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माफिया राज : फेरी सेवा से भी होती है बेहिसाब कमाई

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एस एन श्याम
17 मई 2023

Sahibganj : मनिहारी (कटिहार) और समदा (साहिबगंज) के बीच गंगा नदी में अंतर्राज्यीय फेरी सेवा संचालित है. मालवाहक जल जहाज और यात्री जलयान दोनों चलते हैं. इस अंतर्राज्यीय फेरी सेवा को भी वैध-अवैध कमाई का एक बड़ा स्रोत माना जाता है. इसलिए माफियागिरी यहां भी है. यह साहिबगंज के पत्थर कारोबारियों की आर्थिक रीढ़ को मजबूत बनाती है. प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष फेरी सेवा आमतौर पर वैसे ही तत्वों के नियंत्रण में रहती है जिनके पांव अवैध पत्थरों के उत्खनन में धंसे होते हैं. एक अनुमान के अनुसार अवैध खनन अपनी रफ्तार में था तब पत्थर और गिट्टी लदे लगभग 500 ट्रकें इसी फेरी सेवा के जरिये रोज साहिबगंज से मनिहारी (Manihari) पहुंचते थे. वहां से बिहार (Bihar) और पश्चिम बंगाल  (West Bengal) के दूसरे जिलों में ले जाये जाते थे. इनमें अधिकतर बिना चालान के होते हैं. अपनी सघन कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने 26 जुलाई 2022 को पश्चिम बंगाल में निबंधित एक मालवाहक जल जहाज पकड़ा था. कीमत 30 करोड़ आंकी गयी थी. उसे बिना किसी परमिट के चलाया जा रहा था.

रात में चलते थे मालवाहक
ऐसा कहा गया कि पत्थरों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन में इसका इस्तेमाल पंकज मिश्र (Pankaj Mishra) और राजेश यादव उर्फ दाहू यादव (Rajesh Yadav urf Dahu Yadav) के संरक्षण में हो रहा था. मालवाहक जल जहाज प्रतिबंध के बावजूद रात में भी चलाये जाते थे. इसकी पुष्टि 24 मार्च 2022 की देर रात एक मालवाहक जहाज के पलटी खा जाने से हुई. उस पर लदे आधा दर्जन से अधिक गिट्टी वाले ट्रक गंगा में गिर गये. दो-तीन लोगों की मृत्यु भी हो गयी. कहा जाता है कि अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पंकज मिश्र ने मामले को रफा-दफा कराने का प्रयास किया था. पत्थरों के अवैध उत्खनन एवं पारगमन से बेहिसाब कमाई होती थी. न कोई हिसाब-किताब और न देखनहार! बिहार में पत्थर उत्खनन पर रोक लगी हुई है. इस कारण वहां साहिबगंज-पाकुड़ के इस गैरकानूनी कारोबार को विस्तार मिला हुआ था.

‘मिल्कियत’ थी मुंगेरी यादव की
जय बजरंगवली स्टोन वर्क्स के नाम से तकरीबन चार साल पहले तक अंतर्राज्यीय फेरी सेवा पत्थरों के बहुचर्चित व बहुविवादिते कारोबारी प्रकाश चन्द्र यादव उर्फ मुंगेरी यादव (Prakash Chandra Yadav urf Mungeri Yadav) के नियंत्रण-निर्देशन में संचालित थी. 2020-21 से उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी राजेश यादव उर्फ दाहू यादव के नियंत्रणाधीन है. इसके लिए उन्होंने किराये पर तीन जहाज ले रखा है. वैसे, बंदोबस्ती साहिबगंज नाव यातायात सहयोग समिति के नाम से है. हुलास चौधरी (Hulas Chaudhary) इस सहयोग समिति के संयोजक हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) के जेल में बंद विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्र के वह करीबी माने जाते हैं. स्थानीय लोगों की मानें, तो राजेश यादव उर्फ दाहू यादव का भी पंकज मिश्र से मुस्कान आदान-प्रदान करने जैसा गहरा संबंध है. कहा जाता है कि साझे में अनेक कारोबार भी हैं. हालांकि, इसका किसी के पास कोई पुष्ट प्रमाण नहीं है. प्रवर्तन निदेशालय को ऐसा कोई सबूत हाथ लगा हो, तो वह अलग बात होगी. वैसे दाहू यादव ने खुद एक बार कहा था कि पंकज मिश्र के सहयोग से यह बंदोबस्ती मिली थी.

मुंगेरी यादव और दाहू यादव.

