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एशियाई खेलों में सौ पार , अब ओलंपिक का इंतजार

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श्वेतम शाश्वत
11 अक्तूबर 2023

Muzaffarpur : ‘अबकी बार सौ पार’ का टैग लाइन लिए भारत ने 655 खिलाड़ियों के साथ 23 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चीन के हांगझोऊ में एशियाई खेलों में हिस्सा लिया. भारतीय खिलाड़ियों ने पांच साल पहले 2018 की एशियाई प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था. इस बार भारत की कोशिश नयी ऊंचाइयां छूने की रही, बहुत हद तक कामयाबी भी मिली. एशियाई खेलों के इस 19वें संस्करण में 61 में से 41 प्रतियोगिताओं में भारत ने भाग लिया और अपने विजय अभियान को 107 पदकों की रिकार्ड संख्या के साथ विराम दिया. पदकों में 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य पदक हैं. इससे पूर्व 2018 के एशियाई खेलों में इसने 70 पदक हासिल किये थे. इस बार अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से उस रिकार्ड को पीछे छोड़ 100 पदकों का आंकड़ा पार करने वाला चीन (China), जापान (Japan) और दक्षिण कोरिया (South Korea) के बाद चौथा देश बन गया.

सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
हांगझोऊ (Hangzhou) में सिर्फ चार देशों ने 100 से अधिक पदक हासिल किये. सर्वाधिक 383 पदकों के साथ चीन का दबदबा बना रहा. 189 पदकों के साथ जापान दूसरे और 109 पदकों के साथ रिपब्लिक ऑफ कोरिया तीसरे स्थान पर रहा. भारत ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में 107 पदकों के बल पर चौथा स्थान हासिल किया. स्वर्ण पदकों की बात करें तो चीन 201 स्वर्ण के साथ शीर्ष पर रहा. जापान की झोली में 52 और दक्षिण कोरिया की झोली 42 स्वर्ण पदक गिरे.

स्वर्ण से भर गयी झोली
हांगझोऊ में भारत ने कुल 28 स्वर्ण पदक जीते. निशानेबाजी में 07, एथलेटिक्स में 06,आर्चरी में 05, क्रिक्रेट, स्क्वैश और कब्बड्डी में 02 -02, हॉकी, बैडमिंटन, टेनिस एवं इक्वेस्ट्रियन में एक-एक स्वर्ण हाथ लगे. निशानेबाजी में भारत (India) ने सात स्वर्ण के साथ कुल 22 पदक अपने नाम किये. एथलेटिक्स में इसने 06 स्वर्ण, 14 रजत और 09 कांस्य के साथ सबसे अधिक 29 पदक जीते. भाला फेंक में नीरज चोपड़ा ने अपना खिताब बनाये रखा. तीरंदाजी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच स्वर्ण पदक हासिल किये. भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साईराज रंकीरेड्डी-चिराग शेट्टी ने पुरुष युगल के फाइनल मैच में जीत दर्ज कर भारत के लिए एशियाई खेलों (Asian Games) में पहला बैडमिंटन स्वर्ण पदक हासिल किया. स्क्वैश में दो और टेनिस एवं घुड़सवारी में एक-एक स्वर्ण पदक प्राप्त हुए.

एशियाई खेलों के विजेताओं का अभिनन्दन करते नरेंद्र मोदी.

क्रिक्रेट में भी कमाल
हांगझोऊ एशियाई खेलों में इस बार क्रिकेट को भी शामिल किया गया. इस पहली प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारतीय पुरुष टीम एवं महिला टीम दोनों ने स्वर्ण पदक प्राप्त किये. पुरुष टीम की कप्तानी ऋतुराज गायकवाड को सौंपी गयी थी , तो महिला टीम की कप्तानी हरमनप्रीत कौर ने संभाली. पुरुष टीम में युवा खिलाड़ियों को जगह मिली. आईपीएल 2023 स्टार रिंकू सिंह, प्रभसिमरन सिंह और जीतेश शर्मा भी भारतीय दल का हिस्सा रहे. महिला क्रिकेट के फाइनल मुकाबले में भारतीय महिला टीम ने श्रीलंका (Sri Lanka) के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक हासिल किया. पुरुष टीम ने फाइनल मुकाबला अफगान टीम के साथ खेला जिसमें बारिश ने खलल डाल मुकाबला रद्द कर दिया. भारत को वरीयता क्रम के हिसाब से गोल्ड विजेता घोषित कर दिया गया.

हॉकी टीम को ओलंपिक टिकट
पुरुष हॉकी टीम ने फाइनल मुकाबले में कप्तान हरमनप्रीत सिंह के दम पर गत चौंपियन जापान को 5-1 से हरा स्वर्ण पदक हासिल कर नौ साल बाद इतिहास रच दिया. इस स्वर्ण पदक के साथ भारतीय हॉकी टीम (Indian Hockey Team) ने 2024 में पेरिस में आयोजित होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है. पुरुष हॉकी जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने सर्वाधिक 13 गोल किये और 12 गोलों श्री साथ मनदीप दूसरे सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी रहे. भारत की महिला हॉकी टीम ने डिफेंडिंग चौंपियन जापान को 2-1 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया जो एशियाई खेलों के इतिहास में इसके लिए सातवां पदक है.


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कसर और कसक
हांगझाऊ एशियाई खेलों में भारत ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन से पदकों की झड़ी लगादी. सौ से भी ज्यादा पदकों से झोली भरकर इतिहास (History) रच दिया. लेकिन, कुछ ऐसे भी खिलाड़ी रहे जिनसे देश को काफी उम्मीदें थीं. उन उम्मीदों पर वे खरे नहीं उतरे. कुश्ती में पहलवान बजरंग पुनिया , वेटलिफ्टिंग में ओलंपिक मेडलिस्ट मीराबाई चानू ने निराश किया . इसी तरह जु- जित्सू और फुटबॉल में भी निराशा हाथ लगी. पदक संख्या की बात करें, तो चीन और जापान जैसे देशों की तुलना में भारत काफी पीछे रह गया. इसकी वजह बेशक बीस खेलों में हिस्सा नहीं लेना है.पदक तालिका में भारत के कमतर दिखने का यह सबसे बड़ा कारण है. भविष्य की प्रतियोगिताओं में चीन जैसे देशों को चुनौती देने के लिए भारत को सभी खेलों में अच्छा प्रदर्शन करना होगा. जिन खेलों से भारत अलग रहा उनमें भी बड़ी तैयारी करनी होगी. खेल और खिलाड़ियों के प्रति केंद्र और राज्य सरकारों के साझा प्रयास से भारत स्वर्णिम भविष्य (Golden Future) की ओर बढ़ सकता है.

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