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मालतीधारी महाविद्यालय: उच्च शिक्षा में अराजकता का निकृष्ट नमूना!

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विशेष संवाददाता
25 दिसम्बर, 2021

PATNA : बिहार (Bihar) की उच्च शिक्षा (Higher Education) के क्षेत्र में कैसी अराजकता फैली हुई है इसका एक निकृष्ट नमूना नौबतपुर (पटना) का मालतीधारी महाविद्यालय (Maltidhari College) भी है. एक साल से यह महाविद्यालय बगैर विधिवत प्राचार्य (Principal) के चल रहा है. विश्वविद्यालय और कुलाधिति कार्यालय, दोनों इससे बेफिक्र हैं. वैसे, प्रो. कन्हैया प्रसाद सिन्हा (Prof Kanhaiya Prasad Sinha) महाविद्यालय (College) के प्राचार्य हैं, पर इस पद पर उनकी वैधता सवालों के घेरे में है. इस रूप में कि प्राचार्य के तौर पर इस महाविद्यालय में इनका 5 वर्ष का कार्यकाल 29 दिसंबर, 2020 को ही पूरा हो गया.

कानून का उल्लंघन
बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार कोई प्राचार्य किसी एक महाविद्यालय में अधिकतम 5 वर्ष कार्यरत रह सकता है. इससे अधिक की कोई गुंजाइश नहीं है. इससे अधिक अवधि तक बना रहना कानून का सरासर उल्लंघन है. ज्ञातव्य है कि जब से यह अधिनियम अस्तित्व में आया है, इसका सख्ती से पालन होता रहा है. लेकिन, वर्तमान में बिहार के विश्वविद्यालय (University) घोर अराजकता के शिकार हैं. इसलिये इस अधिनियम का उल्लंघन कर प्रो. कन्हैया प्रसाद सिन्हा को इस कालेज (College) का प्राचार्य (Principal) अभी तक बनाये रखा गया है. वह निर्धारित कार्यकाल से एक वर्ष अधिक से बने हुए हैं.


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व्यवहार गरिमा के अनुकूल नहीं
मालतीधारी महाविद्यालय, नौबतपुर (Naubatpur) के शिक्षकों ने इस विषयक आवेदन पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय (Patliputra University) के कुलसचिव को दिया कि वर्तमान प्राचार्य का निर्धारित कार्यकाल पूरा हो गया है, तब भी वह बने हुए हैं. इस विषयक कोई नोटिफिकेशन न विश्वविद्यालय स्तर से निकला न कुलाधिपति कार्यालय के स्तर से. आवेदन में शिक्षकों ने यह आरोप भी लगाया कि प्राचार्य का व्यवहार शिक्षकों के प्रति गरिमा के अनुकूल नहीं है. विश्वविद्यालय ने इस आवेदन का कोई संज्ञान नहीं लिया. जाहिर है, प्रो. कन्हैया प्रसाद को बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम के खिलाफ जा कर इस महाविद्यालय में बनाये रखने में विश्वविद्यालय के अधिकारियों की भी मिलीभगत है.

हुई थी तकरार
अजय कुमार नाम के एक प्रोफेसर, जो गणित के हैं और अभी कालेज आफ कामर्स में पदस्थापित हैं, वह पिछले महीने ही मालतीधारी महाविद्यालय से स्थानांतरित होकर कालेज आफ कामर्स, पटना आये हैं. मालतीधारी महाविद्यालय में वह वर्सर थे और शिक्षक संघ के अध्यक्ष भी थे. प्राचार्य प्रो. कन्हैया प्रसाद से उनकी भारी तकरार हुई थी, उसी के बाद उनका स्थानांतरण बाढ़ कालेज कर दिया गया था, लेकिन, लग भिड़ कर उन्होंने अपना तबादला कालेज आफ कामर्स, पटना में करवा लिया.

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