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सहरसा : कुछ हो न हो नेताओं के दावों की सौगात तो होगी…!

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राजकिशोर सिंह
29 अक्तूबर 2023

Saharsa : बिहार राज्य पुल निर्माण निगम द्वारा निविदा निकाले जाने के बाद रेलवे ओवरब्रिज (Railway Overbridge) का श्रेय लेने की होड़ मच गयी. दिलचस्प बात यह कि होड़ दूसरे नेताओं में नहीं, उनमें मची जो अप्रत्यक्ष रूप से इसके विरोध में खड़े थे. कथित रूप से व्यवधान पैदा करने का हरसंभव प्रयत्न कर रहे थे. लोग चकित रह गये कि सांसद दिनेश चन्द्र यादव और विधायक आलोक रंजन भी अलग-अलग इसका श्रेय लेने लग गये . इस क्रम में आरोप-प्रत्यारोप का भी दौर चला. सांसद दिनेश चन्द्र यादव (Dinesh Chandra Yadav) के समर्थकों ने इसे उनकी ‘उपलब्धि’ के तौर पर रेखांकित किया.

विधायक का दावा
दूसरी तरफ विधायक आलोक रंजन (Alok Ranjan) का कहना रहा कि राजग की पिछली सरकार में मंत्री बनने के बाद उन्होंने इसके लिए जरूरत से ज्यादा जोर लगाया था, रेलवे और राज्य सरकार पर दबाव बनाया था, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से अनुरोध किया था. उसी का यह सुफल है. लेकिन, शहर के लोगों को उनके इस कथन पर विश्वास नहीं जमता. आधार यह कि रेलवे ओवरब्रिज के स्वीकृत एलाइंमेंट के विरोध में व्यवसायियों की जो मुट्ठियां लहरा रही हैं, उनमें आलोक रंजन के व्यवसायी भाई विवेक विशाल की मुट्ठी भी शामिल है. विवेक विशाल का खादी भंडार के समीप व्यवसायिक प्रतिष्ठान है.

चैम्बर ऑफ कामर्स
आलोक रंजन की भी ‘आलोक पनीर एण्ड स्वीट्स’ के नाम से मिठाई की बड़ी दुकान है. जानकार बताते हैं कि आलोक रंजन के मामा इसे चलाते हैं. जो हो, ‘आलोक पनीर एण्ड स्वीट्स’ की मिठाई स्वाद के मामले में बड़े शहरों की नामी-गिरामी दुकानों की तुलना में तनिक भी कमतर नहीं है. ऐसा कहा जाता है कि उस दुकान को बचाने के लिए आलोक रंजन ने रेलवे ओवरब्रिज का एलाइंमेंट डीबी रोड की तरफ भी बढ़वा दिया. विवेक विशाल सहरसा चैंबर ऑफ कॉमर्स (Saharsa Chamber of Commerce) के सचिव हैं. अध्यक्ष पद की जिम्मेवारी शहर केे चर्चित व्यवसायी उमेश दहलान के भाई अर्जुन दहलान संभाल रहे हैं. दहलान चौक पर उनका कपड़े के व्यवसाय का बहुत बड़ा प्रतिष्ठान है. इसकी ख्याति भी दूर-दूर तक है.

व्यवसायियो के बीच सांसद दिनेश चन्द्र यादव.

औचित्य पर सवाल
लोग चर्चा करते हैं कि रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण में व्यवधान खड़ा करने के मकसद से आनन-फानन में चैंबर ऑफ कॉमर्स बनाया गया. संभव है, इन चर्चाओं में कोई दम नहीं हो, पर तर्क रखा जा रहा है कि सहरसा में जब पहले से व्यापार संघ अस्तित्व में है ही तो फिर इसकी जरूरत क्या है? अर्जुन चौधरी व्यापार संघ के अध्यक्ष और विकास कुमार गुप्ता सचिव हैं. विकास कुमार गुप्ता पूर्व विधायक विजय कुमार गुप्ता के पुत्र हैं. इनका भी अच्छा खासा व्यवसाय है. आमलोगों की बात छोड़ दें, व्यवसायियों का भी एक तबका व्यापार संघ (Trade Union) के सक्रिय रहते चैंबर ऑफ कॉमर्स के औचित्य पर सवाल खड़ा कर रहा है.

पूर्व विधायक का तर्क
जदयू सांसद दिनेश चन्द्र यादव और भाजपा विधायक आलोक रंजन के श्रेय लेने से संबंधित दावों की खिल्लियां उड़ाते हुए पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने तंज कसा कि दोनों जब इतने काबिल हैं और सत्ता राजनीति में प्रभाव रखते हैं, तो फिर तकरीबन 27 वर्षों तक यह मामला अधर में क्यों अटका रहा? क्या यह उनकी नाकामयाबी (Failure) नहीं है? उन्होंने आरोप मढ़ा कि मुख्य रूप से इन दोनों की अप्रत्यक्ष अड़ंगेबाजी के चलते बंगाली बाजार रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण बाधित रहा है. किशोर कुमार मुन्ना का भी मानना है कि व्यवसायियों को कम से कम नुकसान की नीति के तहत रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण होना चाहिये.


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इस विरोध का मतलब क्या?
अब इसे कौन सी राजनीति कहेंगे कि एकाध अपवादों को छोड़ करीब-करीब सभी जनप्रतिनिधि सहरसा को सड़क जाम की गंभीर समस्या से निजात दिलाने के लिए रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण के पक्ष में डटे हैं. यहां तक कि कथित रूप से व्यवसायियों के पक्षधर रहे सांसद दिनेश चन्द्र यादव के सुर भी महापौर (Mayor) पद के चुनाव में पत्नी रेणु सिन्हा के मात खा जाने के बाद बदल गये हैं. पूर्व मंत्री आलोक रंजन के भी. दूसरी तरफ हाल ही में जेल से निकले पूर्व बाहुबली सांसद आनंद मोहन इसके विरोध में हुंकार भर रहे हैं. अपने पूर्व के ‘आतंकराज’ के अंदाज में खुलेआम कह रहे हैं कि रेलवे ओवरब्रिज के लिए टेंडर नहीं गिराने देंगे. टेंडर रद्द करवा देंगे.

देखना दिलचस्प होगा
कहा जाता है कि विधान पार्षद ललन सर्राफ भी व्यवसायियों के पक्ष में हैं. इस पक्ष को और भी कुछ नेताओं का साथ मिल रहा है. इसी क्षेत्र के रहने वाले मनोज कुमार झा राजद (RJD) के राज्यसभा सदस्य हैं. बंगाली बाजार रेलवे ओवरब्रिज के मामले को कुछ दिनों पहले उन्होंने सदन में उठाया था. डीबी रोड, दहलान चौक और महावीर चौक आदि को ऐतिहासिक बाजार बताते हुए उन्हें उजड़ने नहीं देने का अनुरोध किया था. पूर्व सांसद आनंद मोहन के विधायक पुत्र चेतन आनंद ने भी विधानसभा (Assembly) में इस मुद्दे को रखा था. बहरहाल, समर्थन और विरोध की ऐसी ही राजनीति में यह मामला वर्षों से झूल रहा है. निदान कब और किस रूप में निकलता है, यह देखना दिलचस्प होगा.  (समाप्त)

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