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मंत्रियों को बेचैन कर रखा है राजा की सवारी ने !

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विशेष प्रतिनिधि
03 सितम्बर 2023

Patna : समय – समय की बात है. उस जमाने में राजा की सवारी किसी गरीब की कुटिया पर पहुंचती तो गरीब धन्य हो जाता था. उसकी गरीबी दूर हो जाती थी. राजा कहते थे कि कुछ मांग लो, जो मांगोगे, वही मिलेगा. ऐसा होता भी था. इतिहास (History) में और धार्मिक किताबों में भी ऐसी कई कहानियां अंटी पड़ी हैं कि राजा किसी गरीब के घर अनायास पहुंच गये तो अगले दिन उसके पास ढेर सारा धन आ गया. हीरे जवाहरात की बात ही क्या? वह तो राजा यूं ही छिड़क कर चले आते थे. कभी कोई राजा गरीब के घर सरप्राइज विजिट (Surprise Visit) कर देता था तो अगले की किस्मत पलट जाती थी.

जितने मुंह उससे अधिक बातें
कुछ वैसा ही हाल इन दिनों बिहार (Bihar) के राजा का भी है. वह जब तब सरप्राइज विजिट पर निकल जाते हैं. पुरानी कहानियों से कुछ अलग किस्म का मामला यहां चलता है. पहली बार राजा की सवारी एक ‘आयातित मंत्री’ की कुटिया पर पहुंची तो मंत्री सहित परिवार के दूसरे सदस्यों के चेहरे खिल गये. खिलना भी चाहिए. बात ही ऐसी थी. रातोरात अफसरों के सर्किल में संदेश (Message) चला गया-यही हैं. राजा के सबसे अधिक करीबी यही हैं. राजा (King) से कोई काम कराना हो तो इन्हीं को पकड़ो. बाकी लोग फालतू हैं. लेकिन, कुछ दिन बाद और बार – बार जब राजा की सवारी उन्हीं की कुटिया पर पहुंचने लगी तो जितने मुंह, उससे अधिक बातें भी होने लगी.


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डांट भी पड़ गयी बीच में
दुश्मनों ने उड़ा दिया कि राजा को पक्की खबर मिली है. खबर यह कि उनके पास जरूरत से ज्यादा धन आ गया है. राजा उसी‌ की टोह लेने जा रहे हैं. मंत्री के घर राजा के जाने का सिलसिला कुछ दिन कमजोर पड़ा. इस बीच राजा ने एक दिन उनके धरम – करम को लेकर उन्हें डांट दिया. यह खबर भी अफसरों के बीच गयी. मान लिया गया कि मंत्री के दिन पूरे हो गये हैं. इतनी डांट के बाद राजा फिर शायद ही उन्हें अपने आसपास फटकने दें. अनुमान गलत हुआ. इधर फिर उस मंत्री महोदय के घर पर राजा की सवारी ताबड़तोड़ ढंग से पहुंचने लगी है. पर , अब दूसरा संकट आ गया है. नया संकट यह है कि अब मंत्रीजी भी राजा की बार – बार की यात्रा (Travel) से परेशान हो गये हैं. सुबह हो या शाम, मंत्रीजी को हमेशा राजा के आने का डर बना रहता है.

राजा को भी पता नहीं रहता
उनके लिए संतोष (Satisfaction) का विषय यह है कि राजा ने इन दिनों कुछ और कुटियों की खोज कर ली है. वह किस समय किसकी कुटिया पर जाने की इच्छा (Desire) प्रकट कर देंगे, इसके बारे में किसी को पता नहीं रहता है. करीबी तो यहां तक कहते हैं कि अपने गंतव्य (Destination) के बारे में राजा को भी पता नहीं रहता है। एक दिन तो सुबह से देर रात तक उन्होंने पांच कुटियों का दौरा कर लिया. दूसरे मंत्री के यहां तो एक ही दिन में दो बार चले गये थे. बेचारे ये वाले मंत्री (Minister) भी अपने घर में बेचैनी की हालत में ही बैठते हैं.

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