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साइबर ठगी : जामताड़ा ने डाली थी बुनियाद!

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राजकिशोर सिंह
30 जुलाई, 2023

Jamtara : साइबर क्राइम (Cyber Crime) की शुरुआत वहां कब और कैसे हुई, इसकी कहीं कोई ठोस जानकारी नहीं है. संभवतः पुलिस के पास भी नहीं. स्थानीय चर्चाओं में जामताड़ा के सिंधराजोरी (Sindrajori) गांव के सीताराम मंडल उर्फ राजकुमार मंडल और मिरगा गांव के प्रदीप मंडल को ‘मास्टरमाइंड’ (mastermind) माना जाता है. सामान्य समझ है कि साइबर क्राइम की बुनियाद इन्हीं दोनों ने डाली थी. सीताराम मंडल की कहानी कुछ इस प्रकार है. घनघोर गरीबी की वजह से मैट्रिक तक की ही पढ़ाई कर पाये सीताराम मंडल झारखंड (Jharkhand) के बेरोजगार युवकों की भीड़ का हिस्सा बन 2010 में मुम्बई (mumbai) गया. वहां मोबाइल फोन (mobile phone) रिचार्ज की दुकान में काम करते कुछ कॉल सेंटरों (call centers) से जुड़ गया. यही जुड़ाव ने उसकी तकदीर बदल दी.

ऐसे होती है ठगी
गुपचुप तरीके से साइबर ठगी के तमाम गुर सीख लेने के बाद 2012 में वह जामताड़ा लौट आया. वहीं से लोगों की बैंक में जमा गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ करने लग गया. जाली सिम कार्ड वाले मोबाइल फोन से फर्जी बैंक मैनेजर (fake bank manager) बन खाताधारकों (account holders) को कार्ड ब्लॉक हो जाने की बात कह एटीएम नम्बर, ओटीपी, सीवीवी नम्बर मांग लिया करता था. सब तो नहीं, पर घबराहट में कुछ लोग जाल में फंस ही जाते थे. फोन पर बात खत्म होते-होते वैसे लोगों का खाता खाली हो जाता था. उड़ाये गये पैसे को वह मोबाइल फोन रिचार्ज रिटेलर की आईडी में ट्रांसफर कर देता था. रिटेलर संबद्ध रकम का 30 प्रतिशत खुद रख नगदी के रूप में 70 प्रतिशत उसे दे देता था.

ऐसे आ रही जामताड़ा-करमाटांड़ में समृद्धि.

पहली प्राथमिकी 2013 में
करमाटांड़ थाने (Karmatand Police Station) में साइबर क्राइम का पहला मामला 2013 में दर्ज हुआ. उसके बाद इस गोरखधंधे का रहस्य परत-दर-परत खुलने लगा. उसी दौरान सीताराम मंडल की गिरफ्तारी हुई. डेढ़ साल की सजा मिली. लेकिन, धंधे पर कोई असर नहीं पड़ा. शागिर्दों ने उसे बदस्तूर जारी रखा. ऐसा कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के बैंक खाते से सीताराम मंडल उर्फ राजकुमार मंडल और विकास मंडल के गिरोह ने रुपये उड़ाये थे. पुलिस का मानना है कि पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh, the then Chief Minister of Punjab) की पत्नी परणीत कौर (Preneet Kaur) के खाते से 23 लाख रुपये अताउल अंसारी और केरल के सांसद प्रेमचंद्रन (Kerala MP Premachandran) के खाते से 1 लाख 60 हजार रुपये धनंजय मंडल और पप्पू मंडल ने निकाल लिये थे. ये सब भी जामताड़ा-करमाटांड क्षेत्र के ही रहने वाले हैं.

ऑनलाइन रैकेट
साइबर ठगी की शुरुआत के संदर्भ में एक किस्सा यह भी है कि रोजी-रोटी के लिए दिल्ली (Delhi) गये इस इलाके के कुछ युवक ‘चेहरा पहचानो’ ऑनलाइन रैकेट में शामिल हो गये. इसमें इनाम के लिए फिल्मी सितारों की हल्की धुंधली तस्वीरों को पहचानने के लिए कहा जाता था. चेहरा पहचान लेने वाले लोग फोन करते थे. इनाम के रूप में एसयूवी पाने के लिए प्रोसेसिंग फीस जमा करने को कहा जाता था. कहावत है कि लोभी के गांव में ठग उपवास नहीं करता. एसयूवी के लोभ में लोग प्रोसेसिंग फीस जमा कर देते थे. पर, रकम जमा होते ही संपर्क खत्म हो जाता था. पुलिस का मानना रहा कि ऑनलाइन रैकेट (online racket) में शामिल युवक जामताड़ा लौटकर वहीं से इसे बुलंदी देने लग गये.


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ऑफर के नाम पर ठगी
इन शातिरों ने ऑफर के नाम पर भी ठगी का धंधा शुरू किया. लकी ड्रा व इनाम निकलने की बात कह लोगों से पार्सल या अन्य किसी नाम पर एक तय रकम अपने बैंक खाते में जमा करवाता था. रकम जमा होते ही संपर्क समाप्त हो जाता था या इनाम के रूप में ईंट-पत्थर के पैकेट भेज दिये जाते थे. इस ठगी की बाबत सतर्कता-सजगता बढ़ी तब बैंक खाते में सेंध लगाने लग गये. साइबर क्राइम (cyber crime) में महिलाओं की भी संलिप्तता है. बेधड़क शुद्ध हिन्दी और अंग्रेजी बोलने वाली महिलाओं की. कहा यह भी जाता है कि कई गिरोह महिलाओं द्वारा भी संचालित हैं. मीठी सुरीली आवाज एवं मोबाइल फोन पर बात करने के खास अंदाज से ऐसी महिलाएं लोगों को आसानी से फांस लेती हैं. खासकर पुरुष खाताधारकों को.

ठगी के धंधे में महिलाएं भी
इधर के वर्षों में ऐसी अनेक महिला ठगों की गिरफ्तारी से इसकी पुष्टि हुई है. पहली गिरफ्तारी पिंकी नाम की महिला ठग की हुई थी. उसका पति भी साइबर क्रिमिनल था. संभवतः उसी ने उसे इस धंधे में धकेला था. ऐसी चर्चा है कि साइबर क्राइम से जुड़े युवा खुद बेहद कम पढ़े-लिखे होते हैं, पर शादी आमतौर पर पढ़ी-लिखी और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली तेज-तर्रार लड़कियों से करते हैं. इसके लिए दहेज लेने के बदले लड़की वाले को ही दहेज देते हैं. मकसद ठगी के धंधे में पत्नी की सहभागिता होती है. जिन गिरोहों से महिलाओं का जुड़ाव नहीं है, उसके पुरुष सदस्य ही महिला की आवाज में बात कर खाताधारकों को लूटते हैं.

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