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ठाकुरगंज का विद्युत उपकेन्द्र : काफी रोचक कथा है भू-अर्जन की

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शिवकुमार राय
11 अक्तूबर, 2021

KISHANGANJ. भू-अर्जन की प्रक्रिया की अब तक की कथा काफी रोचक है. विद्युत उपकेन्द्र का शिलान्यास हुआ नहीं कि स्थानीय भू-माफियाओं की सक्रियता बढ़ गयी. भू-अधिग्रहण की बाबत बीएसपीटीसीएल का अनुरोध-पत्र जैसे ही जिला प्रशासन को मिला, मुआवजे के तौर पर बड़ी रकम पाने की नीयत से भू-माफियाओं ने ठाकुरगंज में भूखंड खरीदना शुरू कर दिया.

विद्युत उपकेन्द्र के लिए 25 एकड़ जमीन की जरूरत है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) द्वारा ‘हवाई शिलान्यास’ किये जाने के बाद के तीन वर्षों के दौरान चार जिलाधिकारी आये और गये. जमीन के मसले का कोई मुकम्मल समाधान नहीं निकला.

चार प्रस्ताव उपयुक्त पाये गये
किशनगंज जिला प्रशासन को भू-अधिग्रहण के लिए बीएसपीटीसीएल का पहला पत्र 30 अप्रैल 2018 को मिला था. उस वक्त पंकज दीक्षित (Pankaj Dixit) जिलाधिकारी थे. उन्होंने भू-अर्जन की प्रक्रिया शुरू करायी. विभिन्न तरह के 11 प्रस्ताव आये. प्रक्रिया आगे बढ़ती उससे पहले उनका तबादला हो गया.

उनके बाद महेन्द्र कुमार (Mahendra Kumar) आये. चतुर्दिक दबाब की वजह से उन्हें भी इस मामले में कोई कामयाबी नहीं मिली. महेन्द्र कुमार का स्थानांतरण हो गया. जिलाधिकारी के रूप में हिमांशु शर्मा (Himanshu Sharma) की पदस्थापना हुई. उन्होंने 01 अगस्त 2019 को पंकज दीक्षित के कार्यकाल में प्राप्त 11 प्रस्तावों में से चार को उपयुक्त मान उन्हें ‘संभावना प्रतिवेदन’ के तौर पर बीएसपीटीसीएल के प्रबंध निदेशक को प्रेषित कर दिया.

भातगांव का प्रस्ताव भी था उपयुक्त
स्थल निरीक्षण के बाद बीएसपीटीसीएल के विशेषज्ञों ने गोथरा-चुरली मौजे के भूखंड को चिन्ह्ति किया. किशनगंज जिला प्रशासन ने जिन चार प्रस्तावों को कारगर माना था उनमें जेपी सुदरानिया और पुष्पा देवी के भातगांव मौजे से संबंधित प्रस्ताव भी है. भातगांव बिहार, बंगाल और नेपाल की सीमा पर है. इसके एक तरफ नेपाल है तो दूसरी तरफ बंगाल. उत्तर पूर्व में बिहार की अंतिम ग्राम पंचायत गलगलिया का यह हिस्सा है.

जानकारों के मुताबिक प्रस्तावित विद्युत उपकेन्द्र में बिजली भूटान की चूखा परियोजना से आयेगी. चूखा परियोजना भारत (India) और भूटान (Bhutan) का संयुक्त उपक्रम है. ठाकुरगंज (Thakurganj) तक बिजली के संचरण का रास्ता संभवतः गलगलिया (भातगांव) होकर ही जायेगा.


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आर्थिक दृष्टि से व्यावहारिक नहीं
विद्युत उपकेन्द्र से गलगलिया को भी बिजली मिलेगी. नेपाल (Nepal) और बंगाल (Bengal) के आसपास के इलाकों को भी. ऐसे में ठाकुरगंज (गोथरा-चुरली मौजा) में विद्युत उपकेन्द्र की स्थापना हुई तो बिजली को गलगलिया ले जाने में दोहरा खर्च होगा. यानी गलगलिया से ठाकुरगंज और फिर ठाकुरगंज से गलगलिया (Galgaliya) संचरण की व्यवस्था करनी होगी. यहां सवाल उठता है कि आर्थिक दृष्टिकोण से यह व्यावहारिक होगा क्या?

क्षेत्रीय जनता का यह सवाल किशनगंज के जिलाधिकारी और बीएसपीटीसीएल के प्रबंध निदेशक से है. जिला प्रशासन का तर्क है कि गोथरा-चुरली मौजे की जमीन की कीमत कम रहने के कारण उसे चिन्ह्ति किया गया है. लेकिन, उसके पास इसका कोई जवाब नहीं है कि तकरीबन 25 एकड़ (फिलहाल 18 एकड़ 59 डिसमिल चिन्ह्ति) जमीन में 10 से 12 फीट गड्ढे को भरने में कितना धन खर्च होगा, कितना वक्त लगेगा और कितने दिनों के बाद वह जमीन काम के लायक हो पायेगी? इस दृष्टि से महंगी जमीन कौन होगी?

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