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एसपी पर भारी थानेदार : जंगलराज की राह बिहार!

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अभिषेक कुमार सुमन
 23 जुलाई 2024

Sasaram : नीतीश कुमार की ‘सुशासनी सरकार’ का दावा जो हो, सामान्य धारणा में बिहार फिर से ‘जंगल राज’ की राह बढ़ रहा है. इसका अलग से प्रमाण तलाशने की जरूरत नहीं है. यह हर जगह मौजूद है और इस बात की तसदीक़ कर रहा है कि राज्य की विधि- व्यवस्था सरकार के नियंत्रण से करीब – करीब बाहर हो गयी है. ‘कानून का राज’ के दावों के बीच सरकार की पेशानी पर पड़े बल से इसकी स्वत: पुष्टि भी हो जा रही है. उच्च स्तरीय बैठक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के सख्त निर्देश और आर एस भट्टी जैसे कड़कमिजाज आईपीएस अधिकारी के हाथ में कमान रहने के बाद भी जनता भगवान भरोसे हो गयी है तो इसका जरूर कोई न कोई बड़ा कारण होगा .

मामला रोहतास का
‌कारण है, एक नहीं अनेक हैं. उनमें एक बड़ा कारण क्या है यह रोहतास (Rohtas) जिले के इस प्रकरण से आसानी से समझा जा सकता है. ‌ वैसे तो मामला एक जिला का है, पर इसमें पूरे राज्य के पुलिस तंत्र की धनलोलुपता, कर्तव्यहीनता एवं अनुशासनहीनता का अक्स दिख जा रहा है. सामान्य और संवेदनशील (Sensitive) मामलों में फर्क नहीं समझने का भी. मामला क्या है पहले इसको समझते हैं. रोहतास जिले के दावथ थाना क्षेत्र के बभनौल गांव में 11 जुलाई 2024 को मुहर्रम का झंडा गाड़ने को लेकर विवाद हुआ. बिक्रमगंज अनुमंडल (Bikramganj Subdivision) प्रशासन के प्रयास से मामले को तत्काल शांत करा दिया गया.

नहीं माना ऊपर का निर्देश
अनुमंडलाधिकारी अनिल बसाक ने आरोपितों को चिह्नित कर नामजद प्राथमिकी दर्ज करने और भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम की धारा 126 के तहत प्रस्ताव भेजने का निर्देश पुलिस को दिया. 14 जुलाई 2024 को रोहतास के जिलाधिकारी नवीन कुमार, पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी अनिल बसाक तथा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से स्थल मुआयना किया. उस दरमियान भी नामजद प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया. पर, दावथ के थानाध्यक्ष कृपाल जी ने उस निर्देश की अवहेलना कर दी. 15 जुलाई 2024 को अप्राथमिकी संख्या 64 दिनांक 14 जुलाई 2024 के रूप में भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम (Indian Civil Defense Act) की धारा 126 के तहत प्रस्ताव एसडीएम कोर्ट में समर्पित कर दिया. ‌

अज्ञात के खिलाफ प्रथमिकी
उसमें ग्यारह लोगों को चिह्नित कर उनके नाम तो दिये गये , पर घटना का जिक्र नहीं किया गया. इसके पीछे थानाध्यक्ष कृपाल जी का मकसद जो रहा हो, एसडीएम कोर्ट ने उस प्रस्ताव को वापस कर दिया. हालांकि, बाद में संशोधित प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया.‌ यह मामले का एक पक्ष है. दूसरा पक्ष बेहद हैरान करने वाला है. इस रूप में कि दावथ पुलिस द्वारा एसडीएम कोर्ट में समर्पित प्रस्ताव में ग्यारह आरोपितों के नाम तो दिये गये, पर प्राथमिकी – संख्या 233 दिनांक 15 जुलाई 2024 – अज्ञात के खिलाफ दर्ज हुई. यानी प्रस्ताव में वर्णित संदिग्धों के नाम छोड़ दिये गये.


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कारण बताओ नोटिस
भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service) के अनुमंडलाधिकारी अनिल बसाक (Anil Basak) ने इसके पीछे के खेल को समझ दावथ के थानाध्यक्ष कृपाल जी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया. एक नहीं, अलग अलग तारीख में दो कारण बताओ नोटिस. उन्होंने इसे वरीय अधिकारियों के आदेश की अवहेलना माना‌. ‌धन लेकर आरोपितों का बचाव करने का संदेह जताया. सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि दावथ पुलिस के पास आसूचना तंत्र नहीं रहने की भी बात कही.

नहीं दिया जवाब!
‌‌‌‌थानाध्यक्ष कृपाल जी ने कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया या नहीं, यह नहीं मालूम. ‌उनके खिलाफ कोई कारवाई होगी भी या नहीं, यह कहना भी कठिन है. इसलिए कि ‘बड़े साहब’ की ‘विशेष कृपा’ इन्हें प्राप्त है. पर, यह बेहिचक कहा जा सकता है कि थानाध्यक्ष कृपाल जी जैसी कथित धनलोलुपता, कर्तव्यहीनता एवं अनुशासनहीनता आमतौर पर थानेदारों की कार्यशैली का अनिवार्य हिस्सा बन गयी है. आसूचना तंत्र (Intelligence System) का हाल भी कमोबेश ऐसा ही है. ‌ ऐसे में बिहार जंगलराज की राह ही तो बढ़ेगा!

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