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नीतीश हैं कि मानते नहीं, मुश्किल बड़ी है…!

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संजय वर्मा
10 अगस्त 2023

Patna : कांग्रेस नेतृत्व की गुहार – दर- गुहार को अनसुना कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) मंत्रिमंडल के बहुप्रतीक्षित विस्तार को क्यों लटका रखे हैं? आम लोगों की बात छोड़िये, राजनीति के बड़े -बड़े विश्लेषक भी उनकी इस रणनीति को समझ नहीं पा रहे हैं. तुर्रा यह कि राजद कोटे के मंत्रियों के दो पद भी तकरीबन साल भर से रिक्त हैं और पार्टी नेतृत्व मौन है. एक तरह से कहें तो उनके समक्ष हथियार डाले हुए है. यह क्या माजरा है? नीतीश कुमार क्यों इस मामले को नजरंदाज किये हुए हैं? राजनीतिक गलियारों में ये सवाल बड़ी व्यग्रता से जवाब तलाश रहे हैं. बातें कई तरह की होती हैं, पर कोई तार्किक नहीं लगती. इस क्यों का खुलासा इसी आलेख में आगे है. बहरहाल, महागठबंधन में राजद और जदयू (JDU) की तुलना में काफी कमजोर कांग्रेस की उपेक्षा समझ में आती है, सबसे बड़े घटक राजद के प्रति नीतीश कुमार की अन्यमनस्कता सियासी साजिश की आशंका पैदा करती है.

राहुल गांधी ने भी कहा
यहां गौर करने वाली बात है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. अखिलेश प्रसाद सिंह तो गुजारिश करते ही रहते हैं , कांग्रेस सुप्रीमो राहुल गांधी ने भी खुले तौर पर मंत्रिमंडल का विस्तार करने और कांग्रेस को उसका वाजिब हक देने की बात नीतीश कुमार से कही थी. कोई असर नहीं पड़ा. राहुल गांधी ने मंत्रिमंडल विस्तार पर संक्षिप्त चर्चा विपक्षी दलों की एकजुटता बैठक के सिलसिले में पटना आगमन पर की थी. दिल्ली में हाल की लंबी मुलाकात के दौरान राजद (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad) के समक्ष भी उन्होंने इस मसले को रखा था. अभी तक कोई फलाफल सामने नहीं आया है. बुधवार को लालू प्रसाद की पटना में नीतीश कुमार से हुई मुलाकात- बात के बाद हो सकता है बीत रहे मलमास के बाद इस पर कोई निर्णय हो.

पन्द्रह प्रतिशत का प्रावधान
कानून कहता है कि विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का पन्द्रह प्रतिशत मंत्रिमंडल का हिस्सा बन सकता है . बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) में कुल 243 सदस्य हैं. पन्द्रह प्रतिशत के प्रावधान के मुताबिक़ मंत्रियों की संख्या 36 रह सकती है. गठबंधन बदल के बाद 09 अगस्त 2022 को नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार सत्ता में आयी तब मंत्रिमंडल में कुल 33 सदस्य थे. सात दलों के महागठबंधन के चार दल सत्ता के साझीदार थे. तीन वामदलों का बाहरी समर्थन है. मंत्रियों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत 12 जदयू के,उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejashwi Prasad Yadav) सहित 17 राजद के, 02 कांग्रेस के , 01 ‘हम’ के और 01 निर्दलीय थे. ‘हम’ और निर्दलीय को जदयू के हिस्से से मंत्री का पद मिला. तीन जगहें रिक्त रखी गयी थीं.

अटका है अटकलों में
ऐसा माना गया कि रिक्त जगहों में सत्ता के तीनो मुख्य साझीदारों- राजद, जदयू और कांग्रेस (Congress) का बराबर का हिस्सा है. पर, कांग्रेस ने दो पर दावेदारी ठोक रखी थी. कहा जाता है कि इस वजह से भी मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पा रहा है. इस दरमियान मंत्रियों के तीन पद रिक्त हुए. विविध कारणों से राजद के दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया. मंत्री का पद छोड़ ‘हम’ महागठबंधन से अलग हो गया. सुपरमेसी देखिये, ‘हम’ द्वारा खाली की गयी जगह पर काबिज होने में जदयू ने कोई विलंब नहीं किया. ‘चट मंगनी पट विवाह!’ सार्वजनिक अभिव्यक्ति भले नहीं हुई हो, कांग्रेस और राजद को यह सुपरमेसी अखर गयी. मंत्रिमंडल में अभी 31 सदस्य हैं. विस्तार हो तो चार या पांच और मंत्री बनाये जा सकते हैं. पर, आपसी सहमति नहीं बन पाने के कारण यह अटकलों और अनुमानों में अटका है. निर्णय नहीं हो पा रहा है.

