तापमान लाइव

ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल

शहाबुद्दीन और लालू परिवार : नहीं दिखती ओसामा में विरासत संभालने की सलाहियत

शेयर करें:

राजद और लालू-राबड़ी परिवार तथा शहाबुद्दीन परिवार के आपसी गहरे रिश्ते में गांठ क्यों पड़ गयी? प्रस्तुत है पांच किस्तों के आलेख की चौथी किस्त…

राजेश पाठक
03 दिसम्बर, 2022

SIWAN : सीवान के ‘साहब’ शहाबुद्दीन (Shahabuddin) के इंतकाल के साथ ही एक युग खत्म हो गया. वह एक ऐसा युग था जिसे आसानी से भुलाया नहीं जा सकता. उस कालखंड में शहाबुद्दीन प्रतिद्वंद्वियों के लिए बेलगाम बाहुबली थे, प्रशासन के लिए भारी आफत और पुलिस (Police) के लिए दुःस्वप्न. उनके साये में जो फल-फूल रहे थे, उनके लिए मसीहा थे. सामान्य लोगों को राजनीतिक दृष्टि से उनकी विरासत संभालने की काबिलियत और सलाहियत न पत्नी हीना शहाब (Heena Shahab) में दिखती है और न पुत्र ओसामा शहाब (Osama Shahab) में. इसकी वजह भी है. हाल फिलहाल तक पर्दानशीं रहीं हीना शहाब का दिवंगत पति के ‘जनाधार’ से न कभी कोई खास जुड़ाव रहा और न सीधा संवाद. ओसामा शहाब की तो अपनी अलग ही दुनिया रही है.


अपने भोगे यथार्थ को दृष्टिगत रख शहाबुद्दीन ने ही ओसामा शहाब को इन सबसे दूर रखा. सहमति हीना शहाब की भी थी. परिणामतः ओसामा शहाब का सार्वजनिक जीवन में पहचान बनाने वाला व्यक्तित्व नहीं उभर पाया. सदन की सदस्यता मिलने पर उभर जाये तो वह अलग बात होगी. फिलहाल व्यक्तित्व व नेतृत्व में निखार की कोई संभावना नहीं दिख रही है.


उभर नहीं पाया व्यक्तित्व
जानकारों की मानें, तो अपने भोगे यथार्थ को दृष्टिगत रख शहाबुद्दीन ने ही ओसामा शहाब को इन सबसे दूर रखा. सहमति हीना शहाब की भी थी. परिणामतः ओसामा शहाब का सार्वजनिक जीवन में पहचान बनाने वाला व्यक्तित्व नहीं उभर पाया. सदन की सदस्यता मिलने पर उभर जाये तो वह अलग बात होगी. फिलहाल व्यक्तित्व व नेतृत्व में निखार की कोई संभावना नहीं दिख रही है. इन्हीं सब कारणों से जिन कंधों पर शहाबुद्दीन की राजनीति (Politics) और उससे इतर के कार्यकलापों की ‘व्यवस्था’ थी, एक-एक कर सबने कंधा झटक लिया. जनाधार छिन्न-भिन्न हो गया. राजनीति महसूस करती है कि आज की तारीख में शहाबुद्दीन परिवार (Shahabuddin Family) लगभग अलग-थलग सा पड़ गया है. समझ स्वाभाविक है कि ऐसे में राजद (RJD) नेतृत्व कब तक ढोता? सांगठनिक ढांचे से अलग-थलग कर दिये जाने के बाद 2024 के संसदीय चुनाव (Parliamentary Election) में उम्मीदवारी की संभावना भी लगभग समाप्त हो गयी है.

हवा हो गये हवा बांधने वाले
राज्यसभा के चुनाव में उम्मीदवारी से वंचित कर दिये जाने के बाद एक तबके द्वारा हीना शहाब की बगावत की हवा बांधी गयी. सीवान (Siwan) ही नहीं, राज्य स्तर पर राजद के पांव उखड़ जाने की आशंका जतायी गयी. लेकिन, जमीन पर वैसा कुछ नहीं दिखा. सब कुछ सामान्य नजर आया. हीना शहाब को जिस दिन अप्रत्याशित निराशा मिली उसी दिन सीवान के नया किला स्थित शहाबुद्दीन के आवास पर समर्थकों की ‘आक्रोश बैठक’ हुई. बहुत तरह की बातें की गयीं. राजद और उसके अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad) के बारे में भी अनाप-शनाप टिप्पणी हुई. पर, राजनीति के लिए हैरानी की बात यह रही कि राजद के जो स्थानीय नेता (कुछ विधायक भी) दरकिनार किये जाने से पहले हीना शहाब के लिए सिर कटा देने का दंभ भर रहे थे, उम्मीदवारी नहीं मिलने के बाद प्रायः सबके सब हवा हो गये. बैठक में किसी की कोई झलक नहीं दिखी. अब तो कोई उधर फटकते तक नहीं हैं.


इन्हें भी पढ़ें :
शहाबुद्दीन और लालू परिवार : ओसामा शहाब को चुभ गया तिरस्कार
तब भी खंडित नहीं हुई निष्ठा हीना शहाब और ओसामा की
चकित रह गयी राजनीति लालू-राबड़ी परिवार के ओछापन पर


‘भक्त’ ने भी लिया मुंह फेर
हवा बांधने वालों में रघुनाथपुर (Raghunathpur) के विधायक हरिशंकर यादव (Harishankar Yadav) प्रमुख थे. कुछ माह पूर्व इसी हरिशंकर यादव ने खुले तौर पर कहा था-‘लालू प्रसाद की भी औकात नहीं कि हीना शहाब (Heena Shahab) को राज्यसभा जाने से रोक दें.’ उन्होंने यह भी जोड़ा था कि हीना शहाब राज्यसभा जाने के लिए तैयार हो गयीं और किसी ने उन्हें रोका तो वह विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे. थोड़ा और पीछे चलें तो 2016 में शहाबुद्दीन जब भागलपुर जेल (Bhagalpur Jail) से छूटकर शाही अंदाज में सीवान पहुंचे थे तब विधायक हरिशंकर यादव ने उन्हें अपना भगवान बताया था. हरिशंकर यादव की ऐसी टिप्पणियां बेवजह नहीं आयी थीं. राजद के लोग बताते हैं कि वह शहाबुद्दीन की ‘कृपा’ से ही विधायक (MLA) बने हैं. 2020 की जीत में भी शहाबुद्दीन परिवार का बहुत बड़ा योगदान रहा है. वक्त आया तब…! यही है अभी की राजनीति का चरित्र.

अगली कड़ी…
शहाबुद्दीन और लालू परिवार: राजद से अलग मतलब खेल खत्म!

#TapmanLive

अपनी राय दें