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खुराफात या करामात? इस रूप में भी लगा दिया एक करोड़ का चूना!

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विजय शंकर पांडेय
12 अगस्त 2023

Darbhanga : कुलाधिपति मेहरबान तो कुलसचिव पहलवान ! मेहरवानी का आधार जो रहा हो, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (Lalit Narayan Mithila University), दरभंगा के निवर्तमान कुलसचिव डा. मुश्ताक अहमद ने विवादों से भरे अपने कार्यकाल में कथित रूप से खूब पहलवानी की. सामने आये आरोपों के मुताबिक नियमों, परिनियमों एवं प्रावधानों की धज्जियां उड़ा भरदम मनमानी की. मजाक – मजाक में लोग कहते हैं कि ‘लहर गिन कर कमाई’ की. ऐसी कमाई के उदाहरण अनेक हैं. नया मामला मिथिला विश्वविद्यालय (Mithila University) और उसके अंगीभूत महाविद्यालयों के लेखा परीक्षण से जुड़ा है जिसमें राजकोष को तकरीबन एक करोड़ का चूना लगने का आरोप है. इसके पीछे मकसद क्या हो सकता है, डा. मुश्ताक अहमद का इतिहास- भूगोल जानने वालों को बताने की शायद जरूरत नहीं.

लेखा परीक्षण के नाम पर
अब मूल मुद्दे की बात. अन्य संस्थानों की तरह मिथिला विश्वविद्यालय और इसके अंगीभूत महाविद्यालयों (Constituent Colleges) का वार्षिक लेखा परीक्षण हुआ करता है. डा. मुश्ताक अहमद पर इसी में गड़बड़ी करने का आरोप है. वित्तीय हेरफेर का नहीं, लेखा परीक्षण के शुल्क निर्धारण में मनमानी और घपलेबाजी का. अन्य कई मामलों की तरह सरकारी राजस्व में सेंधमारी के इस मामले को चर्चित आरटीआई कार्यकर्ता रोहित कुमार ने ही उठाया है . 21 मार्च 2023 को राज्यपाल सचिवालय के प्रधान सचिव को प्रेषित पत्र में उन्होंने जानकारी दी कि तत्कालीन कुलसचिव डा. मुश्ताक अहमद ने वित्तीय वर्ष 2021 – 22 के लेखा परीक्षण के मामले में कैसे और क्या सब गुल खिलाया. पत्र के मुताबिक डा. मुश्ताक अहमद ने 28 जून 2022 को विश्वविद्यालय मुख्यालय और इसके अंगीभूत महाविद्यालयों के वार्षिक लेखा परीक्षण के लिए दरभंगा के गंगासराय निवासी सनदी लेखाकार (सीए) प्रशांत कुमार झा (Prashant Kumar Jha) को अधिकृत किया. शुल्क प्रति महाविद्यालय 01 लाख 15 हजार रुपया तय किया गया. विश्वविद्यालय मुख्यालय के लिए संभवतः अलग से राशि तय की गयी.

राजभवन द्वारा जारी पत्रों की छायाप्रतियां.

एक साल में इतना अंतरिक्ष !
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में 44 अंगीभूत महाविद्यालय हैं. 01 लाख 15 हजार रुपये प्रति महाविद्यालय की दर से सीए को कुल 50 लाख 60 हजार रुपये का भुगतान किया गया. यहां गौर करने वाली बात है कि इसी विश्वविद्यालय के इतने ही महाविद्यालयों के वित्तीय वर्ष 2020 – 21 का लेखा परीक्षण पटना (Patna) के दो अलग – अलग सनदी लेखाकारों – मे. पी ज्योति एंड को. तथा के आर ए एंड को. से कराया गया. 12 हजार 750 रुपये प्रति महाविद्यालय के शुल्क पर. यानी उस वित्तीय वर्ष में इस मद में विश्वविद्यालय के सिर्फ 05 लाख 99 हजार रुपये ही खर्च हुए. यहां सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब 2020- 21 में 05 लाख 99 हजार ही खर्च हुए थे तब उतने ही कार्य के लिए 2021- 22 में 50 लाख 60 हजार क्यों खर्च किये गये? एक साल में ही 44 लाख 99 हजार का यह अंतर क्या दर्शाता है? हद तो यह कि कुलसचिव पद से मुक्त होने से कुछ समय पहले 02 जनवरी 2023 को डा. मुश्ताक अहमद (Dr. Mushtaq Ahmed) ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लेखा परीक्षण का कार्य भी उसी सनदी लेखाकार प्रशांत कुमार झा को उसी दर में सौंप दिया.


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राज्यपाल सचिवालय है गंभीर
आरटीआई (ITR) कार्यकर्ता रोहित कुमार (Rohit Kumar) ने इसी मुद्दे को उठाया है. उनके पत्र को गंभीरता से लेते हुए राज्यपाल सचिवालय (Governor Secretariat) के संयुक्त सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता  (Praveen Kumar Gupta) ने 03 मई 2023 को पत्र प्रेषित कर रोहित कुमार के आरोपों की अभिलेखीय जांच कर एक सप्ताह के अंदर प्रतिवेदन सौंपने को कुलपति को निर्देशित किया. कुलपति ने जांच प्रतिवेदन प्रेषित किया, पर राज्यपाल सचिवालय संतुष्ट नहीं हुआ. 09 जून 2023 को कुलपति से दोबारा जांच प्रतिवेदन समर्पित करने को कहा. राज्यपाल सचिवालय के उस निर्देश का फलाफल क्या निकला, यह नहीं मालूम. यहां यह जानना जरूरी है कि विभिन्न आरोपों को लेकर कार्यकाल पूरा होने से पहले कुलसचिव के पद से हटा दिये गये डा. मुश्ताक अहमद सी एम कालेज, दरभंगा के प्रधानाचार्य पद पर विराजमान हैं! उस कालेज की क्या गति होगी, इसे सहजता से समझा जा सकता है.

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