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मजबूर मुख्यमंत्री कर देंगे अब मुराद पूरी!

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राजनीतिक विश्लेषक
27 सितम्बर, 2021

PATNA. मजबूरी के फैसले का सबसे बुरा पहलू यह होता है कि आदमी बार-बार मजबूर होते रहता है. मतलब आपने मजबूरी में एक कदम उठाया, आपको हमेशा मजबूर ही होना पड़ेगा. इसका कोई परिमार्जन नहीं हो पाता है.

अंतिम समय में हर तरफ से सहानुभूति का यही स्वर उभरता है कि बेचारा मजबूर था. बाकी मामलों में आदमी परिस्थितियों के हाथों मजबूर होता है, मगर राजनीति (Politics) में किसी को योजना बनाकर मजबूर किया जाता है.

महीनी से बनाया गया मजबूर
नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के साथ यही हो रहा है. उन्हें बड़ी महीनी से योजना बनाकर मजबूर किया गया है. शुरू से देखिये. महागठबंधन (Mahagathbandhan) की सरकार भली-चंगी चल रही थी. सुनियोजित तरीके से उनके पास ऐसे लोगों को बिठाया गया, जो उस समय के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ( Deputy CM Tejaswi Prasad Yadav) के खिलाफ रोज-रोज कान भर सकें. उनकी नैतिकता को जगाया गया. इस हद तक कि वह अपनी सरकार खुद गिराने के लिए तैयार हो गये.


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उस समय उन्हें यही बताया गया कि आपकी सरकार के नम्बर दो को अगर जेल में डाल दिया गया तो भारी बदनामी होगी. देश देख रहा कि उस समय के उपमुख्यमंत्री का कुछ नहीं बिगड़ा. 2020 के विधानसभा चुनाव में वह अधिक ताकतवर बन कर उभरे. इधर नीतीश कुमार की पार्टी नम्बर तीन पर आकर टिक गयी.

तुनक जायेंगे किसी दिन…
चुनाव बाद की रणनीति का अध्याय इस रूप में विस्तार पा रहा है कि उन्हें पद छोड़ने की हद तक प्रताड़ित किया जाये. उनके बारे में धारणा भी यही है कि किसी दिन तुनक कर सरकार से अलग हो जायेंगे. यही माहौल बनाया भी जा रहा है. ‘हर घर नल जल’ योजना में वर्तमान उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद (Tarkishor Prasad) पर गंभीर आक्षेप-आरोप एवं जातीय जनगणना (Cast Census) के मुद्दे ने करीब-करीब वैसा माहौल बना भी दिया है.


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सरकार अब गयी कि तब गयी जैसे हालात दिखने लगे हैं. वैसे भी सरकार का काम ठप पड़ा हुआ है. जिसको मन होता है, सरकार को खरी-खोटी सुनाने लग जाता है. मुख्यमंत्री के लिए गृह विभाग (Home Department) महत्वपूर्ण होता है. सहयोगी भाजपा (BJP) के नेता इस विभाग को छोड़ने की भी मांग करने लगे थे.

कराये गये अनेक कार्य
याद होगा, राजद (RJD) ने चुनाव के समय कहा था कि सरकार बनी तो 10 लाख लोगों को नौकरी (Service) देंगे. सबसे पहले नीतीश कुमार ने ही जवाब दिया था-वेतन का रुपया कहां से लाओगे. उन्हीं नीतीश कुमार की कैबिनेट ने 20 लाख लोगों को रोजगार (Rojagar) देने का प्रस्ताव पारित किया. सबको मुफ्त कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) देने का चुनावी वादा सहयोगी भाजपा का था. इसे कैबिनेट के एजेंडा में दो नम्बर पर रख कर पारित करवाया गया. ऐसे और भी अनेक कार्य उनसे करवाये गये.

लेकिन, जातीय जनगणना के सवाल पर परिस्थितियां पलट गयी हैं. देखते रहिये. सरकार कब तक चलती है. क्योंकि अधिक मजबूर हुए तो सरकार से अलग होने का फैसला भी लिया जा सकता है. वैसे भी सरकार की रफ्तार यही बता रही है कि यह चल नहीं रही है. बस, वक्त गुजार रही है.

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