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अपनों ने उधेड़ दी नीतीश कुमार की सरकार की बखिया…!

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अशोक कुमार
05 अगस्त 2023

Purnia : पश्चिम बंगाल (West Bengal) से सटा बारसोई बिहार (Bihar) का ऐसा अनुमंडल है जहां मुसलमानों की सर्वाधिक आबादी है. इसी बारसोई में उस दिन पुलिस की बर्बर कार्रवाई में दो बेगुनाहों को बेवजह जान गंवानी पड़ गयी. इस अमानुषिकता पर स्थानीय स्तर पर ही नहीं, राज्य स्तर‌ पर भी‌‌ तीखी प्रतिक्रिया‌ हुई. हर वर्ग के संवेदनशील लोगों ने‌‌ अनुमंडल प्रशासन की विफलता की कड़े शब्दों में भर्त्सना की. दूसरी ओर पुलिस ने तर्क रखा कि वैसी कार्रवाई नहीं होती , तो हिंसा पर उतारु भीड़ से पुलिस और विद्युत विभाग को भारी नुकसान हो जाता.

सबने निकाल ली भड़ास
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो स्थानीय लोग उस दिन विद्युत आपूर्ति (Power Supply) की बदतर व्यवस्था में सुधार के लिए सड़क पर मुट्ठियां लहरा रहे थे. विद्युत आपूर्ति कार्यालय के समक्ष आम‌ मुट्ठियों का प्रहार प्रशासन झेल नहीं पाया और अकारण उन पर गोलियां बरसा दी. अनुमंडल प्रशासन की इस विवेकहीन कार्रवाई को लेकर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की सरकार को कोसने का अवसर विपक्षी दल भाजपा (BJP) को तो मिल ही गया, कांग्रेस (Congress) समेत सरकार समर्थक तमाम दलों के नेताओं ने भी अपनी भड़ास निकाल ली. प्रशासन की बखिया उधेड़ दी. गौर करने वाली बात यह कि भड़ास निकालने में जदयू (JDU) के नेता भी पीछे नहीं रहे.

नियम का उल्लघंन
सामान्य सवाल है कि यदि भीड़ उग्र हो गयी थी तो नियंत्रित करने के लिए बगैर किसी चेतावनी के गोली चलवा देने के अलावा‌ अनुमंडल प्रशासन के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था? नियम कहता है कि लाठी चार्ज, अश्रु गैस और पानी की बौछार के अप्रभावी रहने की स्थिति में गोली चालन आखिरी विकल्प होता है. भाकपा- माले के क्षेत्रीय विधायक महबूब आलम (Mehboob Alam) का आरोप है कि बारसोई में बिना आगाह किये प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोली चला दी गयी. वह भी कमर से नीचे नहीं, सीधे कपार‌ पर‌. जानकारों की मानें तो विशेष परिस्थिति में ऐसे प्रदर्शनों पर कमर के नीचे गोली चलाने का प्रावधान है‌. यहां इस नियम का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन हुआ. इसके मद्देनजर किसके आदेश पर गोली चली और इतनी निर्दयता से किन सबने गोली चलायी, यह भी काफी मायने रखता है.

बारसोई में गोली पीड़ितों के बीच तारकिशोर प्रसाद.

लाश ही लौटी घर
पुलिस की गोली से खुर्शीद आलम (Khurshid Alam) और सोनू कुमार (Sonu Kumar) नाम के दो स्थानीय युवकों की‌ मृत्यु हो गयी. 22 वर्षीय खुर्शीद आलम ऑटो चला कर परिवार चलाता था. बसलगांव पंचायत निवासी खुर्शीद आलम के पिता मुसिउर रहमान पेशे से किसान हैं. उनके मुताबिक खुर्शीद आलम जनआक्रोश रैली में गया था. उम्मीद थी कि बिजली की समस्या का कोई समाधान निकल जायेगा. लेकिन, होनी तो कुछ और होनी थी, हुई. सोनू कुमार तीन भाइयों में मंझला था. हंगामे की खबर सुन बड़े भाई मोनू को उबारने के लिए भीड़ का हिस्सा बन गया. मोनू को दो महीना पहले ही बिजली विभाग में सुविधा एजेंट की नौकरी मिली थी. उग्र भीड़ बिजली कार्यालय में तोड़फोड़ करने लगी तब उसी ने बचाव के लिए सोनू को फोन करके बुलाया था. मोनू तो सुरक्षित घर पहुंच गया, पर सोनू नहीं लौट पाया. उसकी लाश गयी.

