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चौपाल में चुनाव : रून्नीसैदपुर में टूट गया वर्चस्व… बदल गया समीकरण

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मदनमोहन ठाकुर
02 अप्रैल 2025
Sitamarhi : अतीत में झांकें, तो रून्नीसैदपुर (Runnisaidpur) विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक न्याय की राजनीति से पहले के कालखंड में कांग्रेस (Congress) की पकड़ थी. पर, दूसरे क्षेत्रों की तरह नहीं. जनाधार समाजवादी नेताओं का भी था. एक-दो चुनावों में उनकी जीत भी हुई थी. परन्तु, आम मतदाताओं में जो स्वीकार्यता विवेकानंद गिरि (Vivekananda Giri) की थी वैसी फिर किसी की कायम नहीं हो पायी. स्वतंत्र भारत के प्रथम चुनाव यानी 1952 में ही कांग्रेस को पछाड़ विवेकानंद गिरि ने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर अपना सिक्का जमा दिया था. हालांकि, कालांतर में वह कांग्रेस में शामिल हो गये थे. ब्राह्मण समाज से आने वाले विवेकानंद गिरि चार चुनावों में विजयी हुए थे. दो बार निर्दलीय और दो बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में. आखिरी जीत उनकी 1980 में हुई थी.

उखाड़ दिख खूंटा
इस क्षेत्र में सवर्णों, विशेष कर ब्राह्मणों और ब्रह्मर्षियों का वर्चस्व था. सामाजिक न्याय की राजनीति के दौर में टूट गया. 1995 में जनता दल (Janata Dal) के उम्मीदवार भोला राय (Bhola Rai) की जीत हुई. तब क्षेत्र का राजनीतिक व सामाजिक समीकरण बदल गया. यादव समाज के भोला राय की जीत का क्रम 2000 और फरवरी 2005 के चुनावों में भी बना रहा. अक्तूबर 2005 में पासा पलट गया. ब्रह्मर्षि समाज के राजेश कुमार चौधरी (Rajesh Kumar Chaudhary) की पत्नी गुड्डी देवी (Guddi Devi) को जदयू (JDU) की उम्मीदवारी मिली और उन्होंने भोला राय का खूंटा उखाड़ दिया.

कामयाबी नहीं मिली
वैसे, भोला राय के मंसूबों को ध्वस्त करने के मकसद से फरवरी 2005 में राजेश कुमार चौधरी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में खुद मैदान में उतरे थे. मुकाबला बहुकोणीय हो जाने के कारण कामयाबी नहीं मिल पायी थी. मात्र 29 हजार 924 मत लाकर भोला राय चुनाव जीत गये थे. 23 हजार 230 मतों के साथ राजेश कुमार चौधरी तीसरे स्थान पर अटक गये थे. दूसरे स्थान पर लोजपा के आजम हुसैन अनवर (Azam Hussain Anwar) रहे थे. उन्हें 26 हजार 148 मत प्राप्त हुए थे. एनडीए (NDA) में जदयू की उम्मीदवारी नवल किशोर (Naval Kishore) को मिली थी. 10 हजार 874 मतदाताओं को ही वह अपनी ओर आकर्षित कर पाये थे.


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मुंह देखती रह गयीं
जदयू प्रत्याशी के रूप में गुड्डी देवी 2010 में भी निर्वाचित हुईं. लेकिन, 2015 में जदयू ने अप्रत्याशित ढंग से उनसे पिंड छुड़ा राजनीति को चौंका दिया. जदयू तब महागठबंधन (Grand Alliance) का हिस्सा था. सीटिंग रहने के बाद भी रून्नीसैदपुर राजद (RJD) को समर्पित कर दिया. गुड्डी देवी मुंह देखती रह गयीं. राजद की उम्मीदवारी पूर्व विधायक भोला राय की विरासत संभालने मैदान में उतरीं उनकी पुत्रवधू मंगीता देवी (Mangita Devi) को मिली. जदयू के साथ रहने से आसान जीत हो गयी. मंगीता देवी को 55 हजार 699 मत मिले. एनडीए में यह सीट रालोसपा (RLSP) के हिस्से में थी. उम्मीदवारी पंकज कुमार मिश्र (Pankaj Kumar Mishra) को मिली थी. 41 हजार 589 मतों के साथ वह दूसरे स्थान पर ठहर गये थे.

सफल नहीं हुआ प्रयास
पूर्व विधायक गुड्डी देवी समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार बन गयी थीं. प्राप्ति 16 हजार 038 मतों की हुई थी. विश्लेषकों के अनुसार यही मत पंकज कुमार मिश्र की हार का कारण बन गये थे. पंकज कुमार मिश्र की हार 14 हजार 110 मतों से हुयी थी. गुड्डी देवी अखाड़े में नहीं होतीं तो परिणाम कुुछ और निकलता. वैसे उसी पंकज कुमार मिश्र को 2020 में जदयू की उम्मीदवारी मिली और राजद की उसी मंगीता देवी को पराजित कर वह विधायक बन गये. उस चुनाव में लोजपा (LJP) का उम्मीदवार बन उनकी राह रोकने का गुड्डी देवी का प्रयास सफल नहीं हुआ. वह 15 हजार 196 मतों में सिमट कर रह गयीं. पंकज कुमार मिश्र ने मंगीता देवी के मंसूबों को 24 हजार 629 मतों के अंतर से धो दिया. पंकज कुमार मिश्र को 73 हजार 205 मत प्राप्त हुए तो मंगीता देवी को 48 हजार 576 मत.

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