जनता की नजरों से गिर चुके राजनेताओं को सबक सिखाने की तैयारी में है.

हर तरफ है बिखराव का खतरा
ऐसे में बिहार की जनता का मिजाज जानना-परखना है तो कुढ़नी (Kurhani) चलिये. किसी को नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की लोकप्रियता का हाल जानना है, उनकी सत्ता का इकबाल देखना है, तो कुढ़नी आ जायें. क्षेत्रीय क्षत्रपों की सियासी हैसियत जानना है तो कुढ़नी चलें. मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की औकात देखनी है तो कुढ़नी चलिये. हवा का रुख और वोटरों के चेहरे पर छाया गुस्सा बता रहा है कि इस बार कुढ़नी बेहद कुढ़ी हुई है. कुढ़नी के मतदाता (Voter) बड़े दलों की उम्मीदवारी से कुढ़ चुके हैं. कोई मल्लाह का टिकट कटने से नाराज है, तो कोई यादव को टिकट नहीं मिलने से. कोई मनोज कुशवाहा (Manoj Kushwaha) की उम्मीदवारी से गुस्से में है तो कोई चिराग पासवान (Chirag Paswan) की लोजपा (LJP) को तोड़े जाने से खफा है. कुढ़नी में यादव, भूमिहार, मुस्लिम, मल्लाह, वैश्य और कुशवाहा वोटर निर्णायक हैं. महागठबंधन में जदयू (JDU) ने पूर्व मंत्री मनोज कुशवाहा को, भाजपा ने पूर्व विधायक केदार प्रसाद गुप्ता को, एआईएमआईएम (AIMIM) ने गुलाम मुर्तजा अंसारी को और वीआईपी (VIP) ने नीलाभ कुमार को उम्मीदवार बनाया है. महागठबंधन को नीलाभ कुमार से और भाजपा को गुलाम मुर्तजा अंसारी से बड़ी उम्मीदें हैं. दोनों ओर आधार मतों में बिखराव का खतरा है.


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राजनीति के पंडित भी हैं अचंभित
राजनीति के पंडितों को भी यह बात समझ में नहीं आ रही है कि आखिर राजद (RJD) ने अपनी यह सीट क्यों छोड़ दी? दरअसल, कुढ़नी (Kurhani) हर दृष्टि से राजद की सीट है. 2020 में राजद के अनिल कुमार सहनी (Anil Kumar Sahani) की जीत हुई थी. कानून विरूद्ध आचरण की वजह से उनकी सदस्यता रद्द हो गयी. उपचुनाव इसी वजह से हो रहा है. सिटिंग-गेटिंग फार्मूला के तहत यह राजद की सीट है. राजग में भी कुढ़नी, जदयू की नहीं, भाजपा की सीट थी. 2015 के चुनाव में जदयू जब राजग में था, इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार केदार प्रसाद गुप्ता (Kedar Prasad Gupta) चुनाव लड़े. नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने अपने वीटो का इस्तेमाल करते हुए, राजद से कुढ़नी सीट मांग ली. यह समझ से परे है कि नीतीश कुमार ने ऐसा कौन-सा पाठ पढ़ाया कि तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejaswi Prasad Yadav) कुढ़नी सीट पर जदयू उम्मीदवार खड़ा कराने पर सहमत हो गये. कारण जो हो, इतनी बात सब को समझ में आ रही है कि नीतीश कुमार ने कुढ़नी में जदयू (JDU) के व्यापक जनाधार का हवाला देते हुए तेजस्वी प्रसाद यादव के सामने आसान जीत का दावा किया है. अब सारा दारोमदार नीतीश कुमार पर है. कहा जा रहा है कि उम्मीदवार भले मनोज कुमार सिंह उर्फ मनोज कुशवाहा (Manoj Kushwaha) हैं, प्रतिष्ठा यहां नीतीश कुमार की दांव पर है.

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