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माफिया राज : रूपा तिर्की मामले में भी उठी थीं अंगुलियां

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अमन राय
13 जुलाई 2023

Sahibganj : अब यह जानते हैं कि पंकज मिश्र उर्फ बाबा (Pankaj Mishra urf Baba) हैं कौन? उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मूल रूप से वह बिहार (Bihar) के भागलपुर (Bhagalpur) जिले के पीरपैंती विधानसभा क्षेत्र (Pirpainti Assembly Constituency) के रहने वाले हैं. बाबूपुर गांव में उनका पैतृक घर है. पेट्रोल पंप के बगल से गांव जाने का रास्ता है. साहिबगंज में पुरानी एसडीओ कोठी मुहल्ला में उन्होंने अपना आवास बना रखा है. बोरियो थाना क्षेत्र के सक्रोगढ़ में भी शायद उनका घर है. उन पर कई तरह के आरोप लगे हैं. साहिबगंज की महिला थानाध्यक्ष रूपा तिर्की (Rupa Tirki) की मौत के मामले में भी नाम उछला था. रूपा तिर्की ने आत्महत्या की या हत्या हुई, इसकी जांच सीबीआई कर रही है. हत्या (यदि हुई) किसने की और किसने करवायी इसकी भी. बातें कई तरह की उठीं. बरहरवा के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक प्रमोद कुमार मिश्र भी इसकी चपेट में आ गये. वैसे तो निष्कर्ष सीबीआई (CBI) को निकालना है और निर्णय अदालत को करना है, लेकिन कुछ साक्ष्य ऐसे भी हैं जो खुदकुशी के संकेत देते हैं.

फैसला अदालत करेगी
कहा जाता है कि रूपा तिर्की का रांची में पदस्थापित दारोगा शिवकुमार कनौजिया (Shivkumar Kanojia) से प्रेम-प्रसंग चल रहा था. दोनों शादी करना चाहते थे. कथित रूप से रूपा तिर्की के परिवारवालों को यह मंजूर नहीं था. संभवतः वही ‘असहमति’ उनकी मौत का कारण बन गयी. वैसे, यह कहा गया कि रूपा तिर्की ने एक आरोपित को छोड़ देने के पंकज मिश्र के ‘फरमान’ को नजरंदाज कर दिया था. उसका अंजाम मौत के रूप में सामने आया. रूपा तिर्की के परिजनों का भी कहना रहा कि यह खुदकुशी का नहीं, साजिशन हत्या का मामला है. संभवतः उनके ही शंका निवारण के लिए सीबीआई जांच हो रही है. पुलिस उपाधीक्षक प्रमोद कुमार मिश्र (Dy.SP Pramod Kumar Mishra) पर आरोप लगा कि उन्होंने पंकज मिश्र एवं अन्य संदिग्धों को ‘बेदाग’ साबित करने का प्रयास किया. इस पूरे प्रकरण में सच्चाई क्या है, इसका खुलासा अब अदालत करेगी. वैसे उनका कहना रहा कि उन पर लगाये गये आरोपों का कोई आधार नहीं है.

नहीं हुई कार्रवाई
पंकज मिश्र पहली बार तब सुर्खियों में आये थे जब बरहरवा टोल प्लाजा की नीलामी में दखलंदाजी का आरोप लगा था. बताया जाता है कि उस नीलामी में झारखंड कांग्रेस (Jharkhand Congress) विधायक दल के नेता ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम (Alamgir Alam) की भी रुचि थी. शंभुनंदन कुमार उर्फ शंभु भगत नाम के एक ठेकेदार टेंडर डालने वाले थे. आलमगीर आलम ने उन्हें ऐसा नहीं करने को कहा. यानी टेंडर से अलग रहने का दबाव बनाया. इस बाबत उनकी फोन पर बातचीत हो रही थी. शंभु भगत टेंडर से अलग होने को तैयार नहीं थे. इसी बीच आलमगीर आलम ने फोन पंकज मिश्र को थमा दिया. शंभु भगत से उनकी बात हुई . शायद गरमागरम बहस भी हुई. मामला थाने में पहुंच गया. जून 2020 को शंभु भगत ने बरहरवा थाने में आलमगीर आलम और पंकज मिश्र के इशारे पर मारपीट की प्राथमिकी दर्ज करा दी. सच या झूठ, मामला मंत्री और ‘सुपर मंत्री’ से जुड़ा था, कार्रवाई नहीं होनी थी, नहीं हुई. साहिबगंज पुलिस ने शायद दोनों को निर्दोष बता दिया.

प्रवर्तन निदेशालय और पंकज मिश्र.

