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बड़ा सवाल : वोट किसका दिलायेंगे पप्पू यादव?

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अशोक कुमार

06 जुलाई 2024

Purnia : पूर्णिया जिले के रूपौली (Rupauli) विधानसभा क्षेत्र में 2000 से 2020 तक के छह चुनावों में से पांच में अपने बूते जीत हासिल करने वाली पूर्व विधायक बीमा भारती (Bima Bharti) क्या इस उपचुनाव (by-election) में ‘निरुपाय’ हो गयी हैं? उन्हें इसका अहसास हो या नहीं, पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव(Rajesh Ranjan alias Pappu Yadav)  के समक्ष ‘समर्पण’ से उठा यह सवाल उपचुनाव में उनकी संभावनाओं को समेट रहा है. लोग उन्हें कमजोर मानने लग गये हैं. बीमा भारती जदयू (JDU)की विधायक थीं. राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद जदयू और विधानसभा की सदस्यता छोड़ पूर्णिया संसदीय क्षेत्र से राजद की उम्मीदवार बन गयीं. चुनाव में ऐसी दुर्गति हुई कि राजद (RJD) के इतिहास में शायद ही कभी किसी उम्मीदवार की हुई होगी.

गुरुर ढाह दिया तेजस्वी का

पप्पू यादव पूर्णिया से महागठबंधन (grand alliance) में कांग्रेस (Congress) की उम्मीदवारी चाहते थे. तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejashwi Prasad Yadav) रोड़ा बन गये. निर्दलीय मैदान में उतर पप्पू यादव ने उनके घमंड को तोड़ दिया. ‘माय’ पर एकाधिकार का गुरुर ढाह दिया. बदले राजनीतिक हालात में राजद समर्थक यादव (Yadav) और मुस्लिम (Muslim) मतों का सम्पूर्ण साथ पप्पू यादव को मिल गया. अन्य क्षेत्रों की बात छोड़ दें, राजद की उम्मीदवार रहते बीमा भारती को खुद के रूपौली विधानसभा क्षेत्र में भी उन सामाजिक समूहों के मत नहीं मिले. एनडीए (NDA) की जीत रोकने के लिए सबने पप्पू यादव के पक्ष में मतदान कर दिया. दूसरी तरफ जिस गंगोता समाज (Gangota Samaj) से बीमा भारती आती हैं, उसको छोड़ अतिपिछड़ा वर्ग के तमाम मत जदयू को मिल गये.

आंकड़ों से झांकती हार

स्थिति यह हुई कि रूपौली में बीमा भारती 10 हजार 968 मतों पर अटक गयीं. सबसे ज्यादा 97 हजार 469 मत जदयू उम्मीदवार संतोष कुशवाहा (Santosh Kushwaha) को मिले.72 हजार 795 मतों के साथ पप्पू यादव दूसरे स्थान पर रहे. विश्लेषकों की समझ में संसदीय चुनाव के इस आंकड़े से झांकती हार की आशंका ने बीमा भारती को पप्पू यादव के समक्ष ‘नतमस्तक’ होने को मजबूर कर दिया. उनके इस ‘समर्पण’ को राजद नेतृत्व का समर्थन है या नहीं, यह नहीं कहा जा सकता. कुछ लोग बीमा भारती के पप्पू यादव के समक्ष ‘समर्पण’ को भवानीपुर (Bhawanipur) के चर्चित व्यवसायी गोपाल यादुका (Gopal Yaduka) हत्याकांड में आरोपित पति अवधेश मंडल (Avadhesh Mandal) और पुत्र राजा कुमार (Raja Kumar) के भूमिगत हो जाने से जोड़ कर देख रहे हैं.

ऐसा हो सकता है क्या ?

पर, इसमें दम इसलिए नहीं है कि ऐसे हालात में बीमा भारती पूर्व में चुनाव लड़ती और जीतती रही हैं. उपचुनाव में उनका दम इस वजह से निकल रहा है कि हाल के चुनावों में जिन जदयू समर्थक सामाजिक समूहों के बल पर वह बाजी मारती रही हैं, वे उनसे दूर हो गये हैं. ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि पप्पू यादव का साथ मिल जाने से उसकी भरपाई हो जा सकती है. पर, यहां सवाल उठता है कि वाकई ऐसा हो सकता है क्या? पप्पू यादव किन सामाजिक समूहों के मतों से भरपाई करायेंगे? संसदीय चुनाव में भले यादव और मुस्लिम मतों का साथ बीमा भारती को नहीं मिला, उपचुनाव में वे पूरी मुस्तैदी से राजद के पक्ष में डटे दिख रहे हैं.


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यह है जनाधार

सिर्फ डटे हुए ही नहीं हैं, पप्पू यादव पर भी समर्थन के लिए दबाव बनाये हुए हैं. जब ये दोनों समाज पक्ष में हैं ही तो फिर पप्पू यादव की पकड़ तीसरे किस सामाजिक समूह पर है कि उसका समर्थन वह बीमा भारती को दिला सकते हैं? रूपौली विधानसभा क्षेत्र में पप्पू यादव का जनाधार क्या है, 2020 के चुनाव परिणाम पर नजर डालने से शीशे की तरह साफ हो जाता है. उस चुनाव में दीपक कुमार शर्मा (Deepak Kumar Sharma) जन अधिकार पार्टी (Jan Adhikar Party) के उम्मीदवार थे. 03 हजार 134 मतों में निपट गये थे. बहरहाल, पप्पू यादव ने बीमा भारती का पक्ष खुले रूप में नहीं लिया है.

नहीं पड़ेगा कोई फर्क

विश्लेषकों का मानना है कि खुले तौर पर पक्ष लेते भी हैं तो उससे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला है. मुकाबला त्रिकोणीय है. यही बीमा भारती के लिए संजीवनी साबित हो सकता है. निर्दलीय शंकर सिंह (Shankar Singh) और जदयू के कलाधर प्रसाद मंडल(Kaladhar Prasad Mandal)  की जोर आजमाइश से उनकी जीत निकल आये, तो वह हैरान करने वाली बात नहीं होगी. वैसे, शंकर सिंह और कलाधर प्रसाद मंडल की भी बहुत कुछ ऐसी ही संभावना दिखती है. मतलब त्रिकोणीय मुकाबले में कोई भी कोण बाजी मार ले सकता है. इन सब के बीच खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह (Leshi Singh) की सक्रियता से शंकर सिंह का जनाधार टूट गया तो फिर कलाधर प्रसाद मंडल की किस्मत चमक जा सकती है.

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