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सिमरिया धाम : घोषित हो गयी 41 दिवसीय अर्द्धकुंभ की तारीख

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राजकिशोर सिंह
25 अगस्त 2023  

Begusarai : सर्वमंगला सिद्धाश्रम काली धाम के संस्थापक स्वामी चिदात्मन जी महाराज (Swami Chidatman Ji Maharaj) ने गरीबों एवं बेसहारा बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा (Education) एवं भोजन (Meal) की व्यवस्था कर रखी है. इस बाबत सर्वमंगला विद्यालय संचालित है. वृद्ध एवं परित्यक्त महिलाओं व पुरुषों के लिए आश्रम (Hermitage) में रहने की विशेष व्यवस्था है. हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं. स्वामी चिदात्मन जी महाराज के अनुयायियों के मुताबिक यह उनके सेवा-धर्म का अनुकरणीय उत्कृष्ट कार्य है. 1977 में ‘मां काली शक्तिपीठ’ और ‘दस महाविद्या’, 1990 में ‘मां आदि शक्ति जगदम्बा शक्ति पीठ’ एवं 2000 में ‘मां चौंसठ योगिनी शक्तिपीठ’ की स्थापना कर उन्होंने देश को भक्ति (Devotion) एवं तंत्र के क्षेत्र में दुर्लभ अमरकृति प्रदान की. 1990 में ही उन्होंने ‘सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ सिद्धाश्रम’ की स्थापना की थी.

गंगा मुक्ति आंदोलन
मां गंगा की दुर्दशा से विचलित स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने गोमुख-गंगोत्री से गंगासागर (Gangasagar) तक गंगा की धारा को अविरल एवं निर्मल बनाने के लिए इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की आवाज उठायी और इसके लिए अपने स्तर से भी हरसंभव प्रयास किये. मुख्यतः इसी उद्देश्य से फरवरी 2003 में ‘गंगा मुक्ति आंदोलन’ की स्थापना की.सिमरिया (Simaria) में मोक्षदायिनी गंगा के तट पर कार्तिक माह में हर साल होनेवाले मासव्यापी कल्पवास का एक अलग महत्व है. सनातन धर्म (Sanatan Dharm) में आस्था रखने वालों की भावना को देख इसे 2008 से ही राजकीय मेला का दर्जा मिला हुआ है.

स्वामी चिदात्मन जी महाराज का गंगा स्नान.

‘जानकी पौड़ी’ का निर्माण
लेकिन, बिहार (Bihar) के अन्य घाटों की तुलना में सरकार को सर्वाधिक (लगभग आठ करोड़ सालाना) राजस्व देने वाले सिमरिया घाट की बदहाली वर्णनातीत है. इधर, कल्पवास के राजकीय मेला घोषित होने के 15 साल बाद राज्य सरकार का ध्यान इस ओर गया है. काफी जद्दोजहद के बाद इसे हरिद्वार (Haridwar) की हर की पौड़ी से भी बेहतर स्वरूप देने की योजना की शुरुआत इसी गंगा दशहरा के दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों से हुई. सनातन शास्त्रों में ऐसी चर्चा है कि भगवान श्रीराम (Lord Shriram) मिथिला (जनकपुर) से मां सीता के संग अयोध्या (Ayodhya) जा रहे थे तब मिथिला (Mithila) के प्रवेश द्वार सिमरिया के गंगा तट पर उन्होंने विश्राम किया था. इसी प्रसंग के मद्देनजर सिमरिया घाट के बदले स्वरूप को ‘जानकी पौड़ी’ नाम दिया जाने वाला है.

कुंभ पर गहन शोध
मत भिन्नताएं हो सकती हैं, परन्तु सनातन धर्मावलंबियों के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है कि स्वामी चिदात्मन जी महाराज की दीर्घ साधना व शोध से सिमरिया धाम को नयी आध्यात्मिक पहचान बनी है. इस रूप में कि कुंभ (Kumbh) पर गहन शोध के उपरांत उन्होंने शास्त्र द्वारा प्रमाणित किया कि भारत (India) में कुंभ केवल चार स्थानों पर ही नहीं, 12 स्थानों पर लगना चाहिये. सुप्त पड़े कुंभ स्थलों को जाग्रत करने के लिए उन्होंने 13 अक्तूबर 2011 को सिमरिया धाम के पावन गंगा तट पर पहला अर्द्धकुंभ का आयोजन किया. फिर 2017 में कार्तिक मास में पूर्ण कुंभ के आयोजन में उन्हें सफलता मिली. इन आयोेजनों में सिमरिया धाम समेत बेगूसराय जिले के अनेक मठ-मंदिरों के साथ-साथ तीर्थ पुरोहितों एवं जिलावासियों का अकल्पित सहयोग मिला.


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सक्रिय हुई समिति
इस साल अर्द्धकुंभ का योग है. कार्तिक मास में इसका आयोजन होना है. कल्पवास मेला (Kalpavas Mela) के साथ ही 18 अक्तूबर 2023 से 27 नवंबर 2023 तक अर्द्धकुंभ लगेगा. यह 41 दिनों का होगा. इसके शुरू होने से पहले ‘जानकी पौड़ी’ आकार ग्रहण कर लेगी.. राज्य सरकार (State Government) के संज्ञान में यह है. कुंभ आयोजन समिति भी सक्रिय हुई है. स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने अपने लाखों शिष्यों एवं भक्तों के कल्याणार्थ देश के विभिन्न हिस्सों में आश्रम, मंदिर एवं शक्तिपीठ की स्थापना कर रखी है.

शिकवा- शिकायत नहीं
वेद और योग की महत्ता को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 13 मार्च 2014 को ‘स्वामी चिदात्मन वेद विज्ञान अनुसंधान’ और 2018 में ‘बिहार योग विद्यापीठ’ की स्थापना की. भारत के संत-महात्माओं ने उनकेे गहन आध्यात्मिक ज्ञान, भक्ति एवं सेवा के संकल्पों को देखते हुए उन्हें ‘संत शिरोमणि, करपात्री, अग्निहोत्री एवं परमहंस’ की सर्वोच्चतम उपाधि से विभूषित किया. बहरहाल, स्वामी चिदात्मन जी महाराज को स्वयं किसी भी रूप में इसका कोई मलाल नहीं है, पर उनके अनुयायियों को यह अवश्य खल रहा है कि सिमरिया के संदर्भ में राज्य सरकार के स्तर पर उन्हें वेसा सम्मान नहीं मिल रहा है, जैसा मिलना चाहिये. सिर्फ अनुयायी ही नहीं, आमलोग भी ऐसा महसूस कर रहे हैं. वैसे, चिदात्मन जी महाराज नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के कार्यों से अभिभूत हैं. उन्हें कोई शिकवा-शिकायत नहीं है.

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