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परिवार में तकरार : बेटा- बेटी, बहू – दामाद सब हैं दावेदार !

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विष्णुकांत मिश्र

24 जुलाई 2024

Patna : पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) की सांसद बनने की मुराद तो पूरी हो गयी, पर इसके साथ कुछ ऐसी मुश्किलें भी आ खड़ी हुई हैं जिनको सुलझा पाना उनके लिए कठिन प्रतीत हो रहा है. सांसद (Member of parliament) बनने की उनकी चाहत काफी लम्बी थी. तीन-चार प्रयासों के बाद उम्र के आखिरी पड़ाव पर वह पूरी हुई. संयोग कहें या ‘चरणों में गिरने’ का सुफल, भगवान राम (lord ram) को जब तक काल्पनिक मानते रहे, सांसदी के लिए तरसते रहे. 2024 के चुनाव से कुछ समय पूर्व अयोध्या (Ayodhya) में रामलला के समक्ष उन्होंने शीश नवाया, चरण धूलि माथे से लगायी, बिना विलम्ब मनोकामना पूरी हो गयी.

मुसीबत भी गले लग गयी

वह भी बिना किसी कांट- छांट के. जिस गया संसदीय क्षेत्र (gaya parliamentary constituency) से लाख से अधिक वोट से हारते थे, रामजी की कृपा से लाख से अधिक वोट से जीत गये. कृपा भी ऐसी वैसी नहीं, केन्द्र में मंत्री भी बन गये. यह सब तो हुआ, लेकिन उस कृपा के साथ एक मुसीबत भी गले लग गयी है. मुसीबत इमामगंज विधानसभा क्षेत्र (Imamganj assembly constituency) को लेकर है. 2020 में जीतनराम मांझी इसी क्षेत्र से विधायक (Vidhayak) निर्वाचित हुए थे. गया (Gaya) से सांसद निर्वाचित हो गये, तो विधानसभा की सदस्यता त्यागनी पड़ गयी. अब वहां उपचुनाव (by-election) होना है. उनके समक्ष समस्या यह खड़ी हो गयी है कि इमामगंज विधानसभा क्षेत्र की विरासत वह सौंपे तो किसे सौंपें ?

परिवार में हैं कई ‘सियासी चातक’

जीतनराम मांझी की राजनीति का जो चरित्र है उसमें वंशवाद (Vanshavad) से अलग वह जा नहीं सकते हैं. दूसरे किसी समर्पित नेता-कार्यकर्ता को अवसर उपलब्ध करा नहीं सकते हैं. ऐसा इसलिए भी नहीं कर सकते हैं कि परिवार में ही ऐसे कई ‘सियासी चातक’ हैं जो सत्ता की बूंद के लिए टकटकी लगा रखे हैं. कौन-कौन हैं ‘सियासी चातक’ इसे जानिये. जीतनराम मांझी खुद सांसद हैं, केन्द्र में मंत्री भी हैं. उनके बड़े पुत्र संतोष कुमार सुमन  उर्फ संतोष सुमन (Santosh Kumar Suman alias Santosh Suman) विधान परिषद (Vidhan Parishad) के सदस्य हैं और नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की सरकार में मंत्री हैं. समधिन ज्योति देवी (Jyoti Devi) बाराचट्टी (Barachatti) से विधायक हैं.


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कुलबुला रही उनकी भी इच्छा

2020 के चुनाव में महागठबंधन (grand alliance) का घटक रहते जीतनराम मांझी ने अपने दामाद देवेन्द्र मांझी (Devendra Manjhi) को मखदुमपुर (Makhdumpur) से चुनाव लड़वाया. मुंह की खा गये. लोग बताते हैं कि देवेन्द्र मांझी की नजर अब इमामगंज के उपचुनाव पर है. विवादों में घिरे रहने वाले छोटे पुत्र प्रवीण कुमार सुमन उर्फ प्रवीण सुमन (Praveen Kumar Suman alias Praveen Suman) को चुनाव लड़ने का अवसर संभवतः अभी तक नहीं मिल पाया है. उपचुनाव में संभावना बनती दिख रही है. जीतनराम मांझी की बेटी सुनैना देवी (Sunaina Devi) गया नगर निगम (Gaya Municipal Corporation) की राजनीति करती हैं. 2022 में महापौर पद (post of mayor) की उम्मीदवार थीं. पिता के खूब जोर लगाने के बावजूद हार गयीं. करीब के लोगों का मानना है कि संभावना तनिक भी नहीं रहने के बावजूद इमामगंज (Imamganj) की विरासत संभालने की इच्छा उनकी भी कुलबुला रही है.

दम है दीपा मांझी के दावे में

इन सब से अलग सोशल मीडिया में सक्रिय रहने वालीं जीतनराम मांझी की बहू और संतोष कुमार सुमन उर्फ संतोष मांझी की पत्नी दीपा मांझी (Deepa Manjhi) की दावेदारी में भी काफी दम दिख रहा है. सोशल मीडिया पर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad) की सिंगापुर वासी पुत्री रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya) के साथ तीखे संवाद को लेकर दीपा मांझी खासे चर्चा में रहती हैं. इस कारण भी पहचान का संकट नहीं है. जीतनराम मांझी की पार्टी ‘हम’ के सूत्रों से जो सूचना मिल रही है उसके मुताबिक दीपा मांझी और प्रवीण कुमार सुमन उर्फ प्रवीण सुमन में से ही किसी को उम्मीदवारी मिल सकती है. क्या होता है क्या नहीं, यह वक्त बतायेगा. जहां तक परिवार से इतर उम्मीदवारी की बात है तो ऐसा तभी संभव होगा जब किसी कारणवश परिवार में सहमति नहीं बन पायेगी.

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