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कुढ़नी के अंगने में तेरा क्या काम है…!

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विभेष त्रिवेदी
29 नवम्बर, 2022

MUZAFFARPUR : सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार (Nitish Kumar) कुढ़नी में चुनावी सभा को संबोधित करने आयेंगे? भले ही उन्होंने अपने करीबी को टिकट दिलाया है, लेकिन इस बात की उम्मीद कम है कि वह कुढ़नी (Kurhani) आने की जहमत उठायेंगे. सवाल यह भी उठ रहा है कि नीतीश कुमार कुढ़नी में आखिर किस जमात का वोट (Vote) ट्रांसफर कराने आयेंगे? कुढ़नी की 23 ग्राम पंचायतों में एक भी कुशवाहा (Kushwaha) वोटर नहीं है. जहां जितनी संख्या में कुशवाहा वोटर हैं, वे स्वतः स्वजातीय जदयू उम्मीदवार मनोज कुशवाहा (Manoj Kushwaha) को वोट देंगे. कुशवाहा समाज को मनाने के लिए नीतीश कुमार को कुढ़नी आने की जरूरत नहीं पड़ेगी. गौरतलब है कि 2015 में मनोज कुशवाहा को कुछ ऐसे स्वजातीय वोटरों का समर्थन नहीं मिला था, जो उनसे व्यक्तिगत रूप से नाराज चल रहे हैं. कुढ़नी में कुर्मी वोटर कम हैं. ये परिणाम को प्रभावित करने की संख्या में नहीं हैं. नीतीश कुमार कुढ़नी आयें या न आयें, कुर्मी (Kurmi) समाज का बड़ा हिस्सा जदयू (JDU) को ही वोट करेगा.

कुढ़नी में सभा करेंगे नीतीश कुमार?
राजनीतिक समीक्षक टेलिस्कोप लेकर कुढ़नी में उस समाज की टोह ले रहे हैं, जो आज की तारीख में नीतीश कुमार के कहने पर जदयू उम्मीदवार को वोट देंगे. मोकामा (Mokama) और गोपालगंज (Gopalganj) में नजर नहीं आने वाले नीतीश कुमार के कुढ़नी में प्रगट होने की उम्मीद इसलिए है कि वह मनोज कुशवाहा पर मेहरबान रहे हैं. एक खतरा यह भी है कि नीतीश कुमार की चुनावी सभाओं की प्रतिक्रिया में शासन-प्रशासन से ऊब चुके वोटर केदार प्रसाद गुप्ता (Kedar Prasad Gupta) के पक्ष में तेजी से गोलबंद होंगे. ऐसे नाजुक मोड़ पर अटकलबाजी यह भी है कि कुढ़नी में जदयू की हार-जीत का आकलन करने के बाद ही नीतीश कुमार आयेंगे. अगर शुरू में ही मनोज कुशवाहा (Manoj Kushwaha) कमजोर नजर आये तो नीतीश कुमार अपने सिर पर उम्मीदवार की पराजय का सेहरा बांधने नहीं आयेंगे. विरोधी कह सकते हैं कि नीतीश कुमार की सभाओं के बावजूद जदयू (JDU) की हार हो गयी.

तेजस्वी प्रसाद यादव होंगे खेवनहार
कुढ़नी में जदयू उम्मीदवार मनोज कुशवाहा के लिए नीतीश कुमार की बजाय तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejaswi Prasad Yadav) कारगर खेवनहार होंगे. तेजस्वी प्रसाद यादव की सभाओं से यादवों (Yadav) और मुसलमानों (Muslim) की गोलबंदी होगी. वहां यादव और भूमिहार (Bhumihar) वोटर सर्वाधिक हैं. कभी कांग्रेस (Congress) के प्रो. शिवनंदन राय (Prof. Shivnandan Ray) विधायक निर्वाचित हुए थे, परन्तु लालू प्रसाद (Lalu Prasad) ने कुढ़नी में कभी यादव उम्मीदवार खड़ा नहीं किया. मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज, बरूराज, पारू, मीनापुर, गायघाट व औराई में यादव समाज से उम्मीदवार बनाते रहे हैं. जिले की 11 में से छह सीटों पर यादव उम्मीदवार उतारने की वजह से कुढ़नी में यादव को उम्मीदवार नहीं बना पाते हैं. यही वजह है कि सालों भर राजद (RJD) की सभाएं, बैठकें करने वाले मजबूत जनाधार वाले सुधीर यादव (Sudhir Yadav) चुनाव में दरकिनार कर दिये जाते हैं. मायूस यादव समाज चाहता है कि कुढ़नी में राजद किसी ऐसे व्यक्ति को प्रत्याशी बनाये जो यादवों को सम्मान दे. पूर्व में मनोज कुशवाहा तीन बार राजद को शिकस्त देकर विधायक निर्वाचित हुए. यही वजह है कि यादवों से उनका छत्तीस का रिश्ता है.


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यादवों को चुभ रही जदयू की उम्मीदवारी
महागठबंधन (Mahagathbandhan) में जदयू की उम्मीदवारी यादवों की आंखों में चुभ रही है. जैसे ही मनोज कुशवाहा को टिकट दिये जाने की खबर आयी, सकरी सरैया समेत यादव बहुल गांवों में लोग उनके खिलाफ मुखर हो गये. उनका सवाल यह भी है कि जब कुशवाहा समाज राजद (RJD) के खिलाफ वोट डालता है, तो यादव समाज कुशवाहा उम्मीदवार को समर्थन क्यों दे? 2015 के चुनाव में भी यादव मतों का एक हिस्सा मनोज कुशवाहा के खिलाफ केदार प्रसाद गुप्ता (Kedar Prasad Gupta) की झोली में गया था. ऐसा नहीं है कि यादवों में लालू प्रसाद और तेजस्वी प्रसाद यादव का प्रभाव नहीं है. उनके वोट का बड़ा हिस्सा राजद के पक्ष में जायेगा, परन्तु नामांकन से पहले ही केदार प्रसाद गुप्ता की प्रशंसा कर रहे यादव इस बार भाजपा (BJP) के लिए बोनस वोट का काम करेंगे. गांवों के यादव कह रहे हैं कि कुढ़नी सीट हारने से तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejaswi Prasad Yadav) की कुर्सी नहीं चली जायेगी. ऐसी स्थिति में यादव मतों में बिखराव को कुछ कम करने के लिए तेजस्वी प्रसाद यादव ही एकमात्र सहारा होंगे.

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