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पटना : इस दल के होंगे टुकड़े चार …

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संजय वर्मा
25 अप्रैल, 2023

PATNA : दिवंगत लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान (Ramvilas Paswan) के गैर पारिवारिक सर्वाधिक विश्वसनीय रहे पूर्व सांसद सूरजभान सिंह के इस बयान में दम है कि चाचा पशुपति कुमार पारस (Pashupati Kumar Paras) और भतीजा चिराग पासवान (Chirag Paswan) की गला काट राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता लोजपा के दोनों धरों को अस्तित्वविहीन बना देगी. अवांछित हालात से बचने के लिए दोनों को एक हो जाना चाहिए. रालोजपा और लोजपा ( रामविलास) को मिला कर पहले की तरह एक कर देना चाहिए. सूरजभान सिंह (Surajbhan Singh) लम्बे समय तक इस पार्टी में रहे हैं. इसकी खूबियों और खामियों, चाचा-भतीजा की क्षमताओं से अच्छी तरह वाकिफ हैं. लोजपा (LJP) में विभाजन के वक्त चिराग पासवान की ‘राजनीतिक अपरिपक्वता’ की जगह अनुभव को महत्व दे उन्होंने पशुपति कुमार पारस का नेतृत्व स्वीकार किया था. अब इसका अफसोस है. एकजुटता की जरूरत पर जोर उसी की अभिव्यक्ति है.

मुखरता का अभाव
गौर करने वाली बात है कि छह सांसदों में से पांच के बगावत की राह धर लेने से चिराग पासवान तात्कालिक तौर पर अलग-थलग पड़ गये थे. लगभग संपूर्ण संगठन पशुपति कुमार पारस के साथ हो गया था. लेकिन, नेतृत्व के गुण गौण रहने के कारण नेता (Leader) के तौर पर वह खुद को उभार नहीं पाये. इसकी सबसे बड़ी वजह मुखरता का अभाव रहा. लोजपा समर्थकों में स्वीकार्यता नहीं बन पायी. इसके बरक्स नेतृत्व में दिखे आक्रामक तेवर से लोजपा और रामविलास पासवान के वास्तविक उत्तराधिकारी की मान्यता चिराग पासवान को मिल गयी. बहुसंख्यक लोजपा समर्थकों ने नेता उन्हीं को मान लिया. लोजपा का मतलब चिराग पासवान हो गया.

अहमियत नहीं
अपनी पार्टी (Party) के नेतृत्व के लिजलिजापन से क्षुब्ध सूरजभान सिंह (Surajbhan Singh) के उक्त बयान का भाव यही है. यह भी कि राजनीति (Politics) में अब रालोजपा की कोई खास वकअत व अहमियत नहीं रह गयी है. इसी को दृष्टिगत रख सूरजभान सिंह नया राजनीतिक ठांव तलाश रहे हैं. सिर्फ सूरजभान सिंह की ही नहीं, रालोजपा (RLJP) के तीन सांसदों की भी यही सोच व समझ है. विश्लेषकों का मानना है कि दलबदल विरोधी कानून आड़े आ रहा है. ऐसा नहीं रहता, तो ये तीनों कब के छलांग भर देते. तीन में एक सूरजभान सिंह के भाई चंदन सिंह (Chandan Singh) हैं, जो नवादा (Nawada) से सांसद हैं. वह उस ओर ही रुख करेंगे जिधर सूरजभान सिंह जायेंगे.


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विकल्प हैं कई
वैशाली (Vaishali) की रालोजपा सांसद वीणा देवी (Veena Devi) के पास कई विकल्प हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) से सपरिवार मुलाकात से उनके भाजपा (BJP) से जुड़ने की चर्चा पसरी. उनके पति विधान पार्षद दिनेश प्रसाद सिंह (Dinesh Prasad Singh) जदयू में हैं. राजद नेतृत्व से भी मधुर संबंध है. अपनी इच्छा से इन तीनों दलों में से किसी एक से वह जुड़ जा सकती हैं. तीसरे खगड़िया के चौधरी महबूब अली कैसर (Choudhary Mahboob Ali Kaisar) का राजद (RJD) में जाना करीब-करीब तय है. 2020 में सिमरी बख्तियारपुर से उनके पुत्र युसूफ सलाहउद्दीन (Yusuf Salahuddin) को राजद की उम्मीदवारी मिली और वह विधायक निर्वाचित हुए, तभी यह तय हो गया था कि चौधरी महबूब अली कैसर देर-सबेर इसी दल से जुड़ेंगे. ईद पर उनका आतिथ्य स्वीकार कर तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejaswi Prasad Yadav) ने इसकी तस्दीक कर दी. बचते हैं स्वयं पशुपति कुमार पारस और उनके दूसरे भतीजा प्रिंस पासवान (Prince Paswan). उक्त बिखराव के बाद इन दोनों के जुड़ाव में स्थायित्व कितने दिनों तक रहता है, यह देखना दिलचस्प होगा.

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