तापमान लाइव

ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल

मोतिहारी : ‘सिर पर हाथ’ न रख दे ‘शातिर समाजसेवी’

शेयर करें:

चम्पारण में भाजपा के अंदर शह और मात का जो खेल चल रहा है, यह कहानी उसी की है. प्रस्तुत है तीन किस्तों की इस कहानी की आखिरी कड़ी :


कफील एकबाल
15 अप्रैल, 2023

MOTIHARI : सोशल मीडिया के एक तुच्छ तबके की नासमझी से समाजसेवी के रूप में ‘कायांतरित’ छतौनी बाजार निवासी राजद नेता देवा गुप्ता (Deva Gupta) की हैसियत ऐसी हो गयी है कि वह चुनाव लड़ने में खुद सक्षम-समर्थ हैं. भाजपा (BJP) से जुड़े जातीय नेताओं का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष साथ मिलने से वह और अधिक मजबूत हो गये हैं. मोतिहारी (Motihari) नगर निगम के महापौर (Mayor) पद के चुनाव में उनके अभियान को मजबूती राकेश पांडेय (Rakesh Pandey) जैसे लोगों की सहभागिता से भी मिली. हालांकि, दलीय आधार पर यह चुनाव नहीं हुआ. इसके बावजूद पार्टी के जिला अध्यक्ष प्रकाश अस्थाना (Prakash Asthana) की हार से भाजपा की किरकिरी तो हो ही गयी. प्रकाश अस्थाना राधामोहन सिंह के करीबी हैं. दलविहीन चुनाव होने के बावजूद उन्होंने बहुत पूर्व उन्हें भाजपा का उम्मीदवार घोषित कर दिया था. इस पर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष डा. संजय जायसवाल (Dr. Sanjay Jaiswal) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. कहा था कि प्रकाश अस्थाना सांसद राधामोहन सिंह (Radhamohan Singh) के उम्मीदवार हो सकते हैं, भाजपा के नहीं. उसी वक्त यह तय हो गया था कि महापौर पद का उम्मीदवार बनने पर प्रकाश अस्थाना का हश्र क्या होगा.

हिसाब बराबर कर लिया
महापौर पद के चुनाव में पवन जायसवाल (Pawan Jaiswal) ने हिसाब बराबर कर लिया. आगे क्या होगा? वर्तमान में भी यह जानने की उत्सुकता हर किसी की बनी ही होगी. सबसे बड़ा सवाल है कि क्या राधामोहन स्रिंह इस ‘अपमान’ को सहजता से पी जायेंगे? विश्लेषकों की मानें, तो वह ऐसा कतई नहीं करेंगे, जबड़ा तोड़ जवाब देंगे. भाजपा में प्रभाव बना रहा तब 2025 के विधानसभा चुनाव में जमीन सुंघाने का दांव चलेंगे. पहली कोशिश उनकी पवन जायसवाल को उम्मीदवारी से वंचित कराने की होगी. सफलता नहीं मिली तब जिस तरकीब से प्रियंका जायसवाल (Priyanka Jaiswal) और राजेश कुमार उर्फ बबलू गुप्ता (Bablu Gupta) को धूल चटायी गयी, वही इस मामले में भी अपनायी जा सकती है. उनकी और उनके लोगों की रणनीति जो हो, उनसे खार खाये भाजपा के वैश्य नेताओं का गुट खामोश बैठा रहेगा, ऐसी बात भी नहीं. यह गुट पहले बढ़ी उम्र के मद्देनजर राधामोहन सिंह को भाजपा के ‘मार्गदर्शक मंडल’ में जगह दिलवा पूर्वी चंपारण (East Champaran) संसदीय क्षेत्र को उनके ‘चंगुल’ से निकालने के लिए जोर लगायेगा. प्रयास सफल नहीं हुआ तब 2024 के संसदीय चुनाव में उन्हीं के फार्मूले से उन्हीं को मात देने की रणनीति बनायी जायेगी.


इन्हें भी पढ़ें :
मोतिहारी : डा. संजय जासवाल हैं सूत्रधार?

मोतिहारी और राधामोहन सिंह : काल न बन जाये उनकी यह सियासी चाल


रणनीति है पवन जायसवाल की
राजनीति के गलियारे में चर्चा है कि राधामोहन सिंह को 2024 में भी उम्मीदवारी मिली तब पवन जायसवाल उनके खिलाफ मैदान में उतर जायेंगे. पवन जायसवाल के निकट के लोगों की मानें तो इसके लिए वह राजद (RJD) में संभावना तलाश रहे हैं. तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejaswi Prasad Yadav) के करीब हो रहे हैं. क्या होगा क्या नहीं, यह वक्त के गर्भ में है. विश्लेषकों को आशंका है कि टकराव की ऐसी ही स्थिति बनी रही तो पूर्वी चंपारण के साथ-साथ पश्चिम चंपारण (West Champaran) और शिवहर (Sheohar) संसदीय क्षेत्रों में भी भाजपा की लुटिया डूब जा सकती है. पश्चिम चंपारण से डा. संजय जायसवाल और शिवहर से रमा देवी (Rama Devi) भाजपा के सांसद हैं. पूर्वी चंपारण में जो क्रिया होगी, उस पर प्रतिक्रिया उक्त दोनों क्षेत्रों में तो होगी ही, उसकी आंच ढाका (Dhaka) विधानसभा क्षेत्र तक भी पहुंच जायेगी. फिर क्या होगा, यह बताने की शायद जरूरत नहीं. इन सबके बीच एक आशंका यह भी बड़ा आकार ले रही है कि कथित रूप से भाजपा के वैश्य नेताओं ने जिस ‘शातिर समाजसेवी’ को सिर आंखों पर बैठाया है, कल की तारीख में वह उनके ही ‘सिर पर हाथ रखने’ की नयी कथा न गढ़ दे.

#TapmanLive

अपनी राय दें