समर्थन सभी का था
बारसोई पुलिस (Barsoi Police) के अनुसार उग्र प्रदर्शनकारियों‌ के हमले में लगभग एक दर्जन पुलिसकर्मी तथा बिजली विभाग के कई कर्मचार जख्मी हुए हैं. पर, प्रत्यक्षदर्शियों का कहना रहा कि कुछ‌ पुलिसकर्मियों की अंगुलियों में चोट के अलावा सरकारी पक्ष के और किसी को‌ कुछ नहीं हुआ है. ‘जन आक्रोश रैली’ के मुख्य आयोजक इमादपुर पंचायत के मुखिया ईं. मो. अज्ज़म हुसैन‌ थे. विद्युत आपूर्ति में सुधार के लिए ‘द बारसोई असोसिएशन’‌ के बैनर तले उन्होंने अभियान चला रखा है. उसी के तहत 26 जुलाई 2023 को बारसोई अनुमंडल कार्यालय परिसर में शांतिपूर्ण धरना – प्रदर्शन आयोजित किया गया. बारसोई नगर पंचायत के मुख्य पार्षद प्रतिनिधि रिंकू सिंह, उपमुख्य पार्षद प्रमोद कुमार साह, एकशल्ला पंचायत के मुखिया राधाकांत घोष समेत अन्य कई मुखियों का सहयोग – समर्थन प्राप्त था. आयोजन सर्वदलीय था. स्थानीय लोगों की उसमें बड़ी भागीदारी थी. बाजार के अलावा आसपास के गांवों से भी काफी संख्या में लोग जुटे थे.


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अब भी है रहस्य
शुरू के समय सब कुछ समान्य रहा. बाद में धरनार्थी अचानक उग्र हो गये. क्यों और कैसे, यह अब भी रहस्य है. इसको लेकर तरह – तरह की बातें कही जा रही है. कटिहार के भाजपा विधायक पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद (Tarakishor Prasad) ने इस मामले में बिहार सरकार (Bihar Government) पर संवेदनहीन होने का आरोप लगाया. उनका कहना रहा कि बारसोई की घटना को लेकर जो प्रथमिकी दर्ज करायी गयी है उसमें बारह सौ अज्ञात के साथ 41 लोगों को नामजद किया गया है. उनमें दोनों मृतकों के भी नाम हैं. अनेक वैसे लोगों के भी नाम हैं जो घटना वाले दिन बारसोई में नहीं थे. उन सबका उस आंदोलन से कोई लेना -देना नहीं था. उनके मुताबिक झूठे मुकदमे और झूठे वीडियो के सहारे सरकार अपना दामन बचाने का शर्मनाक प्रयास कर रही है. सरकार की प्रत्येक झूठ को जनता समझ रही है. लोकसभा चुनाव (Loksabha Elections) में सबक सिखाने का मन बना चुकी है.

प्रशासन की लापरवाही
कटिहार (Katihar) जिले के कदवा से कांग्रेस के विधायक हैं शकील अहमद खान (Shakeel Ahmed Khan). बिहार विधान मंडल में कांग्रेस विधायक दल के नेता भी हैं. बारसोई पुलिस गोली कांड को वह अनुमंडल प्रशासन की घोर लापरवाही मानते हैं. घटना की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की आवाज उठाते हैं. मृतकों के परिजनों को बीस – बीस लाख रुपये का मुआवजा और सरकार के स्तर से घायलों का इलाज कराने की भी मांग करते हैं. भाकपा- माले के विधायक महबूब आलम ने भी गोलीकांड के लिए स्थानीय प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव (Vijendra Prasad Yadav) और .समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी (Madan Sahni) ने भी घटना को दुखद बताया. इसके लिए प्रशासन को आड़े हाथों लिया.

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