तापमान लाइव

ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल

पटना : भगवानजी की बात, काटे नहीं कटते ये दिन ये रात…

शेयर करें:

विशेष प्रतिनिधि
17 अप्रैल, 2023

PATNA : भगवानजी अफसरशाही और राजनीति (Politics) की जिन्दगी में शायद कभी इतनी दुविधा में रहे होंगे. अफसरशाही का दौर मजे में गुजरा. राजनीति की शुरुआत भी ऐसी हुई, वैसी किसी और की नहीं हुई होगी. पार्टी के प्राथमिक सदस्य (Member) और राज्यसभा के सदस्य एक साथ बने. राजनीति का समापन भी शानदार ढंग से हुआ. केंद्र में मंत्री (Minister) बन गये. विभाग भी इतना अच्छा मिला कि जिन्दगी की सभी बची-खुची हसरतें पूरी हो गयीं. लेकिन, अभी का दौर उनसे काटा नहीं जा रहा है. पार्टी से बाहर हुए थे तो समर्थकों की जबर्दस्त भीड़ लगी रहती थी. आम कार्यकर्त्ताओं को कौन कहे, कई विधायक (MLA) और मंत्री भी मोबाइल (Mobile) पर बातचीत कर अपना समर्थन प्रकट कर देते थे.


कुशवाहाजी के बारे में तो नहीं कहा जा सकता है, भगवानजी तो निबट ही गये लगते हैं. हालांकि, राजनीति में किसी के बारे में कोई सटिक भविष्यवाणी (Prediction) नहीं की जा सकती है. लेकिन, आज के बाजार भाव को देखकर कहें तो भगवानजी का भाव मंदा चल रहा है.


वह दौर कामकाज का था
कभी-कभी तो यह अफवाह भी फैल जाती थी कि भगवानजी जदयू (JDU) के तीस विधायकों को तोड़ कर नयी पार्टी बना लेंगे. सरकार (Government) बन जायेगी. ठीक बात है. भगवानजी को सरकार चलाने का पुराना अनुभव है. हटने के बाद दावा तो यही किया गया कि सुशासन की सरकार भगवान (God) भरोसे नहीं, इन्हीं भगवानजी के भरोसे चल रही थी. इसकी व्याख्या करते समय 2005 से 2010 के कार्यकाल का हवाला दिया जा रहा था. सचमुच वह दौर सरकार के कामकाज का था. इतना अच्छा काम हुआ कि लोकसभा (Lok Sabha) और विधानसभा (Vidhan Sabha) चुनाव में सुशासन बाबू को भारी जन समर्थन मिला. यह वही चुनाव था, जिसमें विधानसभा में कोई आधिकारिक विपक्ष नहीं रह गया था.


इन्हें भी पढ़ें :
पटना : साहब तो साहब, मैडम भी कम नहीं!
बदल गया कानून आनंद मोहन के लिए!


कान में फूंक दिया
भगवानजी ने अलग होने के बाद कहा कि पार्टी, सरकार और राज्य (State) की दुर्गति उसी दिन से शुरू हुई, जिस दिन दरबारियों ने सुशासन बाबू के कान (Ear) में फूंक दिया कि आपमें पीएम मैटेरियल (PM Material) भरा हुआ है. उसी के बाद भाजपा (BJP) से झगड़ा शुरू हुआ और बेचारे उसी दल की गोद में चले गये, जिसके लगातार विरोध के कारण उन्हें गद्दी मिली थी. खैर, सुशासन बाबू की जितनी तबाही हुई है, उसे लोग देख रहे हैं. लेकिन, असली तबाही तो भगवानजी की शुरू हो चुकी है. भगवानजी इन दिनों मोबाइल (Mobile) के हरेक काल (Call) को खुद उठा रहे हैं. यह देखने के लिए कि कहीं शाहजी का तो काल नहीं आ रहा है. शाहजी का छोड़िए, उनके चेले चपाटियों ने भी फोन करना बंद कर दिया है. इससे पहले पंडितों से उन्होंने भाजपा में प्रवेश के लिए दिन निकलवाया. सब दिन फेल हो रहा है.

आफत नयी यह है
नयी आफत यह है कि जदयू (JDU) के राष्ट्रीय और प्रदेश इकाइयों के लिए जो पदाधिकारियों का चयन हुआ है, उसमें भगवानजी के सभी भक्तों को जगह दे दी गयी है. सुशासन बाबू की कैबिनेट में कई ऐसे मंत्री हैं, जो भगवानजी (Bhagwanji) की कृपा से विधायक बने थे. एक महिला मंत्री को तो उन्होंने वीटो लगाकर विधानसभा का टिकट दिलवाया था. अलगाव के समय उनके पति भगवानजी की सेवा में थे. माना जा रहा था कि मंत्री भले ही सुशासन बाबू के साथ रहें, लेकिन पतिदेव तो भगवानजी की शरण में ही रहेंगे. पतिदेव को भी प्रदेश वाली कमिटी में जगह मिल गयी है.


इन्हें भी पढ़ें :
पटनाः इसलिए अंतर्धान हो गये थे रामचंद्रजी!
‘गुदड़ी के लाल’ तूने कर दिया कमाल!


लगा दिये गये ठिकाना
जदयू की राजनीति के जानकारों का तो कहना है कि केंद्र और प्रदेश पदाधिकारियों की सूची भगवानजी (Bhagwanji) और कुशवाहाजी (Kushwahaji) को ठिकाना लगाने के लिए बनायी गयी है. कुशवाहाजी के बारे में तो नहीं कहा जा सकता है, भगवानजी तो निबट ही गये लगते हैं. हालांकि, राजनीति में किसी के बारे में कोई सटिक भविष्यवाणी (Prediction) नहीं की जा सकती है. लेकिन, आज के बाजार भाव को देखकर कहें तो भगवानजी का भाव मंदा चल रहा है.

#TapmanLive

अपनी राय दें