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मुमताज : खनकती थीं जब चूड़ियां…

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सत्येन्द्र मिश्र
26 अप्रैल, 2023

MUMBAI : अभिनेत्री मुमताज (Mumtaz) का कभी खूब जलवा था. हिन्दी सिनेमा (Hindi Film) में अपने जमाने की मशहूर अदाकाराओं में शुमार थीं. साठ और सत्तर के दशक में सिने दर्शकों की चहेती अभिनेत्री थीं. लोकप्रियता ऐसी कि तब के तमाम निर्माता-निर्देशक मुमताज को अपनी फिल्म में जगह देने के लिए बेकरार रहते थे. अपनी बेहतरीन अदाकारी ही नहीं, रूप के निखरे सौन्दर्य को लेकर भी कई समकालीन अभिनेता उन पर फिदा रहते थे. शम्मी कपूर (Shammi Kapoor) और जितेन्द्र (Jitendra) भी उन्हीं में थे. अलग-अलग इन दोनों को मुमताज से प्यार हो गया था. शम्मी कपूर तो उनके साथ घर बसाने तक का सपना देखने लग गये थे. मौका देखकर एक दिन वह शादी का प्रस्ताव लेकर पहुंच भी गये. लेकिन मुमताज ने उन्हें ठुकरा दिया. जबकि वह भी उन्हें प्यार करती थीं. सवाल स्वाभाविक है कि तो फिर इनकार क्यों?

मुमताज

इसलिए नहीं हुई शम्मी कपूर से शादी
इस क्यों का खुलासा खुद मुमताज ने एक बातचीत में किया. बताया कि शम्मी कपूर की एक शर्त के चलते उन्होंने उनसे शादी करने से इनकार कर दिया था. कपूर खानदान की बहूएं फिल्मों में काम नहीं करतीं. इसी के मद्देनजर शम्मी कपूर ने उनसे कहा था कि शादी के बाद उन्हें भी फिल्मी करियर छोड़ा पड़ जायेगा. तब मुमताज मात्र 18 साल की थीं. महत्वाकांक्षाओं से लबालब थीं. फिल्म के करियर में कोई अच्छा सा मुकाम पाना चाहती थीं. घर भी बसाना चाहती थीं. लेकिन, शादी के बाद घर में बैठे रहना उन्हें पसंद नहीं आया. शम्मी कपूर को शादी के लिए मना कर दिया. शम्मी कपूर के साथ मुमताज की जिंदगी आगे भले नहीं बढ़ पायी, लेकिन अपनी शादी शुदा जिंदगी में वह बेहद खुश हैं.

बाल कलाकार के रूप में हुई करियर की शुरुआत
1974 में उन्होंने मयूर माधवानी से शादी की थी. दो बेटियां हैं. एक बेटी नताशा (Natasha) की शादी मुमताज के अभिनय काल में अभिनेता रहे फिरोज खान(Feroz Khan)  के बेटे फरदीन खान (Fardeen Khan) से हुई है. मुमताज के माता-पिता अब्दुल सलीम अस्करी और शादी हबीब आगा मूल रूप से ईरान के रहने वाले थे. 1946 में मुमताज के जन्म लेने के ठीक एक साल बाद उनका तलाक हो गया. बदले हालात में मुमताज की मां शादी हबीब आगा अपनी मां और बहन के साथ रहने चली गयीं. परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था. इस संकट से उबरने के लिए मुमताज और उनकी बहन मलिका ने फिल्म उद्योग में काम करने का फैसला किया. हिन्दी सिनेमा में मुमताज ने अपने करियर की शुरूआत 1952 में ‘संस्कार’ फिल्म में बाल कलाकार के रूप में की थी. बाद में लोकप्रिय अदाकारा की पहचान बन गयी.


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बी ग्रेड की फिल्मों में भी काम करना पड़ा
11 साल बाद 1963 में मुमताज ने दारा सिंह (Dara Singh) के साथ एक फिल्म में सह-अभिनेत्री की भूमिका निभायी. सिलसिला वहीं से शुरू हुआ. हालांकि, शुरुआती दौर में कोई विशेष कामयाबी नहीं मिली. फिल्मों में भूमिका बहुत छोटी हुआ करती थी. कुछ रोमांटिक दृश्यों और गानों में दिखती थीं. 1969 में राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) के साथ ‘दो रास्ते’ से मुख्य धारा के सिनेमा में कदम रखने से पहले वह बी ग्रेड की कई फिल्मों में काम कर चुकी थीं. ‘हरे राम हरे कृष्णा’ में देवानंद ने उन्हें अपनी बहन की भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया था. मंजूर नहीं हुआ. फिल्म छोड़ दिया. अवसर जीनत अमान (Zeenat Aman) को मिल गया. 1973 में अमिताभ बच्चन ने पहली बार ‘बंधे हाथ’ में दोहरी भूमिका निभायी थी. उस फिल्म की अभिनेत्री मुमताज ही थीं. उनकी फिल्मों के सदाबहार गीत-‘बिंदिया चमकेगी, चूड़ी खनकेगी…’, ‘जय-जय शिव शंकर…’, ‘ये रेशमी जुल्फें…’ आदि उनकी याद दिलाते रहते हैं.

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