मंत्री का पद त्याग दिया
राजनीतिक रूप से दबंग प्रदेश राजद अध्यक्ष जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) के स्वाभिमानी पुत्र सुधाकर सिंह (Sudhakar Singh) कृषि मंत्री थे. किसानों की समस्याओं के संदर्भ में विभागीय अधिकारियों के खिलाफ उन्होंने कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को नागवार गुजरा. आंखें तरेरी तो सुधाकर सिंह ने मंत्री का पद त्याग दिया. राजद का राष्ट्रीय नेतृत्व ‘मूकदर्शक’ बना रहा. उसके इस रुख से जगदानंद सिंह भी रुष्ट हो गये. उन्हें मनाने में राजद को काफी मान मनौव्वल करना पड़ा, ऊर्जा खपानी पड़ी. सुधाकर सिंह प्रकरण से पहले ब्रह्मर्षि समाज के राजद के ही विधान पार्षद कार्तिक कुमार उर्फ कार्तिक सिंह उर्फ कार्तिक मास्टर के मंत्री-पद की बलि चढ़ा दी गयी. इसकी कहानी कुछ यूं है.

कार्तिक मास्टर का इस्तीफा
राज्य में महागठबंधन की सरकार बनी तब जेल में बंद मोकामा के सजायाफ्ता पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) के ‘प्रतिनिधि’ के तौर पर कार्तिक मास्टर को मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. पर, उनके साथ ‘सिर मुड़ाते ओले पड़ गये’ कहावत चरितार्थ हो गयी. एक आपराधिक मामले में निर्गत वारंट मंत्री- पद को निगल गया. कार्तिक कुमार उर्फ कार्तिक सिंह ने साल भर पूर्व 31 अगस्त 2022 को मंत्री-पद से इस्तीफा दे दिया. उसके तकरीबन एक माह बाद 02 अक्तूबर 2022 को सुधाकर सिंह ने मंत्री का पद छोड़ दिया. यूं कहें कि छोड़ने के लिए विवश कर दिया गया.


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दोनों की मिलीभगत!
यहां गौर करने वाली बात है कि राजद के अघोषित सुप्रीमो तेजस्वी प्रसाद यादव ने पार्टी के संशोधित चरित्र ‘ए टू जेड’ के तहत मंत्रिमंडल में अपने कोटे से क्षत्रिय समाज के सुधाकर सिंह और ब्रह्मर्षि समाज के कार्तिक कुमार उर्फ कार्तिक सिंह को प्रतिनिधित्व दिलाया था. ‘ए टू जेड’ के ये दोनों ही पद साल भर से रिक्त पड़े हैं. भरने की जब कभी बात उठती है तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के पाले में डाल देते हैं और तेजस्वी प्रसाद यादव मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र की बात कह नीतीश कुमार के पाले में. अब ‘ए टू जेड’ को इस लाभ से वंचित रखने में नीतीश कुमार और तेजस्वी प्रसाद यादव दोनों की मिलीभगत है या राजद के नये चरित्र को प्रभावहीन बनाने की जदयू नेतृत्व की यह कोई शातिराना चाल है, यह नहीं कहा जा सकता.

आशंका यह भी है
वैसे, सत्ता के निकटवर्ती सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार ने मामले को इस कारण लटका रखा है कि राजद कोटे से मंत्रियों के जो नाम रखे जा रहे हैं वे उनके गले नहीं उतर पा रहे हैं. राजद नेतृत्व क्षत्रिय समाज से सुधाकर सिंह या फिर विधान पार्षद सुनील सिंह (Sunil Singh) को मंत्री बनाना चाहता है. सुधाकर सिंह के साथ जगदानंद सिंह की साख का सवाल जुड़ा हुआ है. सुनील सिंह तो राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई ही हैं. पर, दिक्कत यह है कि दोनों के दोनों नीतीश कुमार के धुर आलोचक हैं. सत्ता की सलामती के लिए झुक जायें तो वह अलग बात होगी, आलोचकों के साथ नीतीश कुमार का कैसा रुखा व्यवहार होता है, यह बताने की शायद जरूरत नहीं. सुधाकर सिंह और सुनील सिंह का मामला नीतीश कुमार के इसी मिज़ाज में उलझा हुआ है. यहां यह भी जान लेने की जरूरत है कि क्षत्रिय समाज से किसी तीसरे को अवसर मिला तो इन दोनों ने जो बयार बांध रखी है और भंगिमा बना रखी है उससे इनके सियासी शामियाना बदल जाने की आशंका भी बड़ा आकार लिये हुए है.

नीलम देवी या कार्तिक मास्टर?
ब्रह्मर्षि समाज से पूर्व विधायक अनंत सिंह के ‘प्रतिनिधि’ को ही मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी. वह उनकी पत्नी नीलम देवी (Nilam Devi) होंगी या कार्तिक मास्टर, तस्वीर साफ नहीं है. वैसे, ज्यादा संभावना नीलम देवी के ही मंत्री बनने की है. विश्लेषकों को आशंका है कि नीलम देवी को मंत्री नहीं बनाया गया तब वह मुंगेर संसदीय क्षेत्र से ललन सिंह के खिलाफ राजग का उम्मीदवार बन जा सकती हैं. उसके बाद जो होगा उससे आशंकित ललन सिंह उनके लिए पृष्ठभूमि बना रहे हैं. लेकिन, जदयू के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसके पक्ष में नहीं हैं. ऐसा क्यों, इसका खुलासा बाद में. मामला अपने कोटे का रहने के बाद भी राजद को इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं है. वैसे जो भी होगा, उसकी सहमति से ही होगा.

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