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सृजन घोटाला: ऐसे फूटा पहाड़ समान पाप का घड़ा!

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विष्णुकांत मिश्र
22 अगस्त 2023

Bhagalpur : भागलपुर में सरकारी धन में सुनियोजित सेंधमारी सचमुच अचंभित करने वाली बात है. सृजन संस्था के लिए जिस किसी ने इसका ‘सृजन’ किया उसकी शातिर दिमागी को दाद देनी होगी. लगभग 14 वर्षों तक बड़े पैमाने पर बेखौफ अंदाज में सरकारी धन की लूट मचती रही और शासन-प्रशासन को उसकी भनक तक नहीं लगी. यह वाकई अपने आप में अजूबा है. सेंधमारी का जो तरीका अपनाया गया था उसमें रहस्य खुलने की संभावना अधिक नहीं थी. वह तो सृजन (Srijan) की ‘चांडाल चौकड़ी’ का दुर्भाग्य कहिये कि 12 फरवरी 2017 को सृजन की संचालिका मनोरमा देवी (Manorama Devi) काल के गाल में समा गयीं और उनके पाप के इस ‘साम्राज्य’ की विरासत संभालने वालों में अंदरुनी तौर पर वर्चस्व की जंग छिड़ गयी. धन हड़पने की होड़ मच गयी. दुष्परिणामस्वरूप फर्जीवाड़ा सतह पर आ गया. मनोरमा देवी धरती पर रहतीं तो शायद यह अभी रहस्य ही बना रहता.

ऐसे लगायी जाती थी सेंध
फर्जीवाड़े (Forgeries) का खेल ऐसा हो रहा था कि उसे पकड़ पाना बहुत कठिन था. सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड को वैध-अवैध मुख्यतः दो स्रोतों से सरकारी धन मिलता था. एक तो सृजन महिला सहकारी बैंक (Srijan Mahila Cooperative Bank) में सरकारी धन जमा होते थे और दूसरे सरकारी बैंकों में जमा होने वाले सरकारी धन फर्जी तरीके से उसके खाते में स्थानांतरित कर दिये जाते थे. विभिन्न मदों के सरकारी धन बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) तथा इंडियन बैंक (Indian Bank) की शाखाओं में आते थे. उस रकम को सृजन के खाते में स्थानांतरित कर दिया जाता था. सृजन उस राशि को बड़े व्यवसायियों, बिल्डरों एवं सफेदपोशों को सूद पर दे देता था. इससे अच्छी खासी कमाई हो जाती थी. इसमें जिला प्रशासन के संबद्ध अधिकारियों व कर्मचारियों तथा बैंककर्मियों की मिलीभगत थी.

पीएल खाते का ‘छाया खाता’
होता यह था कि जिस विभाग के पीएल खाते की रकम सृजन में स्थानांतरित होती थी उसकी जानकारी फर्जीवाड़े में शामिल कर्मियों के अलावा विभाग के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नहीं रहती थी. बैंककर्मियों की सांठ-गांठ से विभाग के पीएल खाते का ‘छाया खाता’ बना बैलेंस को मेंटन रखा जाता था. बैंक स्टेटमेंट (Bank statement) और पासबुक में वही बैलेंस दिखाया जाता था. इससे किसी को कोई संदेह नहीं होता था. संबद्ध विभाग जब कभी खाते से भुगतान के लिए कोई चेक निर्गत करता था तब सृजन की ओर से निर्धारित तिथि से पहले उतनी राशि खाते में डाल दी जाती थी. चेक  (Check) का भुगतान हो जाता था. कहीं कोई शक-संदेह पैदा नहीं होता था.


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चेक बाउंस कर गया…
मनोरमा देवी के जीवित रहने तक सिलसिला अबाध रहा. उनके निधन के बाद भी कुछ समय तक ऐसा होता रहा. लेकिन, इसी बीच सृजन की कमान संभालने वाली रजनी प्रिया (Rajni Priya) और उनके पति अमित कुमार (Amit Kumar) की मनोरमा देवी के कथित मुंहबोले पुत्र विपिन शर्मा (Vipin Sharma) से तकरार हो गयी. भागलपुर से गहरे संबंध रखने वाले भाजपा (BJP) के एक बड़े नेता को तकरार खत्म कराने की पहल करनी थी. वह भागलपुर आते इससे पहले भू-अर्जन कार्यालय का 74 करोड़ रुपये का चेक बैंक आफ बड़ौदा में बांउस (Bounce) कर गया. सृजन द्वारा उसके खाते में उक्त राशि जमा नहीं करने के चलते.

और रहस्य खुल गया
बताया जाता है कि उच्चतम न्यायालय (Supreme court) के निर्देशानुसार भूमि अधिग्रहण के मामले में किसानों को मुआवजा के लिए वह चेक निर्गत हुआ था. कहते हैं कि अमित कुमार ने अपेक्षित राशि की व्यवस्था करने का दबाव विपिन शर्मा पर बनाया. विपिन शर्मा मुकर गये और चेक बांउस कर गया. एक बार नहीं तीन बार. बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर जिलाधिकारी आदेश तितरमारे को संदेह हुआ और उन्होंने तत्कालीन उपविकास आयुक्त अमित कुमार के नेतृत्व में समिति गठित कर उसकी जांच करा दी. उसी जांच से फर्जीवाड़े का रहस्य खुल गया.

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