ऐसे होती है बंदोबस्ती
फेरी सेवा की बंदोबस्ती एक साथ दो वित्तीय वर्षों के लिए होती है. एक बार साहिबगंज में तो दूसरी बार कटिहार (Katihar) में नीलामी होती है. नीलामी का यह क्रम बना रहता है. 2020-21 एवं 2021-22 वित्तीय वर्ष के लिए नीलामी साहिबगंज में हुई थी. 24 लाख 51 हजार की अंतिम बोली पर बंदोबस्ती साहिबगंज नाव यातायात सहयोग समिति को हासिल हुई थी. इसके पीछे क्या खेल हुआ, यह नहीं कहा जा सकता. सामान्य समझ में इसे झारखंड की सत्ता में बदलाव से जोड़कर देखा गया. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास (Raghuvar Das) के शासनकाल में प्रकाश चन्द्र यादव उर्फ मुंगेरी यादव का सिक्का चलता था. रघुवर दास तक पहुंच थी या नहीं, यह नहीं मालूम, परन्तु लोग कहते हैं कि भाजपा के बिहार और झारखंड (Jharkhand) के प्रभारी रहे केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव (Bhupendra Yadav) से उनका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तार जुड़ा हुआ है.


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हाथ से निकल गयी फेरी सेवा
2019 में भाजपा (BJP) झारखंड की सत्ता से बाहर हो गयी. हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो (JMM) – कांग्रेस (Congress) और राजद (RJD) की सरकार सत्ता में आ गयी. साहिबगंज निवासी पंकज मिश्र को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विधायक प्रतिनिधि बनने का अवसर मिल गया. इस अवसर का भरपूर लाभ उठा उन्होंने प्रकाश चन्द्र यादव उर्फ मुंगेरी यादव के ‘अखंड राज’ के बिखराव का मजबूत आधार बना दिया. अंतर्राज्यीय फेरी सेवा तो हाथ से निकल ही गयी, पत्थर खनन का पट्टा भी रद्द हो गया. पंकज मिश्र की कथित सरपरस्ती में इन तमाम धंधों पर उनके प्रतिद्वंद्वी राजेश यादव उर्फ दाहु यादव, बच्चू यादव (Bachchu Yadav) आदि ने वर्चस्व कायम कर लिया. ऐसे धंधे में स्वभाविक रूप से गोरखधंधा भी जुड़ा रहता है, यह आम धारणा है.

मामला अदालत में
प्रकाश चन्द्र यादव उर्फ मुंगेरी यादव अंतर्राज्यीय फेरी सेवा एवं पत्थर उत्खनन से संबद्ध मामलों को अदालत में ले गये. फैसला संभवतः उनके पक्ष में आया. लेकिन, प्रतिद्वंद्वियों की तिकड़मबाजी की वजह से फिर से वह काबिज नहीं हो पाये. तय प्रावधान के अनुरूप 2022- 23 एवं 2023-24 वित्तीय वर्ष के लिए 14 मार्च 2022 को कटिहार में नीलामी हुई. बंदोबस्ती साहिबगंज नाव यातायात सहयोग समिति को ही मिल गयी. 2020-21 में बंदोबस्ती मात्र 24 लाख 51 हजार में हुई थी. 2022-23 में बोली 8 करोड़ 52 लाख तक पहुंच गयी. यानी 43 गुणा अधिक राशि. इतनी बड़ी राशि कहां से और कैसे आयी, आयकर विभाग (Income Tax Department) ने साहिबगंज नाव यातायात सहयोग समिति से इसका ब्योरा मांगा है.

आम समझ से परे
दो साल में ही इतनी बड़ी उछाल आम समझ से परे रही. इतना ही नहीं, डीड निबंधन के लिए छह प्रतिशत स्टांप ड्यूटी शुल्क और दो प्रतिशत निबंधन शुल्क भी जमा करना पड़ा, जो 68 लाख 16 हजार रुपये का था. दो साल पहले बंदोबस्ती 24 लाख 51 हजार में हुई थी. इस बार उससे लगभग ढाई गुणा अधिक राशि ड्यूटी शुल्क और निबंधन शुल्क के रूप में प्राप्त हुई, जो शायद पहले जमा नहीं हुआ करती थी. कहीं प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई का तो असर नहीं था? जो हो, उक्त आंकड़ों से बहुत बड़े घोटाले का संदेह पैदा होता है. यहां गौर करने वाली बात है कि अंतर्राज्यीय फेरी सेवा में जब ऐसे करतब होते रहे हैं, तो पत्थर और बालू उत्खनन में मफियागिरी के आकार का सहज अनुमान लगाया जा सकता है.
(समाप्त)

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