तापमान लाइव

ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल

कानून में छेद खोज कर मंत्री ने नाती को बना लिया आप्त सचिव

शेयर करें:

 

राजनीतिक विश्लेषक
09.09.2021

PATNA. कानून बनाते हैं माननीय सांसद (MP) और विधायक (MLA). इसे बनाते समय एकाध छेद छोड़ देते हैं. इस इरादे से कि कभी जरूरत पड़े तो कानून (KANOON)  तोड़े बिना काम निकल जाये. इससे लोगों की नजर में चोरी आती भी नहीं और काम भी बन जाता है.

एक समय ऐसा भी था, जब मंत्री (MANTRI)अपने रिश्तेदारों को आप्त सचिव बना लेते थे. दामाद, साला, बहनोई, भतीजा, मामा, चाचा-सभी किस्म के रिश्तेदार इस पद पर खप जाते थे. फायदा यह होता था कि रिश्वत की पूरी रकम घुमा फिरा कर घर में रह जाती थी.
लेन-देन में ऊंच नीच की खबर भी बाहर नहीं निकल पाती थी. हालांकि, सावधानी के बावजूद कई मंत्री इन रिश्तेदार आप्त सचिवों के चलते बहुत बदनाम हुए.

आदेश जारी कर रोक लगी
रिश्तेदार आप्त सचिवों के बदनामी वाले किस्सों से तंग आकर सरकार ने एक आदेश जारी किया. कहा गया कि मंत्री (MANTRI) के रक्त सम्बंधी आप्त सचिव नहीं होंगे. इसके बाद इनके आप्त सचिव बनाने पर रोक लग गयी. इसका रास्ता निकाला गया. कागज पर किसी को आप्त सचिव बना दिया गया. उसे वेतन के नाम पर मामूली रकम दी जाने लगी.

वेतन का बड़ा हिस्सा मंत्री (MANTRI) या उनके रिश्तेदारों को जाने लगा. यह कारोबार इस समय भी चल रहा है. मंत्रियों को दो आप्त सचिव-सरकारी और बाहरी रखने की इजाजत है. बाहरी आप्त सचिव के मामले में यह हेराफेरी होती है.

नाती कैसे बने आप्त सचिव
सरकार के एक मंत्री ने अपने नाती को आप्त सचिव बनाया और सरकारी कानून भी नहीं टूटा. मंत्री (MANTRI) भाजपा कोटा के हैं. कुछ समय पूर्व बेटे को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं. उनकी दो शादी है. पहली पत्नी स्वजातीय हैं.

दूसरी पत्नी दूसरी अन्य जाति की हैं. वह पहले भी शादी शुदा थीं. पहले घर की एक बेटी है. उसी बेटी के बेटे को मंत्री ने अपना आप्त सचिव बना लिया. कानूनी रूप से मंत्री को पकड़ा नहीं जा सकता है.

दूसरी पत्नी के पहले पति से उत्पन्न सन्तान को कानूनी रूप से मंत्री का रक्त सम्बन्धी नहीं माना जा सकता है. लेकिन, सामाजिक व्यवहार में मंत्री (MANTRI) उसके नाना माने जाते हैं.

अपनी राय दें