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मोहन बिंद : ऐसे बन गया दस्यु सरगना से ‘मोहन राजा’!

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एक था ‘मोहन राजा’. कौन था, क्या था, कब था और कहां था? दुनिया जो जानती है उससे अलग ढेर सारी ऐसी बातें हैं जो उसके खात्मे के तकरीबन चालीस साल बाद भी रहस्य बनी हुई हैं. यहां उन रहस्यों पर से पर्दा हटाया जा रहा है. किस्तवार किस्सा की दूसरी कड़ी में जानिये कि मोहन बिंद दस्यु सरगना से ‘मोहन राजा’ कैसे बन गया .

तापमान लाइव ब्यूरो

25 जुलाई 2024

Malaon (Rohtas) : मलांव के बड़े-बुजुर्गों की जानकारी में मोहन बिंद (Mohan Bind) बचपन के ब्राह्मण मित्र अवध दूबे के साथ गांव में पहलवानी करता था. किसी मुद्दे पर विवाद हुआ, दोस्ती टूट गयी. घात-प्रतिघात का खूनी दौर चला. मोहन बिंद के भाई मूरत बिंद को जेल में डाल दिया गया. परिजनों पर भी कहर टूटा. इन सबसे त्रस्त मोहन बिंद पहाड़  पर शरण लेने को बाध्य हो गया. फिर अवध दूबे की हत्या हो गयी. कैमूर पहाड़ (kaimur mountain) पर तब रामाशीष बिंद (Ramashish Bind) का आतंक था. जानकार बताते हैं कि 1977 में सोनहर  निवासी दस्यु सरगना सिगासन बिंद  के बूथ लूटने के क्रम में मारे जाने के बाद रामाशीष बिंद ने दस्युओं के ‘दसवीं गिरोह’ का गठन किया था. बाद के दिनों में वह भी मारा गया. गिरोह की कमान मोहन बिंद के हाथ में आ गयी और देखते ही देखते वह ‘कैमूर का मोहन राजा’ (Mohan Raja of Kaimur) बन गया.

सामाजिक संत्रास

जून 1998 की उस तारीख को काफी कुरेदने पर मोहन बिंद की मां रामदेई कुंवर ने थरथराते ओठों से समकालीन तापमान को बताया था – ‘बबुआ हमार सचमुच में दिल के राजा रहला. गांव में कौनो झगड़ा होय बबुआ के नाम पुलिस में लिखा-लिखा के लोग ओकरा के फरारी जीवन जीय के बाध्य कैलस’. मोहन बिंद के आतंक काल में मलांव गांव का नाम तो खूब होता था, पर वहां के बाशिंदों को सामाजिक संत्रास भी झेलना पड़ रहा था. मुख्यतः इस रूप में कि कोई उस गांव से रिश्ता नहीं जोड़ना चाहता था. दूर-दूर ही रहता था.

अचंभित रह गये गांव वाले

वरिष्ठ पत्रकार- छायाकार देवव्रत राय उस दिन तपती दोपहरी में मोहन बिंद के घर का पता पूछते-पूछते मलांव पहुंचे तो गांव के लोग अचंभित रह गये. दशकों बाद की ऐसी प्रासंगिकता को समझ नहीं पाये. यह बताने पर कि ‘मोहन राजा’ की विरासत देखने आये हैं, गांव वालों की जिज्ञासा शांत हुई. देवव्रत राय की गांव वालों ने अच्छी खातिरदारी की. मलांव गांव के बीच में है राम जानकी मंदिर(Ram Janaki Temple) . वहीं गांव वालों की बैठकी जमती है. मंदिर पर रोहित कुमार से मुलाकात हुई. चर्चा शुरू करते ही उन्होंने मुद्दे को मोहन बिंद के रिश्ते के एक पोता के हवाले कर दिया. उनसे कोई खास जानकारी नहीं मिली.


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दो शादियां हुई थी

बात-मुलाकात स्थानीय स्तर के एक नेता जी से भी हुई . नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर उन्होंने बहुत कुछ जानकारी दी. उस जानकारी के मुताबिक मोहन बिंद की दो शादियां हुई थी. पहली शादी दरिगांव की बसमतिया देवी से हुई थी. मलांव से लगभग छह किलोमीटर की दूरी पर बसा दरिगांव अब पुलिस ओपी बन गया है. मोहन बिंद की दूसरी शादी पहाड़ के आदिवासी समाज की खरवार जाति की लालमुनि देवी से हुई. मलांव के ही कुछ लोगों ने बताया कि कैमूर जिले के अघौरा प्रखंड क्षेत्र के कदहर गांव की रहने वाली लालमुनि देवी दस्यु गिरोह में मोहन बिंद के साथ रहती थी. उसी दरमियान शादी हो गयी.

दूसरी से है एक लड़का

मोहन बिंद को पहली पत्नी से कोई संतान नहीं हुई. दूसरी ने एक लड़के को जन्म दिया. मोहन बिंद का बिल्कुल प्रतिरूप. पैतृक संपत्ति के नाम पर मात्र दो बीघा जमीन थी इस परिवार के पास. दोनों सौतनों के बीच बराबर का बंटवारा कर दिया गया था. तब भी दोनों सास के साथ रहती थीं. लालमुनि देवी सास का ज्यादा खयाल रखती थी. गांव वालों के मुताबिक फरारी जीवन में लालमुनि देवी ही मोहन बिंद के साथ पहाड़ पर रहती थी. अब न सास है और न सौतन. पतोहू की आमद हुई है.

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