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तारा शाहदेव : रकीबुल की हैवानी, दर्द भरी है कहानी

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काफी चर्चित हुआ था धोखा देकर शादी, जबरन धर्मांतरण और शारीरिक- मानसिक प्रताड़ना का यह मामला. राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज तारा शाहदेव के साथ ऐसी हैवानियत रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन ने 2014 में की थी. नौ साल बाद ही सही, सीबीआई की विशेष अदालत ने इन आरोपों में रकीबुल हसन को उम्रकैद की सजा दी . उसकी मां कौशल्या रानी उर्फ कौसर परवीन को दस और झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व निबंधक मुश्ताक अहमद को पंद्रह साल की सजा. मामले में इन दोनों की भी सहभागिता पायी गयी. तारा शाहदेव को रकीबुल हसन ने कैसे अपने चंगुल में फंसाया और फिर उसके साथ क्या – क्या हुआ, किस्तवार पढ़िये इस खोजपूर्ण आलेख में :


विशेष संवाददाता
17 नवंबर 2023

Ranchi : रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन खान जो कथित रूप से संगीन संगठित अपराधों में लिप्त था, अचानक एक दिन उसे अपनी नवविवाहिता पत्नी तारा शाहदेव के प्रतिरोध का सामना करना पड़ गया. झारखंड की राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज तारा शाहदेव (Tara Shahdev) मामले को पुलिस तक ले गयी और झारखंड में एक साथ कई प्रकार के गोरखधंधों का पर्दाफाश हो गया. एक-एक कर अनेक सफेदपोशों की कलई खुल गयी. क्या सचिवालय, क्या न्यायालय, क्या थाना, सब जगह रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन खान और उसके सहयोगियों की घिनौनी कहानियां तैरने लगीं. जिधर देखो उधर किसी न किसी पर ऊंगली उठ रही हैै-इनका भी तो रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन खान के यहां देर रात तक आना-जाना लगा रहता है.

सफेदपोश भी थे हमराज
हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की तब की सरकार के दो मंत्रियों सुरेश पासवान और हाजी हुसैन अंसारी, झारखंड विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष इन्दर सिंह नामधारी. न्यायिक सेवा के चार अधिकारी, वन विभाग के बड़े अधिकारी, अनेक पुलिस उच्चाधिकारी और न जाने कितने सफेदपोश कथित रूप से उसके साथ मिल कर झारखंड में संगीन अपराधों के हमराज या हमराही बन गये थे. पुलिस और न्यायिक अधिकारियों की नाक के नीचे उसने जिस प्रकार से अवैध कमाई का जाल फैला रखा था, उसका पर्दाफाश नहीं होता, अगर डरी और सहमी हुई तारा शाहदेव विवाह के 43वें दिन इस बात के लिए विद्रोह नहीं करती कि उसे दूसरे के बिस्तर पर सोना पड़ सकता है. उस दौर में यह भी चर्चा उठी थी कि रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन खान के लिए तारा शाहदेव पहली शिकार नहीं थी, बल्कि आशंका यह जतायी जा रही थी कि उसने और भी कई लड़कियों को अपने जाल में फंसा कर उनका दैहिक शोषण (Physical Abuse) किया और अनेक सफेदपोशों के बिस्तरों तक पहुंचाया.

गोरखधंधों का सरताज
रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन खान वल्द दिवंगत हरनाम सिंह कोहली, मां कौशल्या रानी उर्फ कौसर परवीन, चार साल के अंदर करोड़पति! उछले आरोपों के मुताबिक हवाला का बड़ा शातिर हैंडलर, सैक्स रैकेट (Sex Racket) का संचालक, राजनीति में गहरी पैठ, प्रशासन में दूर-दूर तक दबदबा, न्यायिक क्षेत्र का दलाल, पुलिस और वन विभाग का पैरवीकार, लाखों की सात-आठ कारों का मालिक, तीन बड़े फ्लैटों का किरायेदार, दावतों का बादशाह, शातिर तस्कर, खेल के क्षेत्र में ऊंची पहुंच, शाही खर्च…अब जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है. उसकी इस दुर्गति का कारण बनी तारा शाहदेव, जो गफलत में उसकी पत्नी बन गयी. यह बात सही है कि तारा शाहदेव अपने फरेबी पति का भंडाफोड़ पहले भी कर सकती थी, लेकिन, भयवश उसने अपने परिवार के लोगों को नहीं बताया कि उसके पति रंजीत सिंह कोहली ने सात वर्ष पहले इस्लाम कबूल कर लिया था.


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खुशबू भी थी इसी परिवार की
तारा शाहदेव गुमला जिले के पालकोट के नागवंशी राज परिवार से आती है. उसके पिता लाल अम्बिकानाथ शाहदेव और चाचा लाल देविकानाथ शाहदेव को जमींदारी के रूप में सिसई के बिरकेरा गांव के आसपास का क्षेत्र मिला था. इसी परिवार की थी खुशबू जिसका अप्रैल 2011 में रांची के संत जेवियर्स कालेज (Saint Xavier’s College) में सरेआम सिर कलम कर दिया गया था. वह तारा शाहदेव की चचेरी बहन थी. अंदरूनी कहानी यही है कि उसमें भी ऐसा ही कुछ चक्कर था. उस मामले में हत्यारे को उम्रकैद की ही सजा मिली है. बहरहाल, चट मंगनी पट ब्याह के इस मामले में तारा शाहदेव बहुत बड़ा धोखा खा गयी. गनीमत है कि देर से ही सही, वह अपने परिवार के लोगों को नौकरानी हरिमति के जरिये यह संदेश भिजवाने में सफल रही कि जिसे वह रंजीत सिंह कोहली (Ranjit Singh Kohli) समझ रही थी वह वास्तव में रकीबुल हसन खान है और उसे प्रताड़ित कर रहा है.

सजा तो मिल गयी, पर…
पुलिस ने तारा शाहदेव को मुक्त तो करा दिया लेकिन रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन खान ने उसकी जिन्दगी में जो जहर व दर्द घोल दिया वह उसे (रकीबुल हसन खान ) उम्रकैद की सजा मिल जाने के बाद भी ताउम्र टीस मारता रहेगा. कारण जो रहा हो,रांची पुलिस ने मामले को घरेलू हिंसा की श्रेणी में रख कार्रवाई की. तारा शाहदेव झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) की शरण में गयी. उच्च न्यायालय के आदेश और मामले की गंभीरता व पेचीदगियों को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे सीबीआई (CBI) को सौंपने का निर्णय किया. (जारी)

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