पड़े हैं जान के पीछे
प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने उसी मामले में कार्रवाई की. वैसे, पंकज मिश्र को लेकर प्रवर्तन निदेशालय के कान पूजा सिंघल (Pooja Singhal) प्रकरण की जांच के दौरान ही खड़े हो गये थे. पंकज मिश्र के कथित सत्ता संरक्षित कारनामों पर भाजपा (BJP) विधायक दल के नेता पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi)और गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दूबे (Nishikant Dubey) सवाल उठाते रहे हैं. बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) से सवाल किया था कि पंकज मिश्र क्या है जो पूरे साहिबगंज में आतंक का पर्याय बन गया है? पाकुड़ जिला परिषद के उपाध्यक्ष और भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष पिंकू शुक्ला को जान से मारने की धमकी दे रहा है. पलटवार पंकज मिश्र ने भी किया था. कहा था कि बाबूलाल मरांडी, निशिकांत दूबे, पिंकू शुक्ला और सुनील तिवारी हाथ धोकर उनकी जान के पीछे पड़े हैं. पिंकू शुक्ला ने फोन पर उन्हें धमकी दी थी.

जवाब नहीं दिया
आरोप-प्रत्यारोप का यह मामला थाने में भी पहुंचा है. पंकज मिश्र पर कारोबारियों को धमकाने, कोयला, बालू एवं पत्थर का अवैध कारोबार कराने के भी आरोप लगे हैं. प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने इस क्षेत्र के तमाम खनन पट्टों की नापी करायी. इससे बड़े पैमाने पर अवैध खनन का खुलासा हुआ. प्रायः हर पट्टाधारी ने पट्टा क्षेत्र से अधिक क्षेत्र में खनन किया है. इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा है. हैरान करने वाली बात यह कि ऐसे अवैध उत्खनन पर प्रवर्तन निदेशालय ने सवाल उठाये तो साहिबगंज के जिला खनन पदाधिकारी (District Mining Officer) विभूति कुमार (Vibhuti Kumar) कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाये.


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हेमंत सोरेन का चेकबुक!
विधायक प्रतिनिधि का मतलब होता है जिन सरकारी बैठकों में किसी कारणवश विधायक नहीं पहुंच पाते हैं वहां उनका प्रतिनिधित्व करना. विधायक प्रतिनिधि को वित्तीय लेन-देन का भी अधिकार शायद नहीं होता है. वैसे, यह आपसी संबंधों और विश्वास पर निर्भर करता है. हेमंत सोरेन ने अपने विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्र को यह अधिकार दे रखा था. मकसद क्या था, यह नहीं कहा जा सकता. इस अधिकार की पुष्टि प्रवर्तन निदेशालय को पंकज मिश्र के घर से मिले हेमंत सोरेन के बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) की गंगाप्रसाद शाखा (साहिबगंज) के चेक बुक और पासबुक से हुई. सवाल उठे कि कुछ पन्नों पर हस्ताक्षर के साथ ब्लैंक चेक बुक पंकज मिश्र को सौंपने का मामला कहीं पत्थरों के अवैध उत्खनन से तो जुड़ा नहीं है?

ए के 47 राइफल
संदेह का आधार यह कि अवैध उत्खनन से जुड़े मनी लाॅन्ड्रिंग के मामले में पंकज मिश्र मुख्य आरोपी हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने 19 जुलाई 2022 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लाॅन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत उन्हें गिरफ्तार किया था. फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं. इस मामले में पंकज मिश्र के अलावा उनके साहिबगंज निवासी सहयोगी बच्चू यादव उर्फ पहलवान (Bachchu Yadav urf Pehelwan) और प्रेम प्रकाश को आरोपित किया गया है. ये दोनों भी जेल में हैं. 24 अगस्त 2022 को प्रेम प्रकाश (Prem Prakash) के रांची (Ranchi) स्थित घर पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी में दो ए के 47 राइफल की बरामदगी हुई थी जो कथित रूप से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मियों के थे.

तो यह है राज!
कहा गया कि प्रेम प्रकाश की सुरक्षा के लिए उन दोनों की अवैध तैनाती की गयी थी. मनी लाॅन्ड्रिंग के मामले में झामुमो के पूर्व कोषाध्यक्ष रवि केजरीवाल (Ravi Kejriwal) ने अदालत में बयान दर्ज कराया था कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनकी मौजूदगी में पंकज मिश्र को संताल परगना में पत्थर और बालू उत्खनन से आने वाले धन को सीधे प्रेम प्रकाश को सौंप देने का निर्देश दिया था. पंकज मिश्र के घर में हेमंत सोरेन के चेक बुक और पासबुक रहने का राज संभवतः यही हो सकता है.

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