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उनका यह अहंकार सारण कर लेगा स्वीकार?

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राजेश पाठक
31 मार्च 2024

Chhapra : बिहार के अवांछित-अनैतिक सत्ता परिवर्तन के हालिया खेल में एक ऐसी महत्वपूर्ण खबर को अपेक्षित सुर्खियां नहीं मिलीं जिसमें राजनीति (Politics) के ऐसे कई तत्व हैं, जो भारी उलटफेर का आधार बन जा सकते हैं. खबर छपरा नगर निगम के महापौर पद के उपचुनाव से संबंधित है. वैसे तो खबर करीब-करीब महत्वहीन हो गयी थी, पर राजद (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad) की पुत्री रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya) के सारण संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ इसका महत्व फिर से कायम होने लग गया है. महापौर पद के उपचुनाव में विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े लक्ष्मीनारायण गुप्ता (Laxminarayan Gupta) की जीत हुई थी. सरसरी तौर पर देखें, तो यह खबर थी, पर सुर्खियां पाने लायक नहीं.

राजनीतिज्ञों के छूट गये पसीना
बिहार (Bihar) की राजनीति के लिए कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण खबर यह थी कि उपचुनाव के परिणाम ने सिर्फ पराजित उम्मीदवारों के ही नहीं, इसमें रुचि दिखाने वाले बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों के भी पसीना छुड़ा दिये थे. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और उनके बड़े पुत्र पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव (Tejpratap Yadav) के भी. इस परिणाम ने क्षेत्रीय भाजपा विधायक डा. सी एन गुप्ता (Dr. C N Gupta) को जनाधार सिमटने-सिकुड़ने का अहसास करा दिया, तो ‘जनसुराज’ की हवा बना मनमाफिक परिणाम यानी समर्थक उम्मीदवार की जीत के प्रति आश्वस्त विधान पार्षद ईं. सच्चिदानंद राय (Sachidanand Ray) एवं उनके समर्थकों को मायूसी में डूबो दिया. चुनाव परिणाम को देख-सुन सभी हक्का बक्का रह गये.


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राजनीति को इसमें दिलचस्पी नहीं
अन्य को क्या हुआ क्या नहीं, राजनीति को इसमें दिलचस्पी नहीं है. बड़ी बात यह थी कि उपचुनाव में लालू प्रसाद और तेजप्रताप यादव समर्थित उम्मीदवारों को मतदाताओं ने सिरे से नकार दिया. लालू प्रसाद ने पूर्व महापौर सुनीता देवी (Sunita Devi) के लिए अपील की थी, तो तेजप्रताप यादव ने रवि रौशन उर्फ गुड्डू यादव (Ravi Raushan urf Guddu Yadav) के लिए जोर लगाया था. रोड शो भी किया था. पर, मतदाताओं पर उसका कोई खास असर नहीं पड़ा. सुनीता देवी राजद के स्थानीय नेता शत्रुघ्न राय उर्फ नन्हें (Satrughan Ray urf Nanhe) की पत्नी हैं. दिसम्बर 2022 के चुनाव में भी वह महापौर पद की उम्मीदवार थीं. तीसरे स्थान पर अटक गयी थीं. जीत राखी गुप्ता की हुई थी जिन्हें बाद में तीन संतान से संबंधित कानून के तहत महापौर का पद गंवाना पड़ गया था. उपचुनाव इसी वजह से हुआ था.

प्रभावहीन रहा
राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष इस मुद्दे को सुनीता देवी ने ही उठाया था. कथित रूप से लालू प्रसाद का समर्थन और पूर्व मंत्री जितेन्द्र कुमार राय (Jitendra Kumar Ray) का साथ मिलने के बाद भी वह उपचुनाव में जीत हासिल नहीं कर पायीं. 10 हजार 797 मतों के साथ एक पायदान नीचे यानी चौथे स्थान पर खिसक गयीं. इससे सपष्ट है कि लालू प्रसाद की अपील प्रभावहीन रही. अब उस रवि रौशन उर्फ गुड्डू यादव की चुनावी दुर्गति पर नजर डालिये जिनके लिए तेजप्रताप यादव ने शहर में रोड शो किया था.

अनुमान लगाइये
गुड्डू यादव को मात्र 03 हजार 286 मत मिले और वह सातवें स्थान पर रहे. यह सच है कि स्थानीय निकाय के चुनाव हों या विधानसभा के या फिर लोकसभा के, सबके चरित्र अलग-अलग होते हैं, मुद्दे भिन्न होते हैं, पर उससे एक-दूसरे के परिणाम का कुछ न कुछ अनुमान तो लग ही जाता है. उक्त आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाइये कि लालू प्रसाद की पुत्री रोहिणी आचार्य सारण संसदीय क्षेत्र से राजद की उम्मीदवार होती हैं, तो परिणाम क्या सामने आ सकता